पुल निर्माण कार्य ठप, स्थानीय लोग परेशान
Chandauli News - विशुनपुर क्षेत्र के कांटा गांव के समीप लेफ्ट कर्मनाशा मुख्य नहर पर पुल का निर्माण कार्य फिलहाल ठप पड़ा है। किसानों की सिंचाई हेतु पुल निर्माण को 15 दिनों के लिए रोका गया है। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी है, लेकिन किसानों को राहत मिली है। निर्माण कार्य जल्द ही पुनः शुरू होगा।
विशुनपुर, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के कांटा गांव के समीप लेफ्ट कर्मनाशा मुख्य नहर पर बन रहे पुल का निर्माण कार्य इन दिनों ठप पड़ा हुआ है। पुल निर्माण एजेंसी की ओर से कार्य अस्थायी रूप से बंद किए जाने से जहां क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। किसानों के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि गेहूं की सिंचाई को ध्यान में रखते हुए पुल निर्माण के कार्य को पन्द्रह दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। ताकि खेतों तक पानी पहुंचे। किसानों ने सिंचाई के लिए नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की थी। जिसे विभाग ने गंभीरता से लेते हुए पुल निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोक दिया।
सिंचाई विभाग के अनुसार गेहूं की फसल इस समय बाल निकलने की अवस्था में है और यदि इस दौरान पानी नहीं मिला तो उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कांटा गांव के पास लेफ्ट कर्मनाशा मुख्य नहर पर बन रहा यह पुल क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण से कांटा, जगदीशपुर,गोरारी, गांव सहित लगभग आधा दर्जन गांवों को सीधा संपर्क मार्ग मिलेगा। वर्तमान में ग्रामीणों को इन गांवों के बीच आवागमन के लिए कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। पुल बन जाने के बाद न केवल आवागमन सुगम होगा। बल्कि कृषि उत्पादों के परिवहन और आपातकालीन सेवाओं को भी काफी सहूलियत मिलेगी। स्थानीय ग्रामीण भूपेंद्र प्रताप सिंह, विष्णु प्रताप सिंह का कहना है कि पुल निर्माण कार्य काफी पहले शुरू हुआ था। लेकिन धीमी गति के कारण अब तक पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य ठप होने से लोगों को आशंका है कि कहीं यह परियोजना और अधिक समय तक लटक न जाए। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सिंचाई अवधि समाप्त होते ही निर्माण कार्य पुनः शुरू कर दिया जाएगा और इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सिंचाई और विकास कार्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए। ताकि न तो फसल प्रभावित हो और न ही विकास कार्य अनावश्यक रूप से बाधित हों। फिलहाल पन्द्रह दिनों तक नहर में पानी छोड़े जाने से किसानों को राहत है।

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