मुख्तार अंसारी पर हमले के केस में बृजेश सिंह बरी, 22 साल पहले उस दिन क्या हुआ था लखनऊ में?

Ajay Singh संवाददाता, लखनऊ
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2004 में लखनऊ में मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के बीच फायरिंग मामले में शनिवार को कोर्ट ने बृजेश सिंह समेत पांच लोगों को बरी कर दिया। इस मामले में मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय, बृजेश सिंह और अन्य पर हत्या के प्रयास, बलवा आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। 

मुख्तार अंसारी पर हमले के केस में बृजेश सिंह बरी, 22 साल पहले उस दिन क्या हुआ था लखनऊ में?

मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय, दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन वर्ष 2004 के गैंगवार में तत्कालीन विधायक मुख़्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने के मामले में एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश हरबंस नारायण ने शनिवार काे अपना फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह, आनंद राय, सुनील राय और अजय सिंह उर्फ गुड्डू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट का फैसला आने के बाद बृजेश सिंह ने कहा कि काफी सालों बाद ही सही न्याय मिला है।

यह घटना 13 जनवरी 2004 को लखनऊ के कैंट थाना क्षेत्र के सदर रेलवे क्रॉसिंग पर हुई थी। दो गुटों में हुई फायरिंग के बाद मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय दोनों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह पर मुख्तार अंसारी और उनके परिवार पर हमले का आरोप था। शनिवार को फैसला सुनाए जाने के पहले बृजेश सिंह, आनंद राय और सुनील राय कोर्ट में हाजिर हुए जबकि अन्य मामले में मिर्जापुर जेल में बंद त्रिभुवन सिंह और वाराणसी जेल में बंद अजय सिंह को पुलिस सुरक्षा के बीच जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान वहां काफी गहमागहमी रही।

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मुख्तार अंसारी ने दर्ज कराया था ये केस

मऊ के तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी ने कैंट थाने में 13 जनवरी 2004 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने परिवार के साथ अपनी गाड़ी से जा रहे थे। जैसे ही कैंटोमेंट चौराहे पर पहुचे तभी वहां पहले से चौराहे के इर्द गिर्द टाटा सफारी, बोलेरो, टाटा सूमो सहित कई गाड़िया खड़ी थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे ही उनकी गाड़ियों को आता देखा तो विधायक कृष्णानंद राय के हाथ एमवी रायफल, त्रिभुवन सिंह के पास एके 47, बृजेश सिंह एसएलआर और अजय सिंह पिस्टल लेकर अपनी गाड़ियों से उतरे और उसकी हत्या की नीयत से गोलियां चलाने लगे। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ललकारने पर उनके गिरोह के लगभग बीस सदस्य अपनी गाड़ियों से उतरे और अपने हाथों में बंदूक लिए, रायफल पिस्टल समेत अन्य हथियारों से फायरिंग करने लगे। किसी तरह गाड़ी से निकलकर और छिपकर जान बचाई।

अदालत ने अपना फैसला शनिवार देर शाम लगभग 6:30 बजे सुनाया। अदालत ने लचर पैरवी पर सवाल उठाया। कहा कि अभियोजन आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में असफल रहा है। लिहाजा आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है।

2005 में हो गई थी कृष्णानंद राय की हत्या

इस घटना के एक साल बाद 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई थी। कृष्णानंद राय के काफिले पर तब पांच सौ राउंड गोलियां बरसाई गई थीं। उस हत्याकांड से पूरा पूर्वांचल थर्रा गया था। उस वारदात में कृष्णानंद राय समेत छह लोगों की मौत हुई थी। उस मामले में दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने मुख्तार अंसारी समेत अन्य को बरी कर दिया था। मामले के एक आरोपी मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई थी। मुख्तार अंसारी की भी मौत हो चुकी है।

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लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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