
पिंकी ने रचाई भगवान से शादी; लड्डू गोपाल बारात में आए, गांव-परिवार के सामने वरमाला, फेरे और विदाई
लड्डू-गोपाल को घर में रखने के बढ़ते चलन के बीच बदायूं की एक युवती ने पूरे विधि-विधान से गांव-परिवार के सामने भगवान श्रीकृष्ण से शादी रचा ली है। इस दौरान वरमाला से फेरे तक की रस्में निभाई गईं।
भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल को घर में रखने के बढ़ते चलने के बीच बदांयू जिले में पिंकी शर्मा नाम की युवती ने गांव-परिवार के सामने कान्हा जी से शादी रचा ली। पूरे विधि-विधान से कन्हैया जी की बारात आई और लड़की वक्ष ने बारातियों का स्वागत किया। हिन्दू रीति-रिवाज से वरमाला, फेरे और विदाई की रस्में भी निभाई गईं। युवती के पिता सुरेश चंद्र शर्मा भी श्रीकृष्ण भगवान से बेटी की शादी से खुश हैं और कह रहे हैं कि पिंकी का जीवन अब कन्हैया को समर्पित है और भगवान चाहेंगे तो उनकी बेटी को वृंदावन वास मिलेगा।

पीजी तक की पढ़ाई कर चुकीं पिंकी शर्मा शादी के बाद मीडिया वालों से खुलकर बात कर रही हैं और कह रही हैं कि अब वो जो भी हैं, उनका जो भी है, सब भगवान श्रीकृष्ण का है। पिंकी ने कहा कि वृंदावन मंदिर में हुई एक घटना के बाद उनके अंदर से भावना जागृत हुई कि उन्हें बिहारी जी ने अपना लिया है, इसलिए वो अब उनके साथ ही रहना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि जीवन भर अब वो बिहारी जी के साथ ही रहेंगी। शादी से पहले महीने में दो-दो बार मथुरा-वृंदावन के चक्कर लगा लेने वाली पिंकी आगे अपने गांव या वृंदावन में रहने के सवाल पर कहती हैं कि जहां बिहारी जी ले जाएंगे, वहा रह लूंगी।
बदायूं जिले के इस्लामनगर ब्लॉक के ब्यौर कासिमाबाद गांव के रहने वाले सुरेश चंद्र शर्मा ने बेटी पिंकी को बेटों की तरह प्रॉपर्टी एवं जमीन में हिस्सा देने का फैसला किया है। गांव वालों ने बताया कि पिंकी बचपन से ही धार्मिक थी और पिता के साथ वृंदावन जाती-आती रहती थी। वह हमेशा कुछ समय के बाद वृंदावन जाने की जिद करती थी। कुछ समय पहले बांके बिहारी मंदिर में पिंकी शर्मा के एक साथ अद्भुत बात हुई। पुजारी ने उनके आंचल में प्रसाद डाला तो उसमें एक अंगूठी भी आ गई। घर लौटने के बाद पिंकी ने प्रसाद के साथ मिली सोने की अंगूठी को कन्हैया जी की निशानी समझा और परिवार से शादी के लिए कोई लड़का न देखने की बात कह दी।
इसके कुछ वक्त बाद पिंकी एक बार काफी बीमार हो गईं। बीमारी की हालत में ही उन्होंने कान्हा जी के भारी भरकम विग्रह को गोद में लेकर वृंदावन परिक्रमा का निर्णय किया। सभी लोग पिंकी के इस निर्णय से भौंचक थे। लेकिन, पिंकी ने वृंदावन सहित गोवर्धन की पूरी परिक्रमा लगाई और उसका स्वास्थ्य भी पूरी तरह ठीक हो गया। तभी से पिंकी के अंदर यह प्रेरणा बलवती हो गई कि अब बिहारी जी के साथ ही रहना है।









