एक महीने के काम में लगे दो साल, सीएजी ने खोली यूपी के आयुष विभाग की पोल

Feb 21, 2026 07:00 am ISTYogesh Yadav रोहित मिश्र, लखनऊ
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यूपी के आयुष विभाग के एक अजब कारनामे का खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है। इसमें बताया गया है कि टेलीमेडिसिन के लिए टैबलेट खरीदे गए लेकिन सिम और डेटा नहीं खरीदा गया। सिम न होने की वजह से जिस योजना को एक महीने में लागू किया जाना था उसमें दो साल लग गए।

एक महीने के काम में लगे दो साल, सीएजी ने खोली यूपी के आयुष विभाग की पोल

कोरोना काल में आयुष विभाग ने टेलीमेडिसिन सेवाएं लागू करने के लिए टैबलेट खरीद के लिए मई 2020 अग्रिम भुगतान कर दिया। योजना एक महीने में शुरू होनी थी। हालांकि, खरीद का करार करते हुए विभाग भूल गया कि टैबलेट को चलाने के लिए सिम भी चाहिए और उसमें डेटा भी होना चाहिए। बाद में सिम और डाटा का इंतजाम करके योजना शुरू होने में दो साल लग गए। यही नहीं, योजना शुरू होने के बाद सिम रीचार्ज न होने की वजह से आठ महीने बाद योजना फिर ठप हो गई।

आयुष विभाग के इस कारनामे का खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट में हुआ है। सीएजी ने पाया कि राज्य आयुष सोसाइटी ने आयुष अस्पतालों में टेलीमेडिसिन की व्यवस्था शुरू करवाने के लिए यूपीडेस्को से मई 2020 में करार किया। टेलीमेडिसिन की सुविधा यूपीडेस्को में पंजीकृत फर्म से करवाई जानी थी। योजना की कुल लागत 2.11 करोड रुपये थी। फर्म को सोसाइटी ने 1.05 करोड़ का अग्रिम भी जारी कर दिया। हालांकि, टैबलेट के साथ सिम का प्रावधान न होने की वजह से योजना लटक गई। टेलीमेडिसिन की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी।

बाद में विक्रेता ने खरीद में गैरजरूरी उपकरणों को हटाकर डाटा के साथ सिम उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव रखा। विक्रेता ने 5.47 लाख रुपये के उपकरण हटाए और इंटरनेट के साथ सिम खरीद के लिए 5.41 लाख का प्रस्ताव दिया था। आखिरकार खरीद की प्रक्रिया 2022 में पूरी हो सकी और जुलाई 2022 में सिम के साथ टैबलेट का वितरण हुआ। जो योजना एक महीने में शुरू होनी थी, उसे लागू होने में दो साल लग गए। यही नहीं, छह महीने बाद सिम रीचार्ज नहीं करवाया गया, जिसकी वजह से दो महीने की छूट की अवधि के बाद सेवा 22 नवंबर 2022 को बंद हो गई।

गैर जरूरी उपकरणों की खरीद पर उठाए सवाल

सीएजी ने गैरजरूरी उपकरणों की खरीद पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजना में सिम का प्रावधान न करना और अनावश्यक उपकरणों का प्रावधान करना इंगित करता है कि इसे राज्य आयुष सोसायटी द्वारा बिना किसी समुचित विचार के अनुमोदित किया गया था।

अक्रियाशील टेलीमेडिसिन व्यवस्था पर खर्च किए 49 लाख

सीएजी ने यह भी पाया कि कार्यदायी संस्था ने 16 जुलाई 2021 से 15 जुलाई 2022 की अवधि के लिए 53.46 लाख और 15 जुलाई 2022 से 14 जुलाई 2023 तक के लिए 55.38 लाख रुपये का अनुरक्षण शुल्क मांगा। राज्य आयुष सोसाइटी ने पहली अवधि के लिए फरवरी 2023 में और दूसरी अवधि के लिए नवंबर 2023 में भुगतान भी कर दिया। सीएजी ने पाया कि नवंबर 2022 से सेवाएं बंद होने के बाद, इंटरनेट सेवायें 31 अक्तूबर 2023 में दोबारा शुरू हुईं। 11 महीने से अधिक समय तक टेलीमेडिसिन का लाभ जनता को नहीं मिला, जबकि अक्रियाशील टेलीमेडिसिन प्रणाली के सालाना अनुरक्षण पर 49.46 लाख का खर्च कर दिया गया।

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लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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