बसपा में उत्तराधिकारी की छटपटाहट, लेकिन ‘माया’ को अपनी ‘छाया’ पर ही ज्यादा भरोसा

लाइव हिन्दुस्तान, आलोक मिश्र, लखनऊ
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यूपी में सीटों के लिहाज से शून्य पर चल रही बहुजन समाज पार्टी में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। मायावती के फैसले से समर्थकों में भी असमंजस की स्थिति है।

BSP chief Mayawati Akash Anand Ashok Siddharth
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती, आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ (फाइल फोटो)

बसपा सुप्रीमो मायावती परिवार में मची उथलपुथल को शांत करने के लिए एक के बाद एक जो दांव चल रही हैं, उनमें पार्टी में दबदबा बनाए रखने की ललक साफ झलकती है। बसपा संस्थापक कांशीराम के बाद पार्टी की सिरमौर बनीं मायावती 23 बरस की लंबी यात्रा के बाद अब उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां राजनीतिक उत्तराधिकारी का सवाल और छटपटाहट दोनों उनके सामने मुंह बाये खड़े हैं। बड़े भतीजे आकाश आनंद को तीन बार हटाना फिर पार्टी से बाहर करने के बाद छोटे भतीजे ईशान को आगे करना बसपा सुप्रीमो की छटपटाहट का ही प्रमाण है। विरासत को सुरक्षित और भरोसेमंद हाथों में सौंपने की मायावती की तलाश फिलहाल जारी है।

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के भीतर चल रही पारिवारिक सोशल इंजीनियरिंग के भी कई मायने हैं। मायावती ने जिस तरह आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीतिक सन्यास के लिए मजबूर किया और फिर बिना वक्त गंवाए आकाश को चौथी बार पूरी तरह ‘पैदल’ कर दिया, उसके पीछे गहरी बिसात को भी नकारा नहीं जा सकता। एक भतीजे को ससुर समेत बाहर कर दूसरे को पार्टी की अगली कतार में लाकर खड़ा करने के फैसले का भविष्य भी आने वाले चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

मिशन-2027 में ईशान की भूमिका भले ही अभी शुरू हुई है पर आकाश की पारी अभी खत्म भी नहीं मानी जा सकती है। जिस तरह उन्हें मायावती तीन बड़े मौके दे चुकीं हैं, उससे चौथे की संभावना नाकारी नहीं जा सकती। राजनीतिक गलियारों में तो यह भी चर्चा है कि मायावती एक तीर से दो शिकार कर रही हैं। पार्टी-संगठन में अपने फैसलों को लेकर ऐसा माहौल बना रही हैं, जिससे उन पर कहीं कोई आंच न आए और पदाधिकारियों में आकाश-ईशान को लेकर माहौल भी बना रहे।

नसीमुद्दीन और लालजी वर्मा सरीखे रहे भरोसेमंद

मायावती ने अपने राजनीतिक सफर में जिस तरह अब तक उनके भरोसेमंद माने जाने वाले कई कद्दावरों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है, उससे यह भी साफ है कि दूसरी पंक्ति के लिए दरवाजे बंद रहे हैं। बसपा के कद्दावर नेता गया चरण दिनकर, आरके चौधरी, स्वर्गीय डा.सोने लाल पटेल, लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा, इंद्रजीत सरोज, स्वामी प्रसाद मौर्य समेत ऐसे और कई नाम हैं, जो कभी मायावती के बेहद नजदीकी रहे और वक्त के साथ एक-एक कर सबकी छुट्टी भी होती गई।

अब बड़ा सवाल यह भी है कि ईशान उम्मीदों पर कितना खरे उतरेंगे। पार्टी की परंपरा के अनुरूप पदाधिकारी तो उन्हें स्वीकार लेंगे पर वह मिशन जेन-जी का चेहरा बन पाएंगे या नहीं क्योंकि दलित-पिछड़ों में युवा चेहरों को लेकर दूसरे दल भी चुनावी दंगल शुरू होते ही अपने-अपने दांव चलेंगे।

Yogesh Yadav

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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