यूपी में फिर बुलडोजर ऐक्शन, मुरादाबाद में 44 साल पुराने मदरसे को एमडीए ने कराया ध्वस्त
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने शनिवार को दिल्ली रोड पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 साल पुराने मदरसा जामिया अरबिया हयातुल उलूम को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया।

Moradabad News: यूपी में एक बार फिर बुलडोजर ऐक्शन हुआ है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने शनिवार को दिल्ली रोड पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 साल पुराने मदरसा जामिया अरबिया हयातुल उलूम को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया। करीब 25 साल तक चली लंबी कानूनी जंग और हाईकोर्ट द्वारा मदरसा पक्ष की याचिका खारिज किए जाने के बाद यह एक्शन लिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी विरोध से निपटने के लिए पूरा इलाका छावनी में तब्दील रहा और भारी पुलिस बल तैनात रहा।
शनिवार दोपहर जब एमडीए का प्रवर्तन दल दिल्ली रोड पहुंचा, तो माहौल में जबरदस्त सरगर्मी थी। उपाध्यक्ष अनुभव सिंह और सचिव पंकज वर्मा खुद मोर्चे पर डटे रहे। मझोला पुलिस की मौजूदगी में बुलडोजर गरज उठा और अवैध निर्माण को ढहाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। भारी फोर्स और एमडीए की मुस्तैदी का ही असर था कि पूरे एक्शन के दौरान मदरसा पक्ष की ओर से कोई भी विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। अधिकारी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए थे और कुछ ही घंटों में अरबों की बेशकीमती जमीन से अवैध अतिक्रमण का सफाया कर दिया गया।
25 साल बाद मिला इंसाफ, अब बसेगी आधुनिक कॉलोनी
अधिग्रहित 175.44 हेक्टेयर जमीन पर यह मदरसा अवैध रूप से निर्मित था। मदरसा कमेटी ने अब तक चार याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन बीती 29 अप्रैल को हाईकोर्ट ने चौथी याचिका भी खारिज कर दी। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद एमडीए ने पहले जमीन की घेराबंदी कर बाउंड्री वॉल कराई और शनिवार को ढांचा ध्वस्त कर दिया। अब इस प्राइम लोकेशन पर प्राधिकरण एक अत्याधुनिक आवासीय योजना विकसित करने की तैयारी में है।
अदालत में क्यों हारा मदरसा पक्ष?
मदरसा कमेटी की दलील थी कि संस्थान 1979-80 से चल रहा है और उन्हें मुआवजा नहीं मिला। इसके जवाब में एमडीए ने पुख्ता दस्तावेज पेश किए कि जमीन का कब्जा 7 नवंबर 2000 को ही लिया जा चुका था और मुआवजे की राशि सरकारी खजाने में जमा है। कोर्ट ने माना कि एक ही मामले को बार-बार चुनौती देना वैधानिक रूप से सही नहीं है, जिसके बाद मदरसा पक्ष का दावा पूरी तरह कमजोर पड़ गया। एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह ने बताया, हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद जमीन को पूरी तरह कब्जा मुक्त करा लिया गया है। अब यहां जल्द ही आधुनिक आवासीय योजना विकसित की जाएगी। लोग निर्माण से पहले अनुमति जरूर लें ताकि ऐसी कार्रवाई की नौबत न आए।
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लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


