लापरवाही पर शिकारपुर-डिबाई सीओ से स्पष्टीकरण तलब

Apr 07, 2026 11:49 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बुलंदशहर
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Bulandsehar News - मेरठ परिक्षेत्र के डीआईजी कलानिधि नैथानी के ऑपरेशन विवेचना के चलते बुलंदशहर में लंबित मामलों में 8 प्रतिशत की कमी आई है। सर्किल नगर और स्याना का प्रदर्शन शानदार रहा है, जबकि शिकारपुर और डिबाई से स्पष्टीकरण मांगा गया है। डीआईजी ने गुणवत्ता के साथ निस्तारण पर जोर दिया है।

लापरवाही पर शिकारपुर-डिबाई सीओ से स्पष्टीकरण तलब

मेरठ परिक्षेत्र के डीआईजी कलानिधि नैथानी की आपरेशन विवेचना के चलते जिले में लंबित विवेचनाओं का ग्राफ नीचे आया है। डीआईजी की जांच में सामने आया कि एक माह के भीतर जिला बुलंदशहर में लंबित मामलों में 8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ​सर्किल नगर और स्याना का प्रदर्शन शानदार रहा है, जबकि लापरवाही पर शिकारपुर और डिबाई सीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। गौरतलब है कि मेरठ परिक्षेत्र के डीआईजी कलानिधि नैथानी द्वारा लंबित विवेचनाओं के निस्तारण के लिए आपरेशन विवेचना चलाया जा रहा है। इसके चलते हर माह सभी सर्किलों में लंबित विवेचनाओं की समीक्षा की जाती है।

जिला बुलंदशहर की समीक्षा के दौरान डीआईजी ने पाया कि 1 मार्च 2026 की तुलना में 1 अप्रैल 2026 तक विवेचनाओं के निस्तारण में तेजी आई है। इसमें सर्किल नगर ने 12 प्रतिशत और स्याना ने 14 प्रतिशत की सर्वाधिक कमी दर्ज करते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया है। डीआईजी ने इन सर्किलों के कार्य की सराहना करते हुए इसे गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की दिशा में बेहतर कदम बताया। जहां कुछ सर्किलों ने बेहतर काम किया, वहीं शिकारपुर और डिबाई सर्किल के आंकड़ों ने डीआईजी को नाराज कर दिया। 1 जनवरी 2026 के सापेक्ष 1 अप्रैल तक हुई तीन माह की समीक्षा में इन दोनों सर्किलों में लंबित विवेचनाओं की संख्या घटने के बजाय बढ़ गई।सीओ डिबाई और शिकारपुर से स्पष्टीकरण तलबडीआईजी ने विवेचनाओं की संख्या बढ़ने पर नाराजगी जताई है और इसे पर्यवेक्षण में शिथिलता मानते हुए क्षेत्राधिकारी शिकारपुर और क्षेत्राधिकारी डिबाई का स्पष्टीकरण तलब किया है। उनसे पूछा गया है कि आखिर किन कारणों से विवेचनाएं लंबित रहीं और उनमें वृद्धि क्यों हुई?​कोट---ऑपरेशन विवेचना के तहत लंबित मामलों को तेजी से निपटाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सभी क्षेत्राधिकारी अपने-अपने सर्किल में विवेचनाओं का बारीकी से पर्यवेक्षण करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि निस्तारण केवल संख्या बढ़ाने के लिए न हो, बल्कि वह गुणवत्तापरक और साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।- कलानिधि नैथानी, डीआईजी मेरठ रेंज

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