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 बोले:::: कर्णवास तीर्थ को बस सेवा और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दरकार

बोले:::: कर्णवास तीर्थ को बस सेवा और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दरकार

संक्षेप:

Bulandsehar News - कर्णवास, जो धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का स्थल है, आज भी परिवहन सुविधा से वंचित है। श्रद्धालुओं को निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बस सेवा और गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी की मांग की है, जिससे पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

Nov 07, 2025 11:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बुलंदशहर
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डिबाई, संवाददाता। तहसील डिबाई के गंगा के किनारे बसा प्राचीन तीर्थ कर्णवास अपनी धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता के बावजूद आज भी सुगम परिवहन सुविधा से वंचित है। अति प्राचीन कल्याणी देवी मंदिर, भूतेश्वर मंदिर और गंगा घाटों पर प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं को निजी साधनों या किराए की गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है। सीधी बस सेवा और मुख्य मार्गों से कनेक्टिविटी न होने से कई पर्यटक यहां आने से कतराते हैं। इससे पहले भी कई बार श्रद्धालु और स्थानीय लोगों ने यातायात व्यवस्था सुदृढ़ कराए जाने की मांग उठाई, मगर किसी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। जनप्रतिनिधियों को भी लिखित में ज्ञापन देने के साथ उनसे मिलकर यह मांगें रखी गई, अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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उपेक्षा का दंश झेल रहे स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु बेहद परेशान हो रहे हैं। नजदीकी नगर, लेकिन सीधी बस सेवा का अभाव कर्णवास के पास डिबाई, अनूपशहर, नरौरा, राजघाट जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। यदि इन स्थानों को कर्णवास से सीधी बस सेवाओं के माध्यम से जोड़ा जाए, तो एक मजबूत धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है। इससे श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकेंगे और क्षेत्र की धार्मिक पहचान को नया आयाम मिलेगा। इसको लेकर कभी किसी मंच पर सार्थक चर्चा तक नहीं हुई है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों की मांग आसानी से पूरी होती दिखाई नहीं पड़ रही। गंगा एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ाव हो स्थानीय लोगों का कहना है कि कर्णवास को गंगा एक्सप्रेस वे से जोड़ने पर यहां की पहुंच क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। दिल्ली, नोएडा, मेरठ, अलीगढ़, प्रयागराज और वाराणसी जैसे बड़े शहरों से श्रद्धालु कुछ ही घंटों में कर्णवास पहुंच पाएंगे। इससे गंगा घाटों, कल्याणी मंदिर और भूतेश्वर मंदिर की ओर पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा। इसको लेकर पूर्व में तत्कालीन विधायक और अनूपशहर के भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने भी शासन में मुददा रखा था मगर अभी तक इसको लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका। जबकि यदि इससे इसे जोड़ दिया जाता तो न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के साधन भी मुहैया होते। पर्यटकों को सस्ता और आसान साधन मिल सकेगा वर्तमान में श्रद्धालुओं को पहले पास के कस्बों तक बस से आना पड़ता है और फिर महंगे ऑटो या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है। गरीब और मध्यम वर्ग के भक्त अक्सर खर्च और असुविधा के कारण यात्रा स्थगित कर देते हैं। नियमित बस सेवा और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी मिलने पर गंगा स्नान, आरती और मंदिर दर्शन के लिए आने वाले यात्रियों को सस्ता और सुगम साधन उपलब्ध हो सकेगा। इसको लेकर जिला प्रशासन और शासन को गंभीरता से इस पर विचार कर इसे पूरा कराया जाना चाहिए। स्थानीय रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा यातायात सुविधा में सुधार होने से घाटों पर नाविकों, फूल-मालाओं के विक्रेताओं, प्रसाद दुकानदारों, ठेले वालों और धर्मशालाओं को अधिक ग्राहक मिलेंगे। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। कर्णवास के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम के अवसर प्राप्त होंगे और पलायन कम होगा। यहां पर धार्मिक सामान का बाजार और मजबूत हो सकेगा। बंदरों का बढ़ता आतंक बन रहा चुनौती तीर्थनगरी में इन दिनों बंदरों का आतंक भी लगातार बढ़ता जा रहा है। श्रद्धालुओं के हाथ से प्रसाद, फूल-माला, नारियल और मोबाइल छीनने की घटनाएँ आम हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाने से हालात बिगड़ रहे हैं। भक्तों में भय का माहौल है, खासकर महिलाएं और बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। स्थानीय निवासियों ने वन विभाग और नगर पालिका से बंदरों को नियंत्रित करने की मांग की है। इसको लेकर जिला एवं तहसील स्तर पर भी लोगों ने शिकायत की है। संपूर्ण समाधान दिवस में भी यह मुददा उठाया गया, मगर केवल लीपापोती कर दी गई। ऐसा योजना नहीं बनी कि मंदिरों को पकड़वाया जा सके। सामाजिक संगठनों की मांग वंदनम् गंगे टीम के संयोजक वेदप्रकाश एडवोकेट का कहना है कि कर्णवास का धार्मिक महत्व देशभर में प्रसिद्ध है। लेकिन बस सेवा और एक्सप्रेस वे कनेक्टिविटी के अभाव में यह तीर्थ अपेक्षित विकास से वंचित है। सरकार को इस मामले में गंभीरता से विचार कर रोडवेज बस अड्डा बनाकर यहां नियमित रूट शुरू करने और गंगा एक्सप्रेस वे से जोड़ने की पहल करनी चाहिए। साथ ही बंदरों के आतंक पर नियंत्रण और घाटों की सफाई व्यवस्था मजबूत की जाए। प्रशासन से उम्मीदें लोगों का कहना है कि जैसे ही कर्णवास को मुख्य बस नेटवर्क और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, वैसे ही यहां के घाट, मंदिर और प्राकृतिक सौंदर्य देखने देश-विदेश से आने वालों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि होगी। यहां की धार्मिकता, पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। बोले श्रद्धालु श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं, लेकिन बस न मिलने से उन्हें परेशानी होती है। अगर बस सेवा शुरू हो जाए तो तीर्थ का माहौल और जीवंत होगा। और भक्तों के हाथ से प्रसाद तक छीन लेते हैं बंदर। सरकार को वन विभाग के साथ मिलकर इनका समाधान करना चाहिए, नहीं तो श्रद्धालुओं की संख्या घटेगी। -सौनू शर्मा, पुजारी भूतेश्वर महादेव मंदिर जब बसें चलेंगी और श्रद्धालु बढ़ेंगे तो घाट पर नावों की मांग भी बढ़ेगी। हमारे जैसे लोगों के लिए यह जीवन का सहारा बन जाएगा। बस सुविधा से यहां रोजाना सैकड़ों लोग पहुंचेंगे। नाव की सवारी और गंगा आरती देखने वालों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। -धर्मेंद्र नाविक, गंगा घाट कर्णवास तीर्थस्थलों का विकास तभी संभव है जब सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दे। बस अड्डा, सार्वजनिक शौचालय और स्वच्छता सबसे जरूरी हैं। इसको लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान देना चाहिए। -जितेंद्र राजपूत, कर्णवास- कर्णवास में सुंदर गंगा घाट हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं है। पब्लिक ट्रासंपोर्ट व गंगा एक्सप्रेस वे कनेक्शन से सब बदल सकता है। -आशीष कुमार, एडवोकेट अगर यहां पर्यटन बढ़ेगा तो हमें अपने ही गांव में रोजगार मिलेगा। फिलहाल युवाओं को बाहर जाना पड़ता है। -सोनू राजपूत, इलैक्ट्रिशियन तीर्थनगरी का सौंदर्य अद्भुत है, लेकिन सुविधाओं के बिना कोई ठहरना नहीं चाहता। बस स्टैंड और पार्किंग ज़रूरी है। बस सेवा शुरू होते ही यहां आने वाले यात्रियों की संख्या तीन गुना हो जाएगी। तीर्थ पर्यटन से ही गांव का विकास संभव है। -मुकेश आर्य, पर्यवेक्षक आर्य समाज कर्णवास हम हर महीने गंगा स्नान करने आते हैं, लेकिन ऑटो और टैक्सी का किराया बहुत ज्यादा है। सीधी बस सुविधा हो तो आना-जाना आसान होगा। श्रद्धालुओं को पूर्णिमा और अमावस्या पर काफी परेशानी होती है। -डॉ. ज्ञानेश राजपूत, श्रद्धालु गंगा एक्सप्रेस वे से जुड़ने पर यहां का गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ेगा। धार्मिक पर्यटन से गांवों की सूरत बदलेगी। कारोबार को पंख लगेंगे। -दर्शन सिंह, नरौरा कर्णवास की ऐतिहासिकता और पौराणिकता अद्भुत है, मगर यातायात की कठिनाई के कारण लोग यहाँ तक नहीं पहुँच पाते। अगर बस सेवा जुड़ जाए तो ये क्षेत्र गंगा यात्रा सर्किट में प्रमुख पड़ाव बन सकता है। -विजय कुमार राय, शिक्षक कर्णवास की पहचान सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं, यह गंगा की पवित्रता और संस्कृति का प्रतीक है। सरकार यदि कनेक्टिविटी पर ध्यान दे तो यहां हर दिन तीर्थ जैसा माहौल होगा। और बंदरों से बहुत दिक्कत है। बच्चे डर जाते हैं। प्रशासन को बंदरों की पकड़ाई और सफाई व्यवस्था करनी चाहिए। -वेदप्रकाश एडवोकेट, समाजसेवी बोले जिम्मेदार.... कर्णवास क्षेत्र का समुचित विकास कराया जा रहा है ताकि पर्यटन को और बढ़ावा मिल सके और लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो सके। अनूपशहर से रामघाट बनने वाला कल्याण सिंह मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है। सड़क कार्य पूर्ण होते ही बसों का संचालन भी बढ़वा दिया जाएगा। -चंद्रपाल सिंह, विधायक, डिबाई -------------------- प्रस्तुति : संदीप वाष्र्णेय, डिबाई