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जिला कारागार में सजायाफ्ता बंदियों की भरमार

जिला कारागार में दिनों दिन सजायाफ्ता बंदियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ साल पहले तक जेल में जहां सजायाफ्ता बंदियों की संख्या 100 से भी कम थी,...

जिला कारागार में सजायाफ्ता बंदियों की भरमार
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हिन्दुस्तान टीम,बुलंदशहरTue, 18 Jun 2024 11:40 PM
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जिला कारागार में दिनों दिन सजायाफ्ता बंदियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ साल पहले तक जेल में जहां सजायाफ्ता बंदियों की संख्या 100 से भी कम थी, वहीं अब यह संख्या 250 से अधिक है। इसके चलते 40 बंदियों वाली बैरक में 120 से अधिक बंदी रखने पड़ रहे हैं। इससे जेल में रहने से लेकर खाने-पीने समेत तमाम व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

वर्ष 2000 में बुलंदशहर-सिकंदराबाद रोड पर जिला कारागार के नए भवन का निर्माण किया गया था। उस वक्त जेल की क्षमता 720 बंदियों की थी। नई जेल के निर्माण का मकसद मानकों के अनुरूप बंदियों को तमाम व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना था। वक्त बीतने के साथ-साथ जेल में बंदियों की भरमार होती चली गई। बंदियों की अधिक संख्या के चलते जेल की क्षमता भी बढ़ाने का प्रयास किया गया। वर्तमान में जिला कारागार में 960 बंदियों को रखने की क्षमता है, किंतु यहां करीब दो गुना यानि 1940 बंदी मौजूद हैं। इनमें सजायाफ्ता कैदियों की संख्या भी अच्छी-खासी है। जानकारों की मानें तो जेल में सजायाफ्ता बंदियों की संख्या 250 से अधिक है। जेल अधिकारियों की मानें तो कारागार में भले ही क्षमता से अधिक बंदी हैं, किंतु तमाम व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त हैं। बंदियों को नियमों के तहत सभी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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सजायाफ्ता बंदियों को नियमानुसार सेंट्रल जेल ट्रांसफर किया जाता है। जिला कारागार में सभी बंदियों को मानकों के अनुसार भोजन एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

- आर के जायसवाल, जेल अधीक्षक

सजा के बाद सेंट्रल जेल भेजे जाने चाहिए बंदी

किसी भी बंदी को 10 साल से अधिक सजा होने के बाद सेंट्रल जेल में शिफ्ट किए जाने का प्रावधान है। जिला कारागार में दस साल से अधिक कैद की सजा पा चुके बंदियों की संख्या सैकड़ों में है। इनमें भी करीब 150 कैदी ऐसे हैं, जिन्हें उम्रकैद की सजा हुई है। नियमानुसार सजा पाने वाले सभी कैदियों को सेंट्रल जेल भेज देना चाहिए। बीते एक साल में जिला कारागार से करीब 200 बंदियों को सेंट्रल जेल भेजा जा चुका है।

जेल की व्यवस्थाओं पर पड़ता है दबाव

सेंट्रल जेल में कैदियों को रखे जाने की क्षमता पूर्ण होने के चलते सजायाफ्ताओं को विचाराधीन जेलों में ही रखने पर मजबूर होना पड़ता है। इसके चलते जिला कारागार की व्यवस्थाओं पर भी दबाव पड़ रहा है। जेल प्रशासन पर बंदियों की संख्या के अनुसार खाने-पीने की अतिरिक्त व्यवस्था करने का दबाव रहता है।

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