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 नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ शुरू, खरना कल

नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ शुरू, खरना कल

संक्षेप: Bulandsehar News - सूर्योपासना का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुक्रवार से शुरू हो गया है। पहले दिन व्रतियों ने नहाय-खाय कर व्रत का संकल्प लिया। छठ माता की पूजा घरों में की जा रही है। व्रती डूबते और उगते सूर्य को...

Fri, 24 Oct 2025 05:40 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बुलंदशहर
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सूर्योपासना के महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुक्रवार से शुरू हो गया। आज पहले दिन व्रतियों द्वारा नहाय-खाय के साथ शुद्धिकरण करते हुए व्रत का संकल्प लेंगी। घरों में छठ मैय्या का पाठ होगा और लोग व्रत रखेंगे। व्रत को लेकर लोगों में उत्साह दिख रहा है। नगर की वलीपुरा नहर पर व्रतियों द्वारा डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और इसके बाद व्रत खुलेगा। छठ पर्व से पूर्व महिलाओं ने बाजारों में खरीदारी कर व्रत का सामान लिया। जिला प्रशासन द्वारा भी व्रतियों के लिए नहर पर इंतजाम कराए जा रहे हैं। छठ पर्व जिले में प्रत्येक वर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

भगवान सूर्य और छठ माता को समर्पित यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पष्टी तिथि को होता है। छठ पूजा में संतान के स्वास्थ्य सफलता एवं दीर्घायु के लिए 36 घंटे का यह व्रत रखा जाता है। शनिवार को नहाय-खाय के साथ पर्व की शुरूआत हो जाएगी। व्रतियों द्वारा शुद्धिकरण करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाएगा और छठ माता की पूजा अर्चना घरों में होगी। स्नान करके व्रतियों द्वारा अरबा चावल, चने की दाल व कद्दू की सब्जी और लौकी की खीर का सेवन किया जाएगा। छठ व्रतियां नहाय-खाय के दिन केवल लौकी के बने पकवान खाती हैं। शाम के समय भोजन ग्रहण करने के बाद व्रतियों ने व्रत का संकल्प लिया घरों में व्रतियों और श्रद्धालुओं ने छठ मैय्या की पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगी जाएंगी। नहाय-खाए के बाद रविवार को 26 अक्तूबर को खरना होगा। इसमें महिलाएं गुड़ की खीर का प्रसाद बनाती हैं, और इसे ग्रहण करती हैं। बताया गया कि प्रसाद के रूप में इसका वितरण होता है। ------- शुद्धिकरण होने के बाद रखा जाता है व्रत नहाय-खाय के साथ जो व्रत शुरू होता है, उसमें व्रतियों को पूरी तरह से शुद्धिकरण करना होता है। इसके बाद ही व्रत का संकल्प लिया जाता है। रविवार की शाम को श्रद्धालुओं ने व्रत लौकी से बने पकवान खाकर व्रत रखा। खरना के बाद शाम को अन्न एवं जल त्याग दिया जाता और फिर इसके बाद कठिन व्रत शुरू हो जाता है। व्रतियों द्वारा व्रत के दौरा अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। प्रशासन भी वलीपुरा नहर पर सभी तैयारियों को पूरा कर लिया है।