Bulandsehar News: अनूठी कांवड़ : बुआ को कांवड़ में बैठाकर ला रहे पुष्पेंद्र
Bulandsehar News: अनूपशहर में श्रावण मास में शिवभक्तों की कांवड़ यात्रा में एक भतीजे ने अपनी 75 वर्षीय बुआ को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल से भरा कलश लेकर यात्रा शुरू की। यह यात्रा पारिवारिक रिश्तों और मानवता की मिसाल पेश करती है। लोग इस अद्भुत यात्रा को देखकर भावुक हो गए।

Bulandsehar News: अनूपशहर। श्रावण मास में जहां हजारों शिवभक्त छोटी काशी से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ लेकर जा रहे हैं। तो वहीं एक भतीजे ने अपनी वृद्ध बुआ को कांवड़ में बैठाकर और दूसरी ओर गंगाजल से भरा कलश रखकर यात्रा शुरू की। अनूठी कांवड़ यात्रा ने कलियुग में श्रवण कुमार की याद ताजा कर दी है। छोटी काशी में झमाझम बारिश में भी शिव भक्तों के आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई।
कांवड़ यात्रा के दृश्य
गुरुवार को तेज बारिश में भी कावड़ियों ने नगर के विभिन्न गंगा घाटों से कांवड़ में गंगाजल भरकर बम बम भोले का जय घोष करते हुए गंतव्य को आगे बढ़ रहे हैं। कांवड़ यात्रा में कुछ ऐसे दृश्य भी सामने आते हैं जो मानवता, सेवा और पारिवारिक रिश्तों की मिसाल बन जाते हैं। यही मिसाल शिवभक्त पुष्पेंद्र पेश की है, जिसमें उसने अपने भाई व बच्चों के साथ छोटी काशी के जाह्नवी द्वारा से कावड़ यात्रा प्रारंभ की। उसकी कांवड़ का एक सिरा गंगाजल से भरे कलशों को रखा, जबकि दूसरे सिरे पर उसने अपनी 75 वर्षीय बुआ बेगवती को बैठाकर खुर्जा क्षेत्र के गांव सीकरी के लिए रवाना हुआ है।
भावनाएं और परिवारिक संबंध
इस अनूठी कावड़ यात्रा को देख हर कोई भावुक होकर कांवड़ यात्रा की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल कैमरों में कैद किए।
शिवभक्त पुष्पेंद्र का मानना है कि माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। उसकी बुआ की लंबे समय से इच्छा थी कि वह कांवड़ यात्रा का पुण्य प्राप्त करें, लेकिन उम्र और स्वास्थ्य के कारण उनके लिए पैदल यात्रा संभव नहीं थी। ऐसे में उसने अपनी बुआ की इच्छा पूरी कराने का संकल्प लिया और उसने भाई डालचंद व पुत्र रॉकी, नीरज, बेटी नंदिनी, अर्जुन, राजपाल के साथ लेकर कांवड़ यात्रा शुरू की। उन्होंने बताया कि लगभग 60 किलोमीटर यात्रा को 3 दिन में पूर्ण कर लेंगे। शिवरात्रि पर्व पर गांव के शिव मंदिर में बुआ से भगवान आशुतोष का जल अभिषेक कराकर उनकी इच्छा पूर्ण करेंगे। कांवड़ यात्रा देख स्थानीय लोगों का कहना है, कि आज के समय में जब पारिवारिक रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, ऐसे उदाहरण समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं। सभी लोग श्रद्धालु के इस कार्य की सराहना करते हुए कहते नजर आए कि उसने वास्तव में कलयुग में श्रवण कुमार की याद ताजा कर दी है।


