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बोले बुलंदशहर: आंगनबाड़ियों को मिले अल्प मानदेय, तभी जगेगी आश

बोले बुलंदशहर: आंगनबाड़ियों को मिले अल्प मानदेय, तभी जगेगी आश

संक्षेप:

Bulandsehar News - आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां जिले में आर्थिक कुपोषण का सामना कर रही हैं। उन्हें केवल 200 रुपये प्रतिदिन का मानदेय मिलता है, जो मनरेगा के श्रमिकों से भी कम है। 3.90 लाख बच्चों की देखरेख करने वाली ये महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। सरकार से उनकी मांग है कि मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये किया जाए।

Feb 03, 2026 06:50 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बुलंदशहर
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जिले की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां इन दिनों खुद आर्थिक कुपोषण के दंश से जूझ रही हैं। जिले में 3.90 लाख बच्चों के भविष्य की नींव रखने वाली यह महिलाएं महज 200 रुपये प्रतिदिन की पर काम करने को मजबूर हैं। यह रकम मनरेगा के एक अकुशल मजदूर को मिलने वाली दिहाड़ी से भी कम है। 16 ब्लॉकों की 3400 कार्यकत्रियां बढ़ती महंगाई और सरकार की बेरुखी के बीच अपना घर चलाने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। जिले के 3967 आंगनबाड़ी केंद्रों पर तैनात ये कार्यकत्रियां सुबह आठ बजे से मोर्चे पर डट जाती हैं।

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बच्चों को ककहरा सिखाने से लेकर गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण गोद भराई, पोषाहार वितरण और बच्चों के वजन की जांच तक का जिम्मा इन्हीं के कंधों पर है। इसके अलावा, प्रशासन इन्हें चुनाव में ड्यूटी और विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों में भी झोंक देता है। विडंबना यह है कि इन तमाम महत्वपूर्ण कार्यों के बदले उन्हें महीने के अंत में महज छह हजार रुपये थमा दिए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम योजनाओं में शासन ने उन्हें जोड़ रखा है मगर सुविधाओं के नाम पर उनके पास कुछ नहीं नही हैं। हालात यह हैं कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को इन सभी कार्यों के एवज में इतना मानदेय भी नहीं मिल पाता है जिससे वह जरूरतों को पूरा कर सकें। आंगनबाड़ियों की मांग है कि सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान देकर तत्काल समाधान कराए। जिले के 16 ब्लॉक एवं सात तहसीलों में मौजूदा समय में 3967 आंगनबाड़ी केंद्र हैं और इनमें 3.90 लाख से अधिक बच्चे नौनिहाल पढ़ रहे हैं। बेसिक स्कूलों में ही आंगनबाड़ियों के कक्ष हैं और इनमें वह बच्चों को पढ़ाती हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3400 कार्यकत्रियां तैनात हैं। नगर से लेकर देहात क्षेत्रों तक में खुले यह आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह कार्यकत्रियां लगातार दिन रात काम करते हुए गर्भवती महिलाओं व छोटे बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ देती हैं। इसके अलावा गर्भवती की जांच, छोटे बच्चों का वजन, बच्चों की प्री-स्कूल में हाजिरी व एक्टिविटी की जांच करने का अतिरिक्त कार्यभार भी इन्हीं के पास है। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष सावित्री गौतम ने बताया कि आंगनबाड़ियों का कार्य दि-प्रतिदिन कष्ट दायक होता जा रहा है। विगत दस वर्षों से वह मांगों को लेकर सरकार से लड़ाई लड़ रही हैं मगर अभी तक मांगों को पूरा नहीं किया गया है। मानदेय पिछले तीन साल से कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। आंगनबाड़ियों का मानदेय कम से कम 20 हजार रुपये होना चाहिए जिससे वह अपने परिवार का ठीक प्रकार से पालन पोषण कर सकें। इसके अलावा साल से निर्धारित मोबाइल रिचार्ज व स्टेशनरी भत्ता तक नहीं मिला है। शहर क्षेत्र में सेंटर खोलने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को केवल एक हजार रुपये मासिक किराया भत्ता मिलता है, उसमें भी बीते आठ साल से कोई वृद्धि नहीं हुई है। ----- राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाने के लिए चल रहा संघर्ष आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां स्वयं को राज्य कर्मचारियों का दर्जा दिलाने के लिए बड़े स्तर पर संघर्ष कर रही हैं। प्रत्येक माह मिलने वाले छह हजार रुपये के मानदेय को लेकर वह चिंतित हैं। 200 रुपये प्रतिदिन का मानदेय उन्हें दिया जा रहा है। जबिक मनरेगा में श्रमिकों को प्रतिदिन 261 रुपये मिलते हैं। इसमें केंद्र सरकार की न्यूनतम मजदूरी के नियम के तहत अकुशल श्रमिक को 678 रुपये प्रतिदिन और कुशल श्रमिक को 826 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी मिलनी निर्धारित है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां महज 25 से 30 प्रतिशत मानदेय पर ही लगातार काम करते हुए न्यूनतम मजदूरी के नियमों से भी बाहर हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार से राज्य कर्मचारियों को शासन से सुविधाएं मिलती हैं उसी तरह से आंगनबाड़ियों को दी जाएं मगर उनका मानदेय 20 हजार रुपये से अधिक किया जाए। यदि उन्हे सुविधाएं भी मिलेंगी तो परिवार को काफी हद तक सहारा मिलेगा। जिले में आंगनबाड़ियों ने मानदेय व अन्य मांगों को लेकर सीएम से लेकर अन्य जन प्रतिनिधियों तक को ज्ञापन दिए हैं और समय-समय पर धरना प्रदर्शन होता रहता है मगर इसके बावजूद की कोई उनकी सुनने वाला नहीं है। चुनावों में आंगनबाड़ियों के मानदेय व उनकी मांगों को पूरा करने के लिए बड़े-बड़े वादे होते हैं मगर बाद में जन प्रतिनिध उनकी सुनने के लिए तैयार नहीं होते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने 27 जनवरी को सौंपा था ज्ञापन- जिले की आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 27 जनवरी को को प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेट में सौंपा। आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री चौधरी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां एवं सहायिकाएं विगत कई दशकों से महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारशिला के रूप में पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, टीकाकरण एवं मातृ-शिशु देखभाल जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि पूर्व में भी कई बार सरकार को ज्ञापन सौंपे गए और आंदोलनों की चेतावनी दी गई, किंतु अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। 9 जनवरी 2026 से प्रस्तावित आंदोलन की सूचना प्रशासन को दी जा चुकी थी, बावजूद इसके शासन स्तर पर सकारात्मक पहल नहीं हुई। संयुक्त मोर्चा ने प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी घोषित कर वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, महंगाई भत्ता व चिकित्सा अवकाश देने, सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने, कोरोना काल से सेवानिवृत्त कर्मियों को पेंशन व ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा अन्य लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की गई। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि 7 मार्च 2026 तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 8 मार्च 2026 को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां विवश होकर लखनऊ कूच करेंगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ----- एक साल से नहीं मिले मोबाईल के पैसे, कैसे बने डिजिटल आंगनबाड़ियों के कार्यों को आसान करने के लिए शासन ने विगत वर्ष उन्हें स्मार्ट फोन दिए थे शुरूआत में रिचार्ज के लिए पैसा आया था मगर इसके बाद से मोबाईल में रिचार्ज के पैसे भी नहीं आए हैं। सावित्री गौतम ने बताया कि ऑनलाइन काम के चलते उन्हें प्रतिमाह मोबाइल रिचार्ज कराने के लिए दो सौ रुपये मिलते थे, जो पिछले एक साल से उनके खाते में नहीं आए हैं। एक तरफ तो सरकार डिजिटल को बढ़वा दे रही है, मगर दूसरी तरफ स्मार्ट फोन में रिचार्ज न होने से योजनाएं अधर में रह जाती हैं। एप पर पूरा डाटा फीड करना होता है मगर इंटरनेट के पैसे न मिलने के कारण उन्हें स्वयं अपने से रिचार्ज कराना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष स्टेशनरी भत्ते के रूप में मिलने वाले एक हजार रुपये बीते दो साल से नहीं मिल पाए हैं। पीएलआई के अतिरिक्त काम के लिए कार्यकत्रियों को एक हजार रूपये मासिक अतिरिक्त भत्ते की घोषणा की गई थी, लेकिन काम लगातार जारी रहने के बावजूद पिछले तीन साल से यह भत्ता नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि महंगाई दिन रात बढ़ रही है। इतने कम मानदेय में घर का खर्च का चलाना मुश्किल हो रहा है, एक तरफ परिवार का पालन पोषण भी करना है तो दूसरी तरफ नौकरी भी करनी है। सरकार द्वारा मांगों को पूरा न किए जाने से आंगनबाड़ी कार्यकत्री काफी मुश्किल में हैं। वादे हजार, सत्ता के बाद भूल गए मांग व मानदेय आंगनबाड़ियां शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में तक में सभी विभागों के कार्यों में हाथ बंटाती है। चुनाव के दौरान इनके लिए खूब वादे किएज जाते हैं मगर सत्ता आने के बाद जन प्रतिनिधि वादों को भूल जाते हैं। आंगनबाड़ियों का कहना है कि राजनैतिक पार्टियां अपनी सत्ता पाने के लिए जो संकल्प पत्र लाती हैं उसमें उनके मानदेय को बढ़ाने के लिए वादा करती हैं, पिछली सरकारों ने आंगनबाड़ियों का मानदेय बढ़ाने के लिए वादा किया था मगर केंद्र व राज्य में मौजूदा सरकारों ने उनका मानदेय नहीं बढ़ाया है और ना उन्हें राज्य कर्मियों का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को आंगनबाड़ियों के साथ वादा-खिलाफी नहीं करनी चाहिए। ----- शिकायतें- 1.आंगनबाड़ियों को ब्लॉक पर अधिकारी परेशान करते हैं, इसके बारे में अधिकारियों अवगत कराया जाता है मगर कार्रवाई नहीं होती है। 2.आंगनबाड़ी सेंटर पर टॉयलेट और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें परेशानी होती है। 3.आंगनबाड़ी वर्करों के भी दूसरे कर्मचारियों की तरह काम करने के घंटे लगते हैं। 4.पंजीकृत लाभार्थियों से कम पोषाहार वितरित करने के लिए दिया जाता है। 5.आंगनबाड़ियों की शिकायतों की पर निष्प्क्ष जांच नही होती है।, अधिकारी कार्रवाई को नियमानुसार नही करते। सुझाव- 1. आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिका को रिटायरमेंट के बाद पेंशन की सुविधा नहीं, पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए। 2. स्मार्ट फोन में सरकार एक साल का रिचार्ज कराए और जो भुगतान अटका हुआ है उसे पूरा किया जाए। 3. आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। 4. प्रोत्साहन राशि भुगतान को लेकर अधिकारियों की मनमानी खत्म की जाए। 5. आंगनबाड़ी केंद्रों पर टॉयलेट और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाएं दी जाएं। हमारी भी सुनो- आंगनबाड़ियों की मांगों को सरकार जल्द ही पूरा कर दे। लगातार ज्ञापन सौंपे गए हैं। आंगनबाड़ियों के साथ धोखा होता है। मानदेय कम होने से वह आर्थिक तंगियों से गुजर रही हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -सावित्री चौधरी, आंगनबाड़ी --- आंगनबाड़ी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं को पूरा नहीं किया गया है। इसके लिए वह उच्चाधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंप चुकी हैं। जिला प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। इन समस्याओं से उन्हें निजात दिलाई जाए। -सावित्री गौतम, आंगनबाड़ी ---- आंगनबाड़ियों का मानदेय सरकर को 20 हजार कर देना चाहिए और इसके अलावा उन्हें राज्य कर्मियों का दर्जा दिया जाए। 14 सूत्रीय आंगनबाड़ियों की मांगे हैं इनके लिए वह संघर्ष कर रही हैं। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। -रेखा सिंह --- आंगनबाड़ियों को पूर्ण कालीन सरकारी कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए। फंड, पेंशन, मंगाई भत्ता सहित अन्य उनकी मांग हैं। आंगनबाड़ियों को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन दी जाए। पेंशन नहीं मिलने से उनका भविष्य अधर में है। -अंजु शर्मा, आंगनबाड़ी --- आंगनबाड़ियों को मोबाईल रिचार्ज कराने के लिए प्रति वर्ष पांच हजार रुपये दिए जाएं। पोषण ट्रेकर एप पर कार्य करने के लिए प्रत्येक माह दो हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएं। यह मांग आंगनबाड़ियों की मुख्य है। -बबीता शर्मा, आंगनबाड़ी -- आंगनबाड़ी वर्कर और हैल्पर को कम से कम जीवित रहने के लिए मानदेय और पेंशन के हेतू बजट में वितीय आवंटन बढ़ाया जाए। सेवानिवृत्त होने पर आंगनबाड़ियों को 30 हजार रुपये की पेंशन दी जाए। -विजय राजे सिघिंया, आंगनबाड़ी -- आंगनबाड़ियों को स्वास्थय बीमा और दुर्घटना में अनहोनी पर उनके परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में 25 लाख रुपये की राशि दी जाए। और उन्हें पेंशन से जोड़ते हुए पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। -अल्का सिरोही, आंगनबाड़ी --- आंगनबाड़ियों के लिए प्रत्येक वर्ष भर्ती खोली जाएं और नियमानुसार ईमानदारी के साथ इस प्रकि्रया को पूरा किया जाए। मौजूदा समय में आंगनबाड़ियों के रिक्त पदों पर जो भर्ती उसमें पदों की संख्या को बढ़ाया जाना चाहिए था। -सबिता शर्मा, आंगनबाड़ी -- सरकार की नीतियां आंगनबाड़ियों के हितों में नहीं है। पिछली सरकारों ने जो वादे किए थे उनमें आंगनबाड़ियों के मानदेय बढ़ाने सहित अन्य वादे थे, मौजूदा सरकार इन वादों को पूरा करे। -संगीता चौधरी, आंगनबाड़ी ---- आंगनबाड़ियों को केवल केंद्रों के कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाए। मौजूदा समय में आंगनबाड़ियों से सभी योजनाओं में कार्य लिया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है। यदि अतिरिक्त कार्य लिया जाता है तो उसका भुगतान होना चाहिए। -ममता सक्सेना, आंगनबाड़ी आंगनबाड़ियों की समस्याओं पर किसी अधिकारी का कोई ध्यान नही है। कई बार जिला-प्रशासन व शासनस्तर पर भी अपनी समस्याओं को रख चुके हैं। लेकिन आज तक कोई सुनवाई नही हुई है। -कुसुम लता, आंगनबाड़ी हमारी समस्याओं पर संबंधित अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। काफी लंबे समय अपनी समस्याओं को अधिकारियों के सामने रख रहे हैं लेकिन समाधान नही हो पा रहा है। -चंचल गुप्ता, आंगनबाड़ी कोट--- जिले में आंगनबाड़ियों की समस्याओं को समय-समय पर दूर किया जाता रहता है। शासन स्तर से जो नियम बनाए गए हैं हम भी उन्हीं के अनुसार कार्यकत्रियों से कार्य ले रहे हैं। मानदेय बढ़ाने व अन्य मांगे शासन स्तर से पूरी होंगी। जिला स्तर पर आंगनबाड़ियों की समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर किया जाता है। -पूनम राव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बुलंदशहर