
चुनौती मूल्यांकन के बाद छात्रों को नहीं मिलेगा पुनर्मूल्यांकन का मौका
Bulandsehar News - सिकंदराबाद। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि चुनौती मूल्यांकन के बाद परीक्षार्थियों के पुनर्मूल्यांकन या उत्तर पुस्तिकाओं की छायाप्रति की मांग पर विचार नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से परीक्षा प्रणाली में अनुशासन और स्पष्टता बनी रहेगी। सभी महाविद्यालयों को इस जानकारी को छात्रों तक पहुँचाने का निर्देश दिया गया है।
सिकंदराबाद। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने महाविद्यालयों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि चुनौती मूल्यांकन के उपरांत परीक्षार्थियों के किसी भी प्रकार के मूल्यांकन संबंधी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रायः यह देखने में आता है कि चुनौती मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं होते हैं और पुनः मूल्यांकन कराए जाने अथवा चुनौती मूल्यांकन में जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की छायाप्रति की मांग करते हैं। इस संबंध में परीक्षा समिति की 6 जनवरी 2026 को आहूत बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि चुनौती मूल्यांकन की प्रक्रिया स्वयं में अंतिम है। इसमें उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन दो स्वतंत्र परीक्षकों द्वारा किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। परीक्षा नियंत्रक ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि राजभवन द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनौती मूल्यांकन के पश्चात किसी भी प्रकार के अनुरोध पर विचार नहीं किया जा सकता। ऐसे में न तो पुनर्मूल्यांकन की अनुमति दी जाएगी और न ही चुनौती मूल्यांकन में मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की छायाप्रति उपलब्ध कराई जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी महाविद्यालयों से अपेक्षा की है कि वे इस निर्णय की जानकारी विद्यार्थियों तक समय रहते पहुंचाएं, ताकि अनावश्यक भ्रम और आवेदन से बचा जा सके। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस निर्णय से परीक्षा प्रणाली में अनुशासन और स्पष्टता बनी रहेगी। कोट्स- विश्वविद्यालय के उक्त आदेश को नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवा दिया गया है। जिससे यह जानकारी छात्रों तक पहुँच सके। प्रो.वैभव जैन प्राचार्य,जेएस कालेज सिकंदराबाद।

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