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बोले बुलंदशहर: खुले में रखे ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों से मंडरा रहा खतरा

बोले बुलंदशहर: खुले में रखे ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों से मंडरा रहा खतरा

संक्षेप:

Bulandsehar News - बिजली आपूर्ति के लिए आवश्यक ट्रांसफार्मर इन दिनों जानलेवा साबित हो रहे हैं। खुले में रखे ट्रांसफार्मर लोगों के लिए खतरा बन गए हैं। बारिश में करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कई हादसे हो चुके हैं। लोग विभाग की लापरवाही पर नाराज हैं और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

Jan 29, 2026 12:28 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बुलंदशहर
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बिजली आपूर्ति की रीढ़ कहे जाने वाले ट्रांसफार्मर इन दिनों जानलेवा साबित हो रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक खुले में रखे ट्रांसफार्मर हादसों को दावत दे रहे हैं। कई जगह इन्हें रखने के लिए चबूतरा तक नहीं बनाया गया है। बिना फेंसिंग के रखे ट्रांसफार्मर आम लोगों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। जहां कहीं पर ट्रांसफार्मर की फेंसिंग की गई है, वह भी सिर्फ खानापूरी तक सीमित है। ट्रांसफार्मरों को लेकर कई बार शिकायत की गई लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि विभाग का दावा है कि खुले में रखे ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा दुरुस्त की जा रही है। तार फेंसिंग के अलावा प्लिंथ (चबूतरा) बनवाया जा रहा है। यह काम प्राथमिकता पर कराया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इसकी बिल्कुल अलग है। खुले में रखे इन ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों से बारिश में और भी खतरा बढ रहा है।

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शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जगह-जगह खुले में रखे ट्रांसफार्मर लोगों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। ट्रांसफार्मर से निकली चिंगारी से बड़ा हादसा होने की अशंका रहती है। तमाम जगहों पर आग लगने से मवेशियों, पछियों की मौत हो चुकी है। जबकि तमाम लोग झुलस चुके हैं। आम लोगों की शिकायतों के बावजूद विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में तमाम जगहों पर खुले में ट्रांसफार्मर रखे हैं। जिला मुख्यालय से दूर करीब 22 किलोमीटर पर स्थित खुर्जा कस्बे में खुले में कई ट्रांसफार्मर खुले में रखे हुए हैं। ट्रांसफार्मर के आसपास जहां झाड़ झंखाड़ भी हैं। बारिश के समय बिजली के तारों में स्पार्किंग भी होती है। ऐसे में करंट फैलने का खतरा बना रहता है। इससे अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोगों के सिर पर खतरा मंडराया करता है। कस्बे को जाने वाले कई रास्तों में चबूतरे पर नीचे रखा ट्रांसफार्मर बिजली विभाग के जिम्मेदारों की पोल खोल रहा है। इसी रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ो लोगों का दिन भर आना जाना लगा रहता है। कई बार तो ऐसा हुआ कि अचानक तारों की स्पार्किंग से आसपास के घरों तक चिंगारियां फैल गई। हालांकि गनीमत रही कि किसी के घर में आग नहीं लगी, लेकिन मोहल्ले के लोगों में जरूर दहशत बनी हुई है। बिजली विभाग के जिम्मेदारों के द्वारा खुले में रखे हुए ट्रांसफार्मर की व्यवस्था न किए जाने को लेकर लोगों में आक्रोश भी व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि हर माह करोड़ों रुपया का राजस्व कमाने वाले विभाग के पास व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए बजट ही नहीं है। अगर ट्रांसफार्मर खुले में लगाए जाएं तो बिजली विभाग इसकी पूरी तरह व्यवस्था कराए। आबादी से इसकी दूरी भी तय है, लेकिन उसके बावजूद मानक के विपरीत मनचाहे स्थान पर ट्रांसफार्मर रख दिए जाते हैं। वहीं, खुले में रखे ट्रांसफार्मर की बैरिकेडिंग करवाने के निर्देश हैं। इक्का दुक्का स्थान को छोड़कर अधिकांश जगह खुले में विद्युत पोल के नीचे ही जमीन पर ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। ट्रांसफार्मर रखे जाने के पहले उसकी बैरिकेडिंग कराने का प्रावधान है। बिजली विभाग लोगों की जान की परवाह नहीं करते।

बारिश के समय बढ़ जाता है और ज्यादा खतरा-

खुले स्थानों पर लगे ट्रांसफार्मर से बारिश के समय में खतरा और भी बढ़ जाता है। पेड़ पौधों के साथ पानी में करंट संचालित होने का खतरा बढ़ जाता है। खेतों में किसान काम करते रहते हैं। ऐसे में वहां भी खतरा मंडराता रहता है। इसके अलावा कहीं बांस बल्ली के सहारे बिजली के तार लटक रहे हैं तो कहीं खभों की दूरी अधिक होने के कारण तार लटकते रहते हैं । ऐसे में हादसे की आशंका बनी रहती है।

