
बुलंदशहर कांड के फैसले ने याद दिलाई सिस्टम की लापरवाही, जब महिला सुरक्षा हुई थी तार-तार
बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप मामले में सोमवार को अदालत का फैसला आया। 2016 में हुए इस जघन्य अपराध के सभी पांच दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालांकि इतने देर से मिला न्याय कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप मामले में सोमवार को अदालत का फैसला आया। वर्ष 2016 में हुए इस जघन्य अपराध के सभी पांच दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। आठ साल बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है, वहीं यह फैसला उस समय की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
जुलाई 2016 में बुलंदशहर हाईवे पर एक परिवार के साथ दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। बदमाशों ने हाईवे पर कार रोककर मां और बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जबकि पिता और बेटे के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि इस दौरान पीड़ितों ने डायल 100 पर कई बार कॉल की, लेकिन पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंची। घटना ने प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा किया था।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए अदालत ने दोषियों को समाज के लिए खतरनाक बताते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधियों को समाज से अलग रखना जरूरी है। यह निर्णय पीड़ित पक्ष के लिए राहत भरा रहा, वहीं पुलिस की तत्कालीन भूमिका पर भी सवाल उठे।
महिला सुरक्षा पर उठे थे सवाल
बुलंदशहर की घटना अकेली नहीं थी। उसी दौर में यूपी में महिलाओं के खिलाफ कई गंभीर अपराध सामने आए थे। बदायूं में साल 2014 में पेड़ से लटकती दो चचेरी बहनों की लाशों ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। पुलिस पर FIR न लिखने और आरोपियों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगे। पुलिस की कार्यशैली ने पूरे प्रदेश को शर्मसार किया था। मथुरा में दो नाबालिग बहनों को 15 दिनों तक बंधक बनाकर गैंगरेप किया गया। पुलिस ने जब केस दबाने की कोशिश की, तो एक पीड़िता के गर्भवती होने पर मामला खुला। वहीं, मुरादाबाद जिले में थाने के भीतर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप पुलिसकर्मी पर लगा था। इसके अलावा इटावा में एक पीड़िता की मां को निर्वस्त्र कर पीटा गया।
आंकड़ों में भी दिखी भयावह स्थिति
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक उस समय उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले लगातार बढ़े थे। साल 2014 में 38467, 2015 में 35527 और 2016 में 49262 मामले दर्ज हुए थे।
देर से सही, लेकिन न्याय
बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप मामले में आया यह फैसला इस बात का संकेत है कि न्याय भले ही देर से मिला हो, लेकिन दोषियों को सजा तक पहुंचाया गया। यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए बल्कि महिला सुरक्षा को लेकर समाज और व्यवस्था के लिए भी एक अहम संदेश माना जा रहा है।





