यूपी में FIR में नहीं लिखी जाएगी जाति, जातियों के नाम पर रैलियों पर रोक, योगी सरकार का फैसला
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। यूपी में अब पुलिस एफआईआर, मेमो, अरेस्ट वारंट वगैरह में किसी के नाम के साथ जाति नहीं लिखी जाएगी। इसके साथ ही जाति के नाम पर कोई रैली या सम्मेलन पर रोक लगा दी गई है।

उत्तर प्रदेश में पुलिस की एफआईआर, अरेस्ट मेमो, वारंट या किसी भी दस्तावेज पर अब जाति नहीं लिखी जाएगी। हाईकोर्ट के इस बाबत आदेश के बाद योगी सरकार ने भी फैसला लागू कर दिया है। मुख्य सचिव की तरफ से इसका शासनादेश जारी करते हुए सभी अधिकारियों को कड़ाई से आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट का आदेश आने के एक हफ्ते के अंदर ही योगी सरकार की तरफ से शासनादेश जारी करने को जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए उठाए गए बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही यूपी में अब जाति आधारित रैलियों और प्रदर्शनों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधियों की सख्त निगरानी की जाएगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के 16 सितंबर को अपने ऐतिहासिक फैसले में पुलिस दस्तावेजों में जाति के उल्लेख को संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया था। इस कदम का उद्देश्य समाज में जाति आधारित भेदभाव को कम करना और संवैधानिक समानता के सिद्धांत को मजबूत करना उद्देश्य है। इसी को देखते हुए सरकार ने सामाजिक समानता को बढ़ावा देने और जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पुलिस एफआईआर, अरेस्ट मेमो और अन्य सरकारी दस्तावेजों में किसी व्यक्ति की जाति का उल्लेख न करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य सचिव की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया है कि एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, अपराध विवरण फॉर्म, कोर्ट सरेंडर मेमो और अंतिम पुलिस रिपोर्ट यानी किसी भी दस्तावेज में अब किसी व्यक्ति की जाति का जिक्र नहीं किया जाएगा। पुलिस रिकॉर्ड्स, थानों के नोटिस बोर्ड, पुलिस वाहनों और साइनबोर्ड्स से जाति से संबंधित सभी संकेत, नारे और कॉलम हटाए जाएंगे।
इसके साथ ही राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) में जाति से संबंधित कॉलम को खाली छोड़ा जाएगा। इस कॉलम को स्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए NCRB को पत्र भी लिखा जाएगा। इसके साथ ही यह कहा गया है कि अब दस्तावेजों में जाति हटाने के बाद व्यक्ति की पहचान के लिए पिता के साथ-साथ माता का नाम भी अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा। हालांकि केवल SC/ST (अनुसूचित जाति/जनजाति) एक्ट से संबंधित मामलों में कानूनी आवश्यकता के अनुसार ही जाति का उल्लेख किया जाएगा।
जाति के आधार पर होने वाली रैलियों पर रोक लगी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने जिला व पुलिस प्रशासन से कहा गया है कि वह जाति के आधार पर होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम व रैलियों पर रोक लगाएं। पुलिस दस्तावेजों में आरोपी के पिता के नाम के साथ मां का नाम भी लिखा जाएगा। सीसीटीएनएस पोर्टल से जाति वाले कॉलम को डिलीट कराया जाएगा। इसके अलावा सोशल मीडिया पर जाति को लेकर की जाने वाली आपत्तिजनक पोस्ट पर भी निगरानी कराई जाए।
एससी-एसटी एक्ट के मामलों में नहीं प्रभावी होगा आदेश
इस आदेश में कहा गया है कि एससी-एसटी एक्ट जैसे मामले इस आदेश से प्रभावी नहीं होंगे। यह भी कहा गया है कि जल्दी ही हाईकोर्ट के आदेश के पालन के लिए एसओपी जारी करने के साथ ही पुलिस नियमावली में संशोधन भी किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था
जाति के उल्लेख को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 सितम्बर को आदेश दिया था कि पुलिस के दस्तावेजों में अभियुक्तों की जाति का उल्लेख न किया जाए और वाहनों, सार्वजनिक स्थानों पर साइन बोर्ड, सोशल मीडिया आदि में भी जातीय महिमामंडन न किया जाए। इसको लेकर कई बिन्दुओं पर निर्देश जारी किए गए हैं।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को देख रहे हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं। पत्रकारिता में 25 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। सिटी टीम का नेतृत्व भी किया। बीकॉम में ग्रेजुएट और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर रिपोर्टिंग भी की है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।
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