
जीजा के 8 टुकड़े करने वाले साले को उम्रकैद, कोर्ट ने 1.15 लाख का जुर्माना भी लगाया
उत्तर प्रदेश के उरई जिले में जीजा के 8 टुकड़े करने वाले साले को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला जज/स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट कोर्ट सुरेश चंद्र गुप्ता ने दोषी पर 1.15 लाख का जुर्माना भी लगाया है।
उत्तर प्रदेश के उरई में फुफेरे जीजा का अपहरण कर आठ टुकड़ों में काट बोरी में भरकर फेंकने वाले ममेरे साले शोभराज उर्फ नीलू को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला जज/स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट कोर्ट सुरेश चंद्र गुप्ता ने दोषी पर 1.15 लाख का जुर्माना भी लगाया है। उसके तीन नाबालिग साथियों की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है। नीलू ने जीजा के पिता से 15 लाख रुपये फिरौती वसूलने के लिए 16 साल पहले वारदात को अंजाम दिया था।

एडीजीसी ब्रजराज सिंह राजपूत ने बताया कि उरई कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बघोरा निवासी चतुर्भुज प्रशांत महोबा से अधिशासी अभियंता पद से रिटायर हुए थे। उनके बेटे कमलेश का 26 मई 2009 को अपहरण हो गया था। ग्राम बिनोरावेद थाना चुर्खी निवासी ममेरे साले शोभराज ने कमलेश को गाड़ी खराब होने के बहाने फोन कर बुलाया था।
इसके बाद चतुर्भुज को फोन कर फिरौती मांगी थी। शोभराज को पता था कि चतुर्भुज को रिटायरमेंट में मोटी रकम मिली है। उसने कानपुर-झांसी रेलमार्ग के किनारे अपने एक दोस्त के घर के नीचे बने तलघर में कमलेश की हत्या कर दी थी। दो दिन बाद पुलिस ने खेतों से टुकड़े बरामद किए थे।
ट्रायल के दौरान हुआ फरार
कमलेश हत्याकांड में कुल चार आरोपी थे, जिनमें तीन नाबालिग थे और उनके मामले किशोर न्याय बोर्ड में चले जबकि मुख्य अभियुक्त शोभराज ट्रायल के दौरान ही 2014 से फरार था, जिसे पुलिस ने 14 मई 2025 को गिरफ्तार किया।
बेटे ने केस की पैरवी की
कमलेश के पुत्र वीपी राहुल जो घटना के समय 10 साल के थे। उन्होंने अप्रैल 2025 से केस की पैरवी शुरू की। अदालत के फैसले पर उन्होंने कहा मुझे उस समय कुछ याद नहीं, पर अब न्याय मिला है। पिता की आत्मा को शांति मिलेगी मृतक की पत्नी मंजू देवी ने भी कहा कि इतने वर्षों बाद मिला न्याय ईश्वर की कृपा है।
फिरौती को किए फोन से पहचानी थी आवाज
कमलेश अपहरण को लेकर परिवार के परेशान था पर जब शोभराज ने फिरौती की 15 लाख रकम के लिए फोन किया तब शोभराज की आवाज को पहचान लिया था। तब पुलिस ने जांच की तब पुलिस कानपुर झांसी रेलमार्ग के पास उस मकान तक पहुंच गई जहां किराए के घर में शोभराज रह रहा था और वहां जीजा को तलघर में बंद कर रखा था।
अभियोजन पक्ष ने की थी फांसी की मांग
पैरवी शासकीय अधिवक्ता लखनलाल निरंजन और सहायक अधिवक्ता बृजराज सिंह ने की। अभियोजन पक्ष ने इसे रेयर ऑफ रेयर केस बताते हुए फांसी की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अधिवक्ता बृजराज सिंह ने कहा फैसला देने वाली जज ने भी इस घटना को शर्मसार कर देने वाली घटना अपने फैसले के दौरान बताया है।



