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BJP के पुराने मुद्दे को SIR से मिली धार,  2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में दिख सकता है असर

BJP के पुराने मुद्दे को SIR से मिली धार, 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में दिख सकता है असर

संक्षेप:

भाजपा हर चुनाव में बूथ प्रबंधन को लेकर अलग-अलग नारे बुलंद करती रही है। बूथ जीता-चुनाव जीता का नारा भी पार्टी ने दिया। मोदी मैजिक ने 2014 से पार्टी को यूपी में अजेय बना दिया। इसके बाद भी बूथ प्रबंधन का काम अधूरा ही रहा। अब एसआईआर से बूथों पर किया गया गठन दिखाई दे रहा है।

Nov 30, 2025 10:16 am ISTYogesh Yadav राजकुमार शर्मा लखनऊ
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यूपी में भाजपा नेता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने चुनावी जीत के लिए वर्ष 1991 में वन बूथ-20 यूथ का मंत्र दिया था। तब से भाजपा ने सत्ता और विपक्ष के कई दौर देखे, लेकिन मतदान से पहले पोलिंग एजेंट की तलाश का सिलसिला खत्म नहीं हो पाया। मगर मतदाता विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) ने 34 साल पहले दिए गए उस नारे को धार दे दी है। पार्टी इस मतदाता पुनरीक्षण अभियान के बहाने बूथ प्रबंधन में जुट गई है। इस मुहिम ने बीएलए-2 के रूप में पार्टी को पोलिंग एजेंट भी दे दिया है। वर्ष 2027 के चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है।

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भाजपा हर चुनाव में बूथ प्रबंधन को लेकर अलग-अलग नारे बुलंद करती रही है। बूथ जीता-चुनाव जीता का नारा भी पार्टी ने दिया। मोदी मैजिक ने 2014 से पार्टी को यूपी में अजेय बना दिया, फिर पीएम मोदी का नारा, यूपी प्लस योगी, बहुत उपयोगी भी इसमें जुड़ गया। मगर असलियत यह है कि बूथ प्रबंधन का काम अधूरा ही रहा। ऐसे कार्यकर्ताओं की खोज खत्म ही नहीं हो पाई, जो अपने बूथ के तहत आने वाले 200 से 250 परिवारों की जानकारी रखता हो। फिर चाहे उनमें समर्थक वोटर हों या विरोधी।

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पार्टी ने बदला पैटर्न तो दिखने लगा असर

इसी का नतीजा है कि पार्टी के तमाम कार्यक्रम और अभियानों में चुनिंदा चेहरे ही रिपीट होते दिखाई देते रहे हैं। जबकि पार्टी के पास कार्यकर्ताओं की लंबी-चौड़ी फौज है। एक मंडल के तहत आने वाले बूथों की संख्या 80 से 90 के बीच है। एक बूथ समिति में 11 कार्यकर्ता हैं, यानि एक मंडल में लगभग एक हजार पदाधिकारी। एक विधानसभा में औसतन पांच मंडल हैं। इस लिहाज से एक विधानसभा में तकरीबन 5000 पद धारी कार्यकर्ता पार्टी के पास होने चाहिए। अब बूथ लेवल पर किया गया गठन दिखाई दे रहा है।

पार्टी ने झोंकी ताकत, लगातार निगरानी

एसआईआर में पार्टी पूरी ताकत झोंक रही है। प्रदेश महामंत्री व एमएलसी गोविंद नारायण शुक्ला के संयोजन में पांच सदस्यीय समिति इस काम को देख रही है। इसमें प्रदेश उपाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल व संजीव शर्मा सह संयोजक हैं। पार्टी ने सरकारी बीएलओ के अलावा अपने बीएलए-1 व बीएलए-2 भी बनाए हैं। इसके अलावा हर बूथ पर प्रवासी भेजे जा रहे हैं। प्रदेश मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से इसकी नियमित समीक्षा हो रही है। एसआईआर को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने भी यूपी में हुए काम पर संतोष जताया है।