आबादी के बीच रखे ट्रांसफार्मर पर विशेष निगरानी की जरूरत-

जनपद में तमाम जगह आबादी के बीच खुले में ट्रांसफार्मर रखे हैं। इनसे हमेशा हादसे की आशंका रहती है। ऐसे ट्रांसफार्मर हटाए जाए या फिर उनकी सुरक्षा के उपाय किए जाएं। कई जगह नीचे रखे ट्रांसफार्मर के आसपास बारिश का पानी भर जाता है। इससे लोगों पर खतरा मंडराया करता है। अगर बिजली विभाग के अधिकारी समय-समय पर तारों में लिपटे झाड़-झंखाड़ की साफ सफाई और लटके तारों को सही करा दें तो खतरा कम हो सकता है।

आए दिन होती हैं करंट की घटनाएं-

जनपद में आए दिन करंट लगने की घटनाएं होती रहती हैं। कई बार करंट की चपेट में हादसे हुए हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नही है। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्र में करंट की चपेट में आने से इस साल कई लोगों की मौतें भी हो चुकी हैं। मवेशी और पंछियों की मौत के कोई आंकड़े भी हैं। इस सबके बावजूद बिजली विभाग सुरक्षा के प्रति तनिक भी संजीदा नहीं है। जबकि आए दिन ग्रामीणों के द्वारा इस तरह की समस्याओं को लेकर शिकायतें भी की जा रही हैं।

बदइंतजामी से जूझ रहे स्थानीय लोग-

मकड़जाल की तरह जगह-जगह लटक रहे बिजली के तार और खुले में रखे ट्रांसफार्मर से बिजली विभाग की बदइंतजामी और लापरवाही का दंश झेल रहे लोग परेशान हो चुके हैं। इन्हीं अव्यवस्थाओं के चलते जनपद में आए दिन बिजली विभाग से होने वाली दुर्घटनाओं से लोगों की जाने भी जा रही हैं। हादसों को कम करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को व्यवस्थाएं सुधारनी पड़ेगी। घनी आबादी के बीच निकलने वाली हाइटेंशन लाइन को हटाकर भूमिगत केबल लाइन बिछाई जाए। खेत खलिहान और आबादी के बीच लटक रहे बिजली के तारों सही कराया जाय। लाइन पर आने वाली पेड़ों की टहनियों की समय-समय पर छंटाई करवाई जाए। इससे बिजली के करंट की घटनाएं कम होगी। ग्रामीण को भी बिजली के जोखिम के बारे में जागरूक किया जाए।

कई जगह नीचे रखे ट्रांसफार्मर के आसपास बारिश का पानी भर जाता है। जिससे शार्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। इससे लोगों पर खतरा मंडराया करता है। कई बार मवेशी इनकी चपेट में आकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। लिहाजा इन्हें चबूतरे पर रखकर फेंसिंग करवाएं। ट्रांसफार्मर को ओवरलोड और शॉर्ट-सर्किट से बचाने के लिए उचित सुरक्षा उपकरण, जैसे कि सर्किट ब्रेकर या फ्यूज, लगाए जाने चाहिए।

हादसे खतरा बन रहे खुले में रखे ट्रांसफार्मर

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में व्यस्ततम सड़क व चौराहों पर विद्युत विभाग द्वारा खुले में रखे गए ट्रांसफार्मर हादसे को दावत दे रहे हैं। चबूतरों पर रखे गए ट्रासफार्मरों के आस-पास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं, ऐसे में इन ट्रांसफार्मरों से कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रह रही है। लेकिन जिम्मेदारों का इस पर ध्यान नहीं जा रहा है। वहीं कई जगहों पर रखे गए ट्रांसफार्मरों के आसपास घास-फूस भी उग गए हैं। चबूतरों पर रखे ट्रांसफार्मरों के सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा लाखों का बजट हर वर्ष आता है, लेकिन एक-दो काम को छोड़कर शायद ही कोई सुरक्षा के लिए इंतजाम किए जाते हैं, ट्रांसफार्मर के सुरक्षा की बात करें तो चबूतरे पर रखने के बाद उसे चारों तरफ जाली के घेरे में रखना चाहिए,ट्रांसफार्मर से निकले तारों पर गार्डिंग लगी होनी चाहिए, ट्रांसफार्मर के आस-पास ज्वलनशील वस्तु नही होनी चाहिए। आस-पास उगे घास-फूल की सफाई भी होती रहनी चाहिए।

शिकायतें-

1. आबादी के बीच में कई ट्रांसफार्मर खुले में रखे हुए हैं। इनसे हादसे की आशंका बनी रहती है।

2. तमाम ट्रांसफार्मर ओवरलोड चलते रहते हैं। ओवरलोडिंग के चलते भी हादसा हो सकता है।

3. जब ट्रांसफार्मर खराब होता है, उपभोक्ता विभाग से संपर्क करते हैं। ट्रांसफार्मर लाने के लिए उपभोक्ताओं को पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

4. विभाग में ट्रांसफार्मर का का अभाव रहता है। खराब होने पर बदलने में काफी वक्त लगता है।

5. ट्रांसफार्मर रखने के लिए चबूतरा नहीं बनाया गया है। कई जगह मिट्टी में ही ट्रांसफॉर्म रखे हुए हैं।

सुझाव-

1. बिजली विभाग में ट्रांसफार्मर को ठीक करने के लिए टोल फ्री नंबर हो। ताकि शिकायत करने पर तुरंत कार्रवाई हो।

2. ट्रांसफार्मर खराब हो जाए तो उसे तय स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की हो। उपभोक्ताओं पर किसी तरह का भार न डाला जाए।

3. ट्रांसफार्मर जल जाने पर नजदीकी बिजली उपकेंद्र पर उसके बदलवाने की व्यवस्था हो। लोगों को अपने खर्चे से मुख्यालय न जाना पड़े।

4. गर्मियों में अधिकांश ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ जाता है। इसके लिए स्थाई इंतजाम होने चाहिए।

5. विभाग में ट्रांसफार्मरों का अभाव खत्म किया जाए। इससे निपटने के लिए ठोस इंतजाम किए जाए।

● हमारी भी सुनों-

खुले में ट्रांसफार्मर रखने से पहले बिजली विभाग को सुरक्षा की व्यवस्थाएं करनी चाहिए। इसे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।

-पूजा

लोहे की रेलिग या फिर कटीले तार से चारों तरफ वैरिकेडिंग की जाए, जिससे मवेशी या कोई भी व्यक्ति ट्रांसफार्मर के पास न पहुंच सकें।

-वंदना

हर माह बिजली का बिल जमा किए जाने के बावजूद बिजली विभाग सुरक्षा व्यवस्था के प्रति गंभीर नहीं है।

-गुंजन

गांव के छोटे-छोटे बच्चे क्रिकेट खेलते रहते हैं। कई बार ट्रांसफार्मर के पास गेंद वली जाती है। ऐसे में उनके करंट की चपेट में आने का खतरा रहता है।

-अंजली

विभाग अगर सुरक्षा व्यवस्था नहीं दे सकता है तो उसे खुले में ट्रांसफार्मर रखने का कोई अधिकार भी नहीं है। आमजन के लिए यह बहुत बड़ा खतरा होते है।

-हेमा रानी

घरों की बालकनी से निकले बिजली के नंगे तारों को हटाकर केबल लाइन बिछाई जाए, जिससे खतरा कम हो सकता है।

-सीमा सिंह

धनी आबादी से दूर एकात स्थान पर बिजली के ट्रांसफार्मर लगाए जाएं और उसे क्षेत्र में किसी को जाने की अनुमति न दी जाए।

-मुनेश

संविदा पर काम करने वाले कर्मचारी उपभोक्ताओं से व्यवहार ठीक नहीं रखते हैं। जब कभी समस्या करते है समस्या की शिकायत सुनते नहीं है।

-निशा

चाहे समाधान दिवस हो या बिजली विभाग की ओर से कैप लगाए गए हो, व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए शिकायते हमेशा आती है।

-रानी

बिजली विभाग की ओर से तय मानक के स्थान पर ही ट्रांसफार्मर लगाया जाए। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

-शिमला

शहर में कई जगहों पर खुले ट्रांसफार्मर की वजह से अभिभावक डरते है कि बच्चे नजदीक न जाएं। पावर हाउस में कई बार शिकायत की गई। लेकिन कोई सुनता ही नहीं है।

-बोबी

बिजली विभाग से कई बार मांग मांग कर चुके हैं लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। कोई अधिकारी जांच करने नहीं आता है। जिस कारण लोगों में आक्रोश है।

-सुशीला राज

छोटे बच्चे कालेज में खुले में रखे ट्रांसफार्मर के पास से निकलते हैं, जहां कोई भी सुरक्षा नहीं है। डर बना रहता है। ट्रांसफार्मर की सुरक्षा व्यवस्था बहुत जरुरी है।

-शनि

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कोट---

सड़कों के किनारे या जो भी खुले में ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं उन्हें बिजनेस प्लान के तहत व्यवस्थित कराया जाएगा। किसी भी उपभोक्ता को कोई असुविधा होती है तो स्थानीय विभागीय कर्मियों को सूचना दे सकता है, उसकी समस्या का समाधान कराया जाएगा।

-शिशिर कुमार चाही, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉरपोरेशन

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