बोले काशी : जीतने की उम्मीद संग हमें चाहिए जीने की गारंटी

बोले काशी : जीतने की उम्मीद संग हमें चाहिए जीने की गारंटी

संक्षेप:

रिंग में विरोधी को जमीन सुंघाने को तैयार काशी के मुक्केबाज उपेक्षा के पंच झेल रहे हैं। इनका पसीना तो लाखों का है, मगर ये कौड़ियों के मोहताज हैं। प्रशिक्षण फीस, किट सुरक्षा कवच देने से पहले ही उनसे भारी कीमत वसूलती है। 

Oct 12, 2025 05:50 pm ISTSandeep Kumar Shukla लाइव हिन्दुस्तान
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वाराणसी। रिंग में मुक्का मारकर मेडल जीतने का सपना काशी के हर मुक्केबाज का है लेकिन ‘आसमान’ छूने से पहले ही वे आर्थिक चोट से घायल हो रहे हैं। सिगरा स्पोर्ट्स स्टेडियम में ट्रेनिंग के लिए अत्यधिक फीस, महंगे सुरक्षा उपकरण और पौष्टिक डाइट शुल्क न मिलने से खिलाड़ियों का दम घुट रहा है। मेडल जीतने के बाद भी जब स्पोर्ट्स कोटे की नौकरी का दरवाजा बंद मिलता है तो खिलाड़ियों का मनोबल कमजोर पड़ने लगता है। वाराणसी बॉक्सिंग एसोशिएसन से जुड़े सदस्यों और खिलाड़ियों ने चांदपुर में ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत के दौरान कहा कि मुक्केबाज पर्याप्त सरकारी प्रोत्साहन राशि और वित्तीय सहायता की कमी से जूझ रहे हैं। यह स्थिति बॉक्सिंग की उभरती प्रतिभाओं के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। नेशनल बॉक्सिंग खिलाड़ी श्रीवांश त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) से जुड़ी बॉक्सिंग प्रतिभाएं सुविधाओं और सरकारी संरक्षण के अभाव में दम तोड़ रही हैं। उन्हें पहचान नहीं मिल पा रही है। अमित कुमार सिंह ने कहा कि ट्रेनिंग के लिए आधुनिक सुविधाओं, कोच और नियमित प्रतियोगिताओं का घोर अभाव है। जिन खिलाड़ियों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने की क्षमता है, वे उचित मार्गदर्शन और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने पर मजबूर हैं।

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सिगरा स्टेडियम में अधिक फीस

सिगरा स्पोर्ट्स स्टेडियम में बॉक्सिंग प्रशिक्षण के शुल्क ने युवा प्रतिभाओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। स्टेट खिलाड़ी अपूर्व सिंह और आकाश मौर्य ने कहा कि फीस के चलते कई होनहार खिलाड़ी प्रशिक्षण लेने से वंचित हो रहे हैं। इससे न सिर्फ खिलाड़ियों की संख्या घट रही है बल्कि खेल का स्तर भी प्रभावित हो रहा है। स्टेडियम प्रबंधन की ओर से तय की गई फीस का कोई पारदर्शी मानक नहीं है। हरिओम ने कहा कि इससे प्रशिक्षण की सुविधा कुछ ही खिलाड़ियों तक सीमित हो गई है। नियमित ट्रायल या चयन प्रक्रिया भी नहीं हो रही है। ऐसे में नए खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल रहा है।

महंगी किट बड़ी बाधा

अंकित यादव और खुशी ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली बॉक्सिंग किट जैसे- ग्लव्स, हेडगार्ड, माउथगार्ड और जूते की कीमतें युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षण से दूर कर रही हैं। सस्ते और कमजोर ग्लव्स से हाथों में गंभीर चोट आ जाती है। खराब हेडगार्ड सिर को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाते। आकाश ने कहा कि खेल विभाग की तरफ से खिलाड़ियों को किट या कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती। जो बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर जाते हैं, उन्हें ही थोड़ी मदद मिलती है। शुरुआती स्तर पर बच्चों को खुद ही महंगी किट खरीदनी पड़ती है। जो खिलाड़ी यह खर्च नहीं उठा पाते, वे या तो प्रैक्टिस छोड़ देते हैं या सही उपकरण के अभाव में पीछे रह जाते हैं।

महंगा आहार और सीमित आय

मिहिर प्रताप सिंह, श्लोक पाण्डेय ने कहा कि अधिकांश उभरते हुए मुक्केबाज निम्न या मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। उन्हें उच्च-प्रोटीन और विशिष्ट कैलोरी वाला डाइट चार्ट फॉलो करना आर्थिक रूप से असंभव होता है। कई बार खिलाड़ियों को सिर्फ डाइट मनी की कमी के कारण बीच में ही खेल छोड़ना पड़ता है। आराध्य प्रताप, अर्चिता ने कहा, कई कोच और खिलाड़ियों को यह जानकारी नहीं होती कि उन्हें अपनी ट्रेनिंग के चरण के अनुसार कब और कितना प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट या सप्लीमेंट्स लेना है। पोषण विशेषज्ञ की उपलब्धता केवल राष्ट्रीय शिविरों तक सीमित है।

प्रशिक्षण लोड की मॉनिटरिंग

कोच विकास सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ी पर पड़ने वाले शारीरिक लोड को मापने के लिए हार्ट रेट मॉनिटर या अन्य ट्रैकिंग उपकरणों की कमी है। इसके अभाव में कोच अक्सर देसी तरीकों पर निर्भर रहते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। इससे प्रदर्शन का अधिकतम स्तर हासिल नहीं हो पाता। चोट लगने पर तुरंत विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी की सुविधा भी केवल बड़े प्रशिक्षण संस्थानों तक सीमित है। छोटे केंद्रों में सामान्य मालिश ही एकमात्र इलाज होता है। इससे कई खिलाड़ियों की चोटें गंभीर हो जाती हैं और कॅरियर खतरे में पड़ जाता है।

स्पोर्ट्स कोटे की नौकरी नदारद

नेशनल बॉक्सिंग खिलाड़ी विनय पाल ने कहा कि अन्य खेलों की तुलना में बॉक्सिंग के लिए सरकारी विभागों- रेलवे, पुलिस या बैंक आदि में स्पोर्ट्स कोटे की भर्तियां न के बराबर निकलती हैं। यह स्थिति युवा प्रतिभाओं को हतोत्साहित कर रही है। कृष्णा पाण्डेय बोले, मेडल जीतना सिर्फ जुनून नहीं, बल्कि स्थायी करियर की उम्मीद भी है। लेकिन जब इतना पसीना बहाने के बाद भी सरकारी नौकरी के दरवाजे बंद देख खिलाड़ी निराश होकर खेल छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। वहीं प्रशिक्षकों के मुताबिक भारतीय सेना, रेलवे और पुलिस विभाग में बॉक्सिंग के लिए ज्यादा कोटा होना चाहिए क्योंकि यह खेल अनुशासन और शारीरिक दमखम की मांग करता है, जो इन विभागों के लिए आदर्श है।

मिले मासिक भत्ता

एकलव्य मिश्रा और विधिशा पटेल ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए महंगे प्रशिक्षण उपकरण (किट), पौष्टिक आहार (डाइट) और यात्रा का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। सौम्या सिंह बोलीं, बॉक्सिंग में खिलाड़ियों को उच्च कैलोरी और प्रोटीनयुक्त आहार की सख्त जरूरत होती है। इसके अलावा अभ्यास के लिए जरूरी ग्लव्स, हेडगार्ड और जूते जैसे उपकरण काफी महंगे होते हैं और लगातार बदलने पड़ते हैं। सभी खिलाड़ियों ने जोर दिया कि यदि हमें एक निश्चित मासिक भत्ता मिलने लगे तो अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। आर्थिक दबाव के कारण पढ़ाई या छोटी-मोटी नौकरी के बारे में नहीं सोचना पड़ेगा।

स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट की अहमियत

विशेषज्ञ डॉ. अंसिल श्रीवास्तव के मुताबिक खिलाड़ियों में स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी की विशेषज्ञता को लेकर जागरूकता की कमी है। आलम यह है कि सामान्य चोट या स्पोर्ट्स इंजरी का भी खिलाड़ी किसी भी गैर-विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट से इलाज करा लेते हैं। इससे उनकी चोट पूरी तरह ठीक नहीं होती। चोट का मूल कारण अक्सर अनजाना रह जाता है या पूरा इलाज नहीं हो पाता। स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी एक विशिष्ट शाखा है। इसके लिए अलग से पढ़ाई और प्रशिक्षण की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट खेल के दौरान होने वाली विशिष्ट चोटों और उनकी तेज रिकवरी की तकनीकों में माहिर होते हैं। सामान्य फिजियोथेरेपी का फोकस दैनिक जीवन की समस्याओं पर होता है। वहीं स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट का लक्ष्य खिलाड़ी को जल्द से जल्द और पूरी तरह से खेल के योग्य बनाना होता है।

एक नजर में

-4000 के आसपास बॉक्सिंग के खिलाड़ी हैं वाराणसी में

-50 खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर रहा है बॉक्सिंग एसोसिएशन

-2010 में हुई थी वाराणसी बॉक्सिंग एसोसिएशन की स्थापना

हमारी भी सुनें

1. देश का नाम रोशन करने वाले मुक्केबाजों को खेल विभाग और प्रशासन से सहायता मिलनी चाहिए।

- विकास सिंह

2. सिगरा स्टेडियम में फीस इतनी ज्यादा है कि कई खिलाड़ी शुरुआत में ही हिम्मत हार जाते हैं।

- श्रीवांश त्रिपाठी

3. मुक्केबाजी में खिलाड़ी के आहार की गुणवत्ता उसके प्रदर्शन पर सीधा असर डालती है। पोषक आहार जरूरी है।

- अपूर्व सिंह

4. महंगी बॉक्सिंग किट आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम-वर्गीय परिवारों के खिलाड़ियों के लिए भारी पड़ रही है।

- आकाश मौर्या

5. वाराणसी के लोकल खिलाड़ियों को सिगरा स्पोर्ट्स स्टेडियम में नि:शुल्क प्रशिक्षण की सुविधा मिलनी चाहिए।

- विनय पाल

6. खिलाड़ियों के लिए नौकरी न सिर्फ सम्मान है, बल्कि यह युवाओं को प्रेरित करने का सबसे बड़ा जरिया भी है।

- अंकित यादव

7. स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट के पास खिलाड़ी तब आते हैं जब गैर-विशेषज्ञ के इलाज से उनकी चोट खराब हो चुकी होती है।

- डॉ. अंसिल श्रीवास्तव

8. खिलाड़ियों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की क्षमता है लेकिन वे बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते हैं।

- मिहिर प्रताप सिंह

9. भत्ता खिलाड़ियों को न सिर्फ आर्थिक सहारा देता है बल्कि उन्हें मानसिक सुरक्षा भी प्रदान करता है।

- हरिओम राजपूत

10. कई खिलाड़ी सस्ते उपकरणों का उपयोग करते हैं, जो चोट के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते।

- सौम्या सिंह

11. निम्न-मध्यम वर्ग के कई युवा मुक्केबाज दैनिक आहार का खर्च वहन न कर पाने के कारण खेल छोड़ देते हैं।

- अमित कुमार सिंह

12. सरकारी और अर्द्धसरकारी विभागों में स्पोर्ट्स कोटे की भर्तियों में बॉक्सिंग के लिए भी त कोटा तय किया जाए।

- आकाश

सुझाव और शिकायतें

सुझाव

1. प्रशिक्षण फीस को तर्कसंगत बनाया जाए और आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए मुफ्त या रियायती प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाये।

2. सरकार या खेल प्राधिकरण सब्सिडी पर अच्छे उपकरण उपलब्ध कराए या स्टेडियम में किट बैंक स्थापित करे।

3. सभी सरकारी भर्तियों में बॉक्सिंग के लिए निश्चित कोटा तय किया जाए और नियमित रूप से भर्तियां निकाली जाएं।

4. राज्य या राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की डाइट संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए निश्चित मासिक भत्ता (स्टाइपेंड) दिया जाए।

5. स्टेडियम में प्रशिक्षित स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति के साथ खिलाड़ियों को सही इलाज के प्रति जागरूक भी किया जाए।

शिकायतें

1. सिगरा स्पोर्ट्स स्टेडियम में बॉक्सिंग ट्रेनिंग का शुल्क बहुत अधिक है। इस कारण आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे हैं।

2. अच्छी गुणवत्ता के ग्लव्स, हेडगार्ड और जूते बहुत महंगे होते हैं। सस्ते उपकरणों का इस्तेमाल करने से चोट लगने का खतरा रहता है।

3. बॉक्सिंग के लिए स्पोर्ट्स कोटे में नौकरियां न के बराबर निकलती हैं। इससे मेडल जीतने के बाद भी खिलाड़ियों का भविष्य असुरक्षित है।

4. पौष्टिक आहार का भारी खर्च खिलाड़ी खुद वहन करते हैं। इससे प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।

5. खेल के दौरान चोट लगने पर स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट की सुविधा नहीं मिलती है, जिससे खिलाड़ियों को असुविधा होती है।

Sandeep Kumar Shukla

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Sandeep Kumar Shukla
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