खुले नाले और गड्ढे दे रहे हादसों को न्योता
Bulandsehar News - नोएडा में हालिया हादसों ने शहर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण कार्यों के नाम पर खोले गए गड्ढे और अधूरे बैरिकेड्स आम जनता के लिए खतरा बन गए हैं। स्थानीय नागरिकों ने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। अधिकारियों के दावों के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नाकाफी हैं।

नोएडा में हालिया हादसे ने शहर की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी लापरवाही के चलते शहर के बीचोबीच निर्माण कार्यों के नाम पर खुले छोड़े गए गड्ढे, बिना ढके नाले और अधूरे बैरिकेड्स आमजन की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। हर रोज़ लोग इन्हीं रास्तों से गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नदारद हैं। नगर की यमुनापुरम कॉलोनी में सीवर लाइन के लिए सड़कें खोदी जा रही हैं, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। शिकारपुर बाईपास पर काली नदी पर पुल निर्माणाधीन है, लेकिन रात के समय वाहन चालकों के लिए पुख्ता संकेतांक आदि नहीं होने से परेशानी होने के साथ-साथ हादसे का खतरा बना हुआ है।
इसके अलावा इस्लामाबाद में खूनी नाले के नाम से मशहूर नाले की ओर नगर पालिका ध्यान नहीं है। बरसात के दिनों में नाला उफनता है और हादसे हो जाते हैं। साथ ही वलीपुरा नहर के निकट गड्ढे में हमेशा पानी भरा रहता है, जिससे हादसे का खतरा रहता है। गांव सुनहेरा में बंबे की पटरी पर कोई बैरिगेटिंग या संकेतांक नहीं होने के कारण हमेशा ही हादसे का खतरा बना रहता है। नियम क्या कहते हैं, ज़मीनी हकीकत क्या है नगर निकाय और विकास प्राधिकरणों के नियमों के मुताबिक सड़क खुदाई या निर्माण कार्य के दौरान स्पष्ट चेतावनी संकेत, रात में रिफ्लेक्टर/लाइट, मजबूत बैरिकेडिंग और समयबद्ध मरम्मत अनिवार्य है। मगर शहर के कई इलाकों में नियम कागजों तक सीमित दिखते हैं। जगह-जगह खुले गड्ढे महीनों से वैसे ही पड़े हैं, न चेतावनी बोर्ड हैं, न सुरक्षा घेरा। अधिकारी क्या कहते हैं संबंधित महकमे दावा करते हैं कि निरीक्षण जारी है और ठेकेदारों को नोटिस दिए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर त्वरित सुधार की बात भी कही जाती है। हालांकि, बार-बार सामने आ रहे हादसे इन दावों की पोल खोलते नज़र आते हैं। सवाल यह है कि नोटिस के बाद भी सुधार क्यों नहीं? और जिम्मेदारी तय कब होगी? स्थानीय लोगों की अनसुनी आवाज़ स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इन खतरों को लेकर कई बार शिकायतें की गईं-हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लिखित आवेदन तक। लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला। लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद कभी-कभार अस्थायी मिट्टी डाल दी जाती है, जो पहली बारिश में बह जाती है और खतरा जस का तस लौट आता है। क्या होना चाहिए -सभी खुले गड्ढों/नालों की तत्काल बैरिकेडिंग -रात में पर्याप्त लाइटिंग और रिफ्लेक्टर -समय-सीमा तय कर मरम्मत, उल्लंघन पर सख़्त कार्रवाई -शिकायतों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और सार्वजनिक जवाबदेही कोट --- जहां भी निर्माण कार्य होता है, वहां ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं कि निर्माण के समय लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। रोड के दोनों ओर बैरिकेटिंग के अलावा संकेतांक अवश्य होने चाहिए। -डॉ. अश्वनी कुमार, ईओ नगर पालिका ---------------

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