अलम के जुलूस में इमाम हुसैन की कुर्बानी को किया याद
कस्बा रोगनग्रान में मोहर्रम के अवसर पर अलम का जुलूस श्रद्धा के साथ निकाला गया। जुलूस में अकीदतमंदों की बड़ी संख्या ने हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। मुख्य अतिथि डॉ. इदरीस ने इमाम की कुर्बानी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मानवता की रक्षा की प्रेरणा दी। मातमी अंजुमनों ने नौहाखानी भी की।

कस्बे के मोहल्ला रोगनग्रान में मोहर्रम के अवसर पर बीती रात अलम का जुलूस श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया तथा हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद कर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. इदरीस ने अपने संबोधन में हज़रत इमाम हुसैन की महान कुर्बानी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने अन्याय, अत्याचार और असत्य के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी शहादत पूरी दुनिया को सत्य, न्याय, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देती है।
जुलूस के दौरान मातमी अंजुमनों ने नौहाखानी और मातम कर कर्बला के शहीदों को याद किया। पूरे क्षेत्र में गम और अकीदत का माहौल बना रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कमेटी के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर शब्बीर अंसारी, भुट्टू अंसारी, इश्तियाक अंसारी, आरिफ मलिक आदि सहित दर्जनों अकीदतमंद मौजूद रहे।
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