रेन बसेरे : कहीं नहीं मिल रही हीटर की तपिश तो कहीं पेयजल का अभाव

Jan 06, 2026 11:32 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बुलंदशहर
share Share
Follow Us on

Bulandsehar News - बुलंदशहर में कड़ाके की ठंड के बीच रेन बसेरों की स्थिति चिंताजनक है। कई रेन बसेरों में हीटर की कमी और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्रशासन ने सुधार के दावे किए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हालात खराब हैं। जिला मुख्यालय पर स्थिति बेहतर है, लेकिन सभी जगह समान सुविधाओं की आवश्यकता है।

रेन बसेरे : कहीं नहीं मिल रही हीटर की तपिश तो कहीं पेयजल का अभाव

जनपद में कड़ाके की ठंड के बीच रेन बसेरों की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ रही है। कहीं रैन बसेरों में ठंड से बचाव के लिए हीटर पर्याप्त नहीं हैं, तो कहीं पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव बना हुआ है। जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन देहात क्षेत्रों में हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। जिला मुख्यालय पर स्थित रेन बसेरों की स्थिति कमोबेश अन्य निकायों में स्थित रेन बसेरों के मुकाबले ठीक है। जानकारी के अनुसार, जनपद के विभिन्न निकाय क्षेत्रों में 15 अस्थायी रेन बसेरों का संचालन किया जा रहा है।

वहीं जिला मुख्यालय पर 100 बेड की क्षमता वाला स्थाई शेल्टर होम भूतेश्वर मंदिर पर स्थित है। इसके अलावा भूड़ चौराहा, कालाआम, स्याना अड्डा और स्याना अड्डा पर अस्थाई रेन बसेरे नगर पालिका की ओर से संचालित किए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय स्थित रेन बसेरों की स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक बताई जा रही है, जहां ठहरने, रजाई-कंबल, गर्म पानी, हीटर सहित दवाओं की भी सुविधा उपलब्ध है। इसके विपरीत नगर पंचायत क्षेत्रों के रेन बसेरों में अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं। कई स्थानों पर ठंड से बचाव के लिए लगाए गए हीटर या तो खराब हैं या संख्या कम है। कुछ रेन बसेरों में पेयजल की व्यवस्था भी सुचारू नहीं पाई गई, जिससे वहां ठहरे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महिला पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था नगर के भूड़ चौराहे पर स्थित रेन बसेरे में पुरुषों और महिलाओं के ठहरने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। पिछले दिनों डीएम ने रेन बसेरों का औचक निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे। हालांकि, स्थानीय लोगों और समाजसेवी संगठनों का कहना है कि सभी रेन बसेरों में एक समान सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि ठंड के मौसम में बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है और जहां भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें शीघ्र दूर कराया जाएगा। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर ये दावे कितनी जल्दी अमल में आ पाते हैं। कालाआम चौराहे पर स्थिति ठीक बुलंदशहर। नगर पालिका ने कालाआम चौराहे पर स्थित राजेबाबू पार्क में रेन बसेरा संचालित किया है। रेन बसेरे की पड़ताल करने पर पता चला कि यहां तो व्यवस्था पूरी तरह से चाक चौबंद है। बताते चलें नगर के मुख्य चौराहे पर स्थित होने के कारण यहां आए दिन अधिकारियों का गुजरना होता है। पता नहीं कब कौन अधिकारी यहां निरीक्षण कर ले। इसलिए रजाई गददे, हीटर, ठंडे-गर्म पानी के अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाओं का भी प्रबंध किया गया है। 24 घंटे एक कर्मचारी की ड्यूटी रहती है। 100 बैड के शेल्टर होम में भी चाक-चौबंद व्यवस्था बुलंदशहर। नगर के भूतेश्वर मंदिर के निकट 100 बैठ का स्थाई शेल्टर होम बना है। यहां काफी संख्या में यात्री और राहगीर आकर ठहरते हैं। इनके लिए भी व्यवस्था ठीक है। अधिकारियों की नजरें भी यहां रहती हैं। कहने को शेल्टर होम के निकट यहां ठहरने के लिए बैनर भी लगा है, लेकिन शहर के अन्य स्थानों पर रेन बसेरों के प्रचार-प्रसार के लिए अपेक्षित व्यवस्था नहीं है। रेन बसेरों की स्थिति बुलंदशहर। जिला मुख्यालय पर पांच रेन बसेरे संचालित किए जा रहे हैं, जबकि खुर्जा, सिकंदराबाद, अनूपशहर, स्याना, जहांगीराबाद, शिकारपुर, डिबाई, गुलावठी, औरंगाबाद और खानपुर में एक-एक रेन बसेरा संचालित है। जिला मुख्यालय पर संचालित रेन बसेरों में कुल 128 बैड हैं, जबकि खुर्जा में 50, सिकंदराबाद में 20, जहांगीराबाद में 15 और अन्य में 10-10 बैड वाले रेन बसेरे हैं। कोट --- सभी रेन बसेरों में समुचित व्यवस्था की गई है। साथ ही कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। प्रत्येक ठहरने वाले का पूरा विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। कहीं से भी कोई शिकायत मिलती है तो तत्काल उसका समाधान किया जाता है। लोगों से भी अपील है कि यदि कोई ठंड में बाहर सोता मिले तो उसे शेल्टर होम या रेन बसेरे में पहुंचाएं। डॉ. अश्वनी कुमार सिंह, ईओ, नगर पालिका बुलंदशहर सभी नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि रेन बसेरों में सभी व्यवस्थाएं समुचित रहें। समय समय पर अधिकारी रेन बसेरों का निरीक्षण भी करते हैं। जिले में रेन बसेरे सही ढंग से संचालित किए जा रहे हैं। -प्रमोद कुमार पांडेय, एडीएम -------------- आश्रय गृह के सामान्य नियम -सुरक्षा के लिहाज से ज्वलनशील पदार्थ, तीव्र गंध वाली चीज़ें और भारी सामान लाने पर रोक होती है। -स्वच्छता बनाए रखने के लिए साफ-सफाई और अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमों का पालन करना होता है। -शांत और सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए दूसरों का सम्मान करना होता है। -यदि कोई व्यक्ति बिना बताए 48 घंटे से ज़्यादा समय के लिए बाहर रहता है, तो उसे दोबारा आवेदन करना पड़ सकता है। आश्रय गृह के कर्तव्य -घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्ति या उसकी ओर से संरक्षण अधिकारी के अनुरोध पर आश्रय गृह को तुरंत आश्रय देना होता है। -बच्चों के लिए: किशोर न्याय अधिनियम के तहत, बच्चों के लिए सुरक्षित और देखरेख वाला वातावरण प्रदान करना होता है। -बेघर व्यक्तियों को आश्रय पाने का अधिकार है, और इसके लिए आवेदन हमेशा स्वीकार किए जाने चाहिए रहने वालों के लिए सुविधाएँ -आरामदायक, रोशनदान वाले कमरे और बिस्तरों के बीच पर्याप्त जगह -पौष्टिक और संतुलित भोजन -मनोवैज्ञानिक सहारा और भावनात्मक मदद करते हुए देखभाल

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।