होली पर स्वामी दीनदयाल बाबा की समाधि पर माथा टेक होती है मनोकामना पूर्ण

Mar 02, 2026 07:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बुलंदशहर
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Bulandsehar News - 16वीं शताब्दी का स्वामी दीनदयाल बाबा का मंदिर पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखने वाली नव विवाहिताओं का प्रमुख स्थल है। यहाँ प्रसाद चढ़ाने और काले धागे के माध्यम से भूत-प्रेत से बचाव किया जाता है। आर्य समाज द्वारा निशुल्क खसरे की दवा भी दी जाती है, जिससे नगर में खसरे का प्रकोप कम हुआ है।

होली पर स्वामी दीनदयाल बाबा की समाधि पर माथा टेक होती है मनोकामना पूर्ण

16 वीं शताब्दी से पुत्र प्राप्ति की मनोकामना को लेकर नव विवाहिताएं स्वामी दीनदयाल बाबा की समाधि पर माथा टेकने के लिए दुलहेड़ी के दिन मंदिर में प्रसाद चढ़ाने आती हैं। मंदिर में निशुल्क मिलने वाले काले धागे व खसरे की दवा पिलाने का प्रचलन भी आधुनिकता के दौर में कम नहीं हो रहा है। नगर के मोहल्ला मदार गेट स्थित स्वामी दीनदयाल बाबा का मंदिर 16वीं शताब्दी के में निर्माण किया गया था। मानता है, कि जो भी व्यक्ति पुत्र की कामना लेकर बाबा के दरबार में प्रसाद चढ़ाने आता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। इसके साथ ही अनेक प्रकार की भूत-प्रेत वधओं से बचने, बच्चों के डरने आदि समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिए मंदिर में काला धागा भी दिया जाता है।

इस गले में पहनने से समस्याओं से छुटकारा मिलता है। पिछले कुछ वर्षों से आर्य समाज के बैनर तले निशुल्क खसरे की दवा भी पिलाई जाती है जिसके परिणाम स्वरूप नगर में खरे का प्रकोप कम हो गया है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार स्वामी दीनदयाल बाबा का जन्म मथुरा के वैश्य परिवार में हुआ था बचपन से ही अलौकिक शक्तियों के स्वामी रहने के कारण लोगों को परेशानियों से बचने बचाते है, बचपन में ही स्वामी जी अनूपशहर गंगा तट पर आकर रहने लगे उनकी दयालुता में चमत्कार के अनेक किस्से लोगों द्वारा सुनाये जाते हैं। स्वामी जी को बावरे बाबा, मथुरामल के नाम से भी जाना जाता है। मथुरा, चंदौसी, अलीगढ़, चचराई, सीताराम गली चांदनी चौक दिल्ली आदि स्थानों पर उनके मंदिर बने हुए हैं। होली के दिन सांय काल मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है, जिसमे घायल झांकी सभी के लिए आकर्षक का केंद्र रहता है। मेला मे नगर व ग्रामीण क्षेत्र के हजारों भक्त बाबा की समाधि पर मत्था टेक कर मनौतिया मांगते हैं। नगर की नव विवाहिता को लेकर सांस, ननद, जेठानी आदि मंदिर में मत्था टेक पुत्र प्राप्ति की कामना की जाती हैं। आमतोर पर मंदिर को पूजा अर्चना के लिए रविवार को ही खोला जाता है। मंदिर में मिलने वाले धागे की मांग काफी रहती है।

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