
मेरठ में लगातार दूसरे दिन बुलडोजर ऐक्शन जारी, गिराया जा रहा बचा खुचा कॉम्पलेक्स
शनिवार को कॉम्प्लेक्स के पिछले हिस्से को पहले ही पूरी तरह गिराया जा चुका था। रविवार को अधूरे हिस्सों को गिराने की कार्रवाई चल रही है। प्रशासन ने पूरे परिसर को चारों ओर से सील कर दिया है। किसी भी व्यक्ति को कॉम्प्लेक्स के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। भारी पुलिस बल तैनात है।
Bulldozer Action in Meerut: यूपी के मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में लगातार दूसरे दिन बुलडोजर ऐक्शन जारी है। रविवार की सुबह 10 बजे से प्रशासन और आवास एवं विकास परिषद की टीमें मौके पर पहुंचीं और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई से पहले मलबे और अधूरी बची इमारतों पर पानी का छिड़काव किया गया, ताकि धूल और उड़ने वाले कणों से आसपास का क्षेत्र प्रभावित न हो। इसके बाद परिषद अधिकारियों ने सुरक्षा का जायजा लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की।
बता दें कि शनिवार को कॉम्प्लेक्स के पिछले हिस्से को पहले ही पूरी तरह जमींदोज किया जा चुका था। रविवार को अधूरे हिस्सों को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन ने पूरे परिसर को चारों ओर से सील कर दिया है। किसी भी व्यक्ति को कॉम्प्लेक्स के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न उत्पन्न हो। अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और कार्रवाई पूरी तरह सुरक्षा घेरे में की जा रही है।
35 साल पहले शुरू हुआ था निर्माण
मेरठ के आबूलेन मार्केट को टक्कर देने वाली शास्त्रीनगर सेक्टर 6 के सेंट्रल मार्केट में भू उपयोग परिवर्तन कर अवैध निर्माणों की शुरुआत आज से 35 साल पहले वर्ष 1990 में हुई थी। योजना में आवास एवं विकास परिषद ने 48 भूखंड ही व्यावसायिक गतिविधियों को स्वीकृत किए थे। इन प्लाटों में शुरू हुई व्यावसायिक गतिविधियों को देखकर लोगों ने आवासीय प्लॉटों में भी दुकान-कॉम्पलेक्स बनाने शुरू कर दिए। वर्ष 2000 के बाद यहां देखते ही देखते 99 आवासीय भवन पूरी तरह मार्केट में तब्दील हो गए। अब यहां इन भवनों में दुकानों, शोरूम के साथ होटल आदि भी संचालित किए जा रहे हैं। परिषद से मिली जानकारी के अनुसार सेक्टर 6 में कुल आवासीय संपत्ति 754 हैं, जिसमें 607 संपत्ति पर ही वास्तविक भू-उपयोग होता हुआ मिला है।
1978 और 1983 में आई थी आवासीय योजना
उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर गृहस्थानम योजना नंबर 3 को 1978 में लॉन्च किया गया था। इसके बाद दूसरी योजना स्कीम नंबर 7 वर्ष 1983-84 में लॉन्च की गई थी। इस योजना में सेक्टर 1 से लेकर 13 तक शामिल किए गए हैं। इन योजनाओं में परिषद ने लोगों की सहूलियत के लिए दुकानें और मार्केट भी आवंटित की थी। दुकानों और मार्केट की आड़ में लोगों ने अपने आवासों में भू-उपयोग चेंज कर अवैध रूप से दुकानें और शोरूम संचालित कर लिए हैं।
आंसुओं और सिसकियों के बीच खंडहर हो गया कॉम्प्लेक्स
सेंट्रल मार्केट में अवैध कॉम्प्लेक्स को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए व्यापारियों ने तमाम कोशिशें कीं। हालांकि दलीलें हार गईं और इसी के साथ कॉम्प्लेक्स की उम्र शनिवार को पूरी हो गई। सुबह से शाम तक व्यापारियों और दुकानों में नौकरी करने वाले लोगों की आंखों से आंसू बहते रहे। भीगी आंखों और कांपते कलेजे के साथ व्यापारी बुलडोजर से ध्वस्त होती दुकानों को देखते रहे। वहीं यहां काम करने वाले लोगों की आंखों में आंसू, दिल में बेबसी, आजीविका को लेकर चिंता की लकीरें उनके माथे पर साफ नजर आ रही थीं।
गम और गुस्से के बीच बंद सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के साथ नौकरी पेशा लोग भी रह-रहकर रोते-बिलखते रहे। व्यापारियों, उनके परिजनों, नौकरों को रोते-बिलखते देख अन्य लोग भी अपनी आंखों से अश्रुओं की धारा नहीं रोक पाए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होते ही व्यापारियों के परिवार रोने-बिलखने लगे। वह बोले कि उनका तो सब कुछ उजड़ गया। मनोज और रमेश ने कहा कि पिछले 15 सालों से लगातार दुकान पर काम कर रहे हैं, जिससे उनके परिवार का पालन पोषण हो रहा था। अब दुकानों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद मालिक तो सड़क पर आ ही जाएंगे, उनकी रोजी-रोटी भी चली गई। व्यापारियों ने कहा कि 30 सालों से यहां दुकान-व्यापार कर रहे थे। जिंदगी की पूंजी भी चली गई। अब कैसे बुढ़ापा कटेगा। इनके साथ-साथ यहां काम करने वाले लोगों की भी आंखों में आंसू थे।





