चंपत राय को थी चोरी की पूरी जानकारी, रकम बरामद कर छिपाई, पूर्व गणना प्रभारी महिपाल का नया दावा
राम मंदिर से गणना प्रभारी रहे महिपाल सिंह ने एक बार फिर पूर्व महासचिव चंपत राय पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। महिपाल सिंह ने दावा किया कि चोरी की पूरी जानकारी चंपत राय को थी। खुद ही चोरी की रकम भी बरामद कराई और सब कुछ छिपाया था।

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में नया मोड़ सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से शुरुआत में जुड़े रहे पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने दावा किया है कि पांच जून को ही कथित गबन की रकम बरामद कर ली गई थी, लेकिन इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। उनका आरोप है कि पूर्व महासचिव चंपत राय ने पूरी घटना छिपाए रखी। उनका दावा है कि वह खुद पांच जून को चंपत राय और दिनेंद्र दास से मिले थे। दोनों ने कहा था कि आपने जो कहा था, वह सच था। महिपाल ने कुछ दिनों पहले दावा किया था कि 2021 में ही उन्होंने चोरी पकड़ी थी और चंपत राय समेत अन्य पदाधिकारियों को बताई थी। इसके बाद भी कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। महिपाल को ही गणना प्रभारी के पद से हटा दिया गया था।
एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में महिपाल सिंह ने कहा कि छह जुलाई को ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने ट्रस्ट के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि बड़ी संख्या में सोने-चांदी की वस्तुएं जमा हुई थीं। उनके अनुसार, उपलब्ध आंकड़े इस दावे से मेल नहीं खाते। महिपाल सिंह ने बताया कि पांच जून को अयोध्या में उनकी मुलाकात महंत दिनेंद्र दास और चंपत राय से हुई थी। उनका दावा है कि दोनों ने उनसे कहा था कि ‘आपकी बात सही निकली...।’ उन्होंने यह भी कहा कि उसी दिन वह योग केंद्र जा रहे थे और बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उसी योग केंद्र से कथित चढ़ावा चोरी की रकम बरामद हुई थी।
सबूत, आरोपों के बावजूद एसआईटी ने नहीं लिए बयान
पूर्व लेखाकार ने आरोप लगाया कि उन्होंने ईमेल और फोन के जरिए एसआईटी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन मजबूत सबूत और गंभीर आरोपों के बावजूद जांच एजेंसी ने संपर्क नहीं किया और न बयान दर्ज किया। महिपाल ने यह भी दावा किया कि नौ जून को एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू देने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों से अलग-थलग कर दिया गया। उनके अनुसार, उन्हें गुरु पूजा कार्यक्रम में भी आने से मना कर दिया गया।
उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े खर्चों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पत्थरों की खरीद अधिक कीमत पर की गई। उनका कहना है कि पहले करीब 800 करोड़ की आवश्यकता बताई गई थी। संघ कार्यकर्ताओं ने करीब 3,300 करोड़ रुपये जुटाए। व्यय शुरुआती अनुमान से कई गुना अधिक हो गया।
नई एसआईटी से बढ़ेगा जांच का दायरा और भरोसा
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने के निर्देश को कानून के जानकार पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच के संकेत के रूप में देखते हैं। माना जा रहा है कि अदालत पुरानी एसआईटी की जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं रही होगी। सर्वोच्च अदालत ने आम जनभावना को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है। अब नई जांच का दायरा बड़े जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य कथित तौर पर बचाए जा रहे लोगों तक भी पहुंच सकता है।
कानून के विशेषज्ञ कहते हैं कि नई एसआईटी का गठन आम श्रद्धालुओं में जांच के प्रति भरोसा कायम करने की दिशा में बड़ा कदम है। अदालत किसी मामले में नई जांच टीम गठित करती है, तो इसका सामान्य अर्थ यह है कि वह अधिक व्यापक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच सुनिश्चित करना चाहती है। इसका उद्देश्य उन पहलुओं की भी जांच कराना हो सकता है, जो पहले पर्याप्त रूप से सामने नहीं आए।
फैजाबाद बार एसोसिएशन अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र कहते हैं कि यह तय है कि नई एसआईटी अब बेहद चौकन्ना रहकर जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी टीम किसी को भी बख्शेगी, ऐसी संभावना अब न के बराबर है। उन्होंने कहा कि अब तक कई लोगों ने अपनी तहरीर दी है। हमारी बार ने भी तहरीर देकर आरोप लगाया है कि इसमें चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव समेत अन्य को भी आरोपी बनाया जाए। अब इन शिकायतों को भी नई एसआटी जांच के दायरे में ला सकती है।
पुरानी जांच के साक्ष्य केस डायरी भी जुड़ेंगे
कालिका मिश्र ने बताया कि आम तौर पर नई एसआईटी को पहले से उपलब्ध केस डायरी, दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य सबूतों का अध्ययन का अधिकार होता है। जरूरत पर वह पुराने गवाहों और आरोपियों से दोबारा पूछताछ कर नए साक्ष्य जुटा सकती है। यानी इस मामले में भी पुरानी जांच के रिकॉर्ड खत्म नहीं होंगे, बल्कि नई जांच का हिस्सा बन जाएंगे।
जांच का दायरा बढ़ेगा
अब जांच का फोकस केवल धन गबन तक सीमित नहीं रह सकता। कालिका मिश्र का मानना है कि नई टीम देख सकती है कि चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई। निगरानी तंत्र कितना प्रभावी था, किस स्तर पर लापरवाही हुई और किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसकी जवाबदेही कैसे तय होगी।
नए आरोप और आरोपी बढ़ेंगे
जिन लोगों के खिलाफ पहले से कार्रवाई हुई है, उनके लिए भी नई एसआईटी की जांच महत्वपूर्ण होगी। नए साक्ष्य मिलते हैं तो आरोपों में बदलाव, नए आरोपियों को शामिल करने या किसी को राहत मिलने जैसी कानूनी संभावनाएं बन सकती हैं। वहीं यदि पहले की जांच सही पाई जाती है तो उसे नई जांच में भी मजबूती मिल सकती है। अदालत का उद्देश्य व्यापक और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना हो सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या किसी नए व्यक्ति की भूमिका सामने आती है या पहले के निष्कर्षों में कोई बदलाव होता है।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


