जिले में 13 जून तक आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अलर्ट
जनपद में अगले तीन दिन मौसम बेहद खराब और खतरनाक हो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। 11 जून से 13 जून तक भीषण आंधी-तूफान और भारी बारिश की प्रबल आशंका है। प्रशासन ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

जनपद में अगले तीन दिन मौसम बेहद खराब और खतरनाक हो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि 11 जून से 13 जून तक भीषण आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और भारी बारिश की प्रबल आशंका है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जनहित में एडवाइजरी जारी कर आम जनता से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने और घरों में सुरक्षित रहने की अपील की है। खराब मौसम में बचाव के लिए प्रशासन की गाइडलाइन ----
खराब मौसम में सावधानियाँ
- खराब मौसम के दौरान कोई भी व्यक्ति घर से बाहर न निकले। सुरक्षित रहने के लिए पक्के मकान के अंदर रहें और खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद रखें।
खुली जगह पर न जाएँ
- बिजली गिरने का सबसे अधिक खतरा खुले में होता है। इसलिए खेत, छत या खुले मैदान में बिल्कुल न जाएं। खुले में चल रहे कृषि कार्य तुरंत बंद कर दें।
सुरक्षित स्थान का ध्यान रखें
- आंधी के दौरान पेड़, बिजली के खंभे, ऊंचे तार, कच्ची दीवारें और टिन शेड के नीचे खड़े होने से बचें। जर्जर मकानों से भी सुरक्षित दूरी बना लें।
गैर-जरूरी यात्राएँ टालें
- मौसम खराब होने पर गैर-जरूरी यात्राएं टाल दें। यदि रास्ते में हों, तो वाहन को किसी सुरक्षित पक्की जगह पर रोक दें या गति अत्यंत धीमी रखें।
इलेक्ट्रॉनिक सामान से दूर रहें
- बारिश और तूफान के समय घर के अंदर टीवी, कूलर या अन्य किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान को न छुएं। मोबाइल फोन पर बात करने से भी बचें। इसके साथ ही बारिश के दौरान नहाने, कपड़े या बर्तन धोने से परहेज करें।
पशुओं की सुरक्षा
- पशुओं को सुरक्षा के दृष्टिकोण से खुले में चरने के लिए न छोड़ें। खराब मौसम के दौरान पशुओं को सुरक्षित पक्के स्थानों पर ही बांधें।
फसल की सुरक्षा
- पेड़ या टिन शेड के नीचे न बांधें, क्योंकि आंधी में इनके गिरने या बिजली की चपेट में आने का खतरा सबसे अधिक रहता है और किसान अपनी कटी हुई फसल को भी सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें।
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