मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा भगवान बुद्ध का जीवन
इलिया, हिन्दुस्तान संवाद। बुद्ध विहार महामाया सरोवर सैदूपुर के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय
इलिया, हिन्दुस्तान संवाद। बुद्ध विहार महामाया सरोवर सैदूपुर के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय सनातनी बुद्ध धम्म देशना कथा के आखिरी दिन सोमवार की देर शाम बोधगया से पधारीं कथावाचिका भन्ते बंदना ने भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी कथा का श्रवण कराया। उन्होंने उनके ज्ञान प्राप्ति के बाद धम्म प्रचार, मानव कल्याण और महापरिनिर्वाण की कथा का वर्णन किया। कहा कि उनका संपूर्ण जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा।
भगवान बुद्ध के उपदेश
कथावाचिका ने बताया कि बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज में फैली ऊंच-नीच, भेदभाव, हिंसा, अंधविश्वास और कुरीतियों के विरुद्ध लोगों को जागरूक किया। भगवान बुद्ध ने करुणा, मैत्री, अहिंसा, सत्य और सदाचार का संदेश देते हुए लोगों को मध्यम मार्ग अपनाने की शिक्षा दी।
वर्तमान समय में बुद्ध के विचार
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपने प्रथम उपदेश के माध्यम से धम्म चक्र प्रवर्तन किया और इसके बाद गांव-गांव तथा नगर-नगर जाकर लोगों को धम्म का संदेश दिया। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा और वैमनस्य का मार्ग छोड़कर प्रेम, शांति और सद्भाव का मार्ग अपनाया। बुद्ध ने सिखाया कि मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है, जन्म से नहीं।
समाज में शांति की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में बढ़ती हिंसा, द्वेष और नैतिक पतन को रोकने के लिए भगवान बुद्ध के विचारों को आत्मसात करना आवश्यक है। यदि लोग पंचशील और अष्टांगिक मार्ग का पालन करें तो समाज में शांति, भाईचारा और मानवता की स्थापना हो सकती है। इस अवसर पर गौरीशंकर मौर्य, लालजी, नंदलाल, रामअवतार मौर्य, नंदलाल शास्त्री, लवकुश गुप्ता, चक्रधारी वर्मा, विमल मौर्य, शिवकुमार, श्यामा देवी, नीलिमा देवी, उषा देबी सुमित्रा, सहित क्षेत्र के अनेक बौद्ध अनुयायी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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