बोले बुलंदशहर:: छोटी काशी: श्रद्धालुओं को मिले जाम से निजात, तब बने बात
Bulandsehar News - अनूपशहर में गंगा स्नान के समय लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है। कार्तिक पूर्णिमा और गंगा दशहरा जैसे त्योहारों पर जाम की स्थिति गंभीर होती है।
छोटी काशी अनूपशहर में कल-कल बहती गंगा की धारा सदियों से पुरातन संस्कृति और सभ्यताओं को संजोए आ रही है। गंगा नदी को हिंदू धर्म में माता गंगा के रूप में पूजा जाता है। बताया जाता है कि गंगा स्नान से मनुष्य के समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान करने से मनुष्य को समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है। इसी आस्था के चलते छोटी काशी गंगा तट पर कई त्योहार और प्रत्येक माह की पूर्णिमा-अमावस्या व गंगा दशहरा पर विशाल मेला का आयोजन किया जाता है। छोटी काशी में गंगा स्नान के लिए विभिन्न प्रांतों व जनपदों से अमावस्या-पूर्णिमा व दशहरा के अलावा कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला लक्खी मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु वाहनों से गंगा स्नान करने के लिए पहुंचते हैं।

बड़ी संख्या में वहां पहुंचने से नगर में जाम की स्थिति बन जाती है। यहां के स्थानीय लोगों ने जाम से निजात पाने की मांग जिला प्रशासन से की है। प्रशासन के लिए लाखों श्रद्धालुओं को गंगा स्नान करने की व्यवस्था चुनौती से कम नहीं होती है। जिसमें जाम एक आम समस्या है। खासकर कार्तिक पूर्णिमा, गंगा दशहरा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान, जहां लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं, जिससे अलीगढ़ बस स्टैंड से जाह्नवी द्वार, फव्वारा चौक से मस्तराम घाट, गंगा पुल से अहार रोड, इमली बजरिया, कला बाजार आदि स्थानों पर जाम लगना लगभग तय है। लाखों श्रद्धालुओं के एक समय पर पहुंचने से बनती है जाम की स्थिति जाम से निपटने के लिए असफल प्रयास किए जा रहे हैं। लोग जब एक जगह से दूसरी जगह या फिर रोजमर्रा की चीजें लेने के लिए निकलते हैं तो अक्सर जाम की समस्या से जूझते हैं। कई घंटे के बाद अपने गंतव्य पर पहुंचते हैं। जाम से सिर्फ समय का ही नुकसान नहीं होता बल्कि सेहत पर भी हमला हो रहा है। श्रद्धालु जब निकलते हैं तो यह मानकर निकलते हैं कि जाम के कारण कई घंटे का समय लग सकता है। जाम के वजह से समय का नुकसान होता है, लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। सड़क पर मनमानी तरीके से यातायात संचालित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा कहीं पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण फुटपाथ और सड़क के किनारे वाहन खड़े करने के लिए शहरवासी मजबूर होते हैं। यातायात विभाग के लापरवाही से शहर की सड़क ही पार्किंग स्थल में तब्दील हो जाती है। जाम की समस्या से घंटों जूझने के बाद लोग एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं, लेकिन प्रशासन को इससे फर्क नहीं पड़ता कि शहर में जाम की समस्या दिनों-दिन गहराती जा रही है। गंगा स्नान के लिए दूर-दराज के हजारों लाखों श्रद्धालुओं वाहनों से गंगा स्नान करने के लिए छोटी काशी आते है, जो सड़कों की क्षमता से कई गुना अधिक होती है, जिसके चलते जमा की स्थिति बनना स्वाभाविक है। नगर में पर्याप्त पार्किंग स्थान न होने, घाटों की ओर जाने वाली संकरे और सीमित सड़कें है। इसके अलावा सड़क के दोनों ओर दोनों अस्थाई दुकानें-ठेले लगे होने आदि कारणों से श्रद्धालुओं के वाहन जमा में फंस जाने से लंबा जाम लग जाता है। कॉरिडोर से सभी घाट जुड़ें तो जाम से मिलेगी निजात- गंगा स्नान मेलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, घाटों पर जाने के लिए संकरे रास्ते, घाटों को जोड़ने वाला कॉरिडोर के न होना जाम के प्रमुख कारण है। यदि गंगा पुल से मस्तराम घाट तक गंगा किनारे सभी घाटों को जोड़कर कॉरिडोर बनाया जाये तो श्रद्धालुओं को नगर में प्रवेश करने की वजय गंगा पुल से किसी भी घाट पर पहुंचने में आसानी होगी। जिससे नगर में लगने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा। फव्वारा चौक से मस्तराम घाट तक लगता है भीषण जाम छोटी काशी में जेपी संस्था द्वारा श्रद्धालुओं को स्नान करने के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित विशाल मस्तराम घाट का निर्माण कराया था। घाट पर समस्त सुविधा होने के चलते अधिकतर श्रद्धालु इसी घाट पर स्नान करने के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं को मस्तराम घाट पर पहुंचने के लिए फव्वारा चौक से संकरे रास्ता जाना पड़ता है। नगर में इसी स्थान पर सबसे ज्यादा जाम लगता है। प्रशासन द्वारा लाख व्यवस्था करने के बावजूद भी श्रद्धालु तपती दोपहरी में घर तक पहुंचाने के लिए घंटों जाम में फांसे रहते हैं। बड़े वाहनों के प्रवेश पर लगाया जाए प्रतिबंध- इन दिनों अनूपशहर में मनमाने तरीके से यातायात को संचालित किया जा रहा है। शहर में बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जाए तो जाम की समस्या से निजात पाया जा सकता है। जाम की वजह से ईधन की बर्बादी होती है और प्रदूषण में कई गुना वृद्धि भी हो रही है। यातायात रूट निकालकर शहर को जाम से निजात दिलाया जा सकता है। शहर के बुद्धिजीवी समाज से जुड़े सदस्यों का कहना है कि अगर शहर में स्कूलों बसों के आवागमन के वक्त ट्रैफिक पुलिस को खास एहतियात बरतना चाहिये, क्योंकि सुबह और छुट्टी के वक्त अचानक इन वाहनों का दबाव बढ़ता है। अनूपशहर में जाम से कराह रहे मार्ग, पैदल चलना भी मुश्किल अनूपशहर में ट्रैफिक जाम से लोग आए दिन बहुत परेशान हो रहे हैं। जाम की वजह से समय की बर्बादी होती ही है ईंधन की भी खपत बढ़ जाती है और वायु प्रदूषण होता है। जाम से सड़क पर पैदल चलना भी काफी मुश्किल हो गया है। जाम में समय बर्बाद होने की वजह से लोग असुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाएं और चोटें होती हैं। जाम की वजह से लगातार हॉर्न बजाने की वजह से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है तथा बाजार में खरीदारी करना मुश्किल हो जा रहा है। जाम की वजह से स्कूली बच्चे, रोगी, वृद्ध और विकलांगों को भी परेशानी होती है। आए दिन ट्रैफिक जाम से सड़क पर चलने वाले आम लोग हर दिन जूझने को मजबूर हैं। ट्रैफिक व्यवस्था दिनों-दिन बद से बदतर होती जा रही है। मुख्य सड़कों पर रोजाना लगने वाले जाम से आमजन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों के किनारे अव्यवस्थित तरीके से खड़ी गाड़ियां और ई रिक्शा चालक कहीं भी वाहन रोककर सवारी उतारने-चढ़ाने की प्रवृत्ति इस समस्या को और गंभीर बना रही है। बाजार इलाकों में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं जहां पैदल चलने तक की जगह नहीं बचती। शिकायतें- 1. अनूपशहर में मेला के दिनों में बड़े वाहन प्रवेश करते हैं, जिसके कारण जाम की समस्या हो जाती है। 2. अनूपशहर में ऑटो, ई रिक्शा, बाइक को खड़े करने के लिए पार्किंग की व्यव्स्था नहीं है। जिसके कारण लोग कहीं भी वाहन को खड़े कर देते हैं। 3. काफी देर तक जाम में रहने के कारण बीमारी से ग्रसित होना पड़ता है। यात्रा कर रहे लोग चिड़चिड़ा उठते हैं। 4. ऑटो चालक सवारी बैठाने के लिए कहीं भी बीच सड़क पर वाहन को रोक देते है जिससे जाम की समस्या होती है। सुझाव- 1. अनूपशहर में बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। बड़े बाहनों के बजाए शहर में छोटे वाहन को ही अनुमति देना चाहिए। 2. अनूपशहर में कुछ जगहों पर पार्किंग बनाया जाए। साथ ही वन-वे और टू-वे का निर्माण किया जाए। इससे जाम की समस्या से निजात मिलेगी। 3. जिला प्रशासन को अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहिए, साथ ही सीसीटीवी से पूरी जगह को लैस कर देना चाहिए। 4. जाम के वक्त एक नियम लागू किया जाए। जाम में सभी लोग अपने वाहन को बंद कर के इंधन बचाने के साथ-साथ पर्यावरण को बचाने का काम किया जाना चाहिए। हमारी भी सुनो- कार्तिक मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में जाम लगना स्वाभाविक है, लेकिन सही योजना और प्रबंधन से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। -मनु शर्मा मार्ग-योजना और यातायात व्यवस्था वन-वे ट्रैफिक सिस्टम लागू करें ताकि वाहन उलझें नहीं। आपातकालीन वाहनों के लिए अलग लेन आरक्षित रहे। -मोहर सिंह भारी वाहनों का मेला क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। ताकि क्षमता से अधिक वहां मेला क्षेत्र में न पहुंचे। -भगवान सिंह चौहान पार्किंग व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। मेले से दूर बड़ी अस्थाई पार्किंग की बनाने की आवश्यकता जिससे भारी वाहन को पार्किंग में खड़ा किया जाए। -राजीव शर्मा नगर की सभी घाटों को जोड़ने के लिए गंगा पुल से मस्तराम घाट तक कॉरिडोर बनाने की आवश्यकता है। जिसे श्रद्धालु नगर मैं आने की वजह कॉरिडोर से किसी भी घाट पर पहुंच सकते हैं। -राजीव सक्सेना मेले की प्रमुख रास्तों पर के फ्लेक्स बोर्ड, पोस्टर, सोशल मीडिया, स्थानीय समाचार और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से रूट प्लान और पार्किंग जानकारी देना। -कपूर गुप्ता श्रद्धालुओं को जाम की स्थिति के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाना चाहिए, ताकि वे अपने यात्रा की योजना बना सकें। पुलिस के अतिरिक्त स्काउट/गाइड, एनसीसी, स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेकर भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है। -सुधीर गुप्ता गंगा स्नान मेले के दौरान नगर के गंगा घाट की ओर जाने वाले प्रत्येक मार्ग पर वाहनों की संख्या बढ़ जाने से जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे दुर्घटना की संभावना रहती है प्रशासन को एक योजना बनाकर प्रत्येक गंगा स्नान के दौरान ट्रैफिक पुलिस तैनात करनी चाहिए -लोकेश सैनी मेला के दौरान सर्वाधिक जा एम फवारा चौक से मस्तराम गंगा घाट के बीच लगता है प्रशासन को इस जाम से छुटकारा दिलाने के लिए एक दूसरे मार्ग का विकल्प तलाश करना चाहिए -डा. सर्वेश कुमार अनूपशहर नगर में प्रत्येक माह पूर्णिमा तथा अमावस्या पर बड़ा गंगा स्नान मेला लगता है। सभी घाटों का रास्ता नगर की मुख्य सड़कों से है। प्रशासन को अलीगढ़ रोड से मस्तराम घाट तक एक अतिरिक्त मार्ग की व्यवस्था करने की महती आवश्यकता है। -पप्पू कोट-- अनूपशहर में ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा खास इंतजाम किए जाते हैं। पर्व पर प्रशासन रूट डायवर्जन भी करता है। हमारा यही प्रयास रहता है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो, इसके लिए अधिकारियों को कहा गया है। -संजय शर्मा, विधायक, अनूपशहर

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