
यूजीसी पॉलिसी पर बवाल! BJP किसान मोर्चा के VP ने दिया इस्तीफा, मोदी को पत्र लिखकर बताया काला कानून
यूजीसी की नई पॉलिसी को लेकर बढ़ते विरोध के बीच रायबरेली जिले से भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के एक पदाधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि इससे पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा दिया था।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई नीतियों को लेकर असंतोष अब राजनीतिक हलकों तक पहुंच गया है। रायबरेली जिले के सलोन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर UGC की नई नियमावली पर नाराजगी जताई और इसे समाज को बांटने वाला कदम बताया।
श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अपने इस्तीफे में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू की जा रही नई व्यवस्था सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने इसे “काले कानून जैसा” बताते हुए कहा कि वह ऐसे किसी भी प्रावधान का समर्थन नहीं कर सकते, जो उनकी विचारधारा और आत्मसम्मान के खिलाफ हो। त्रिपाठी के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर समाज में गहरा असंतोष और आक्रोश है।
गौरतलब है कि UGC ने 13 जनवरी को नए नियम अधिसूचित किए थे, जो साल 2012 के नियमों का अपडेट हैं। इन नियमों को लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है। छात्रों का आरोप है कि यह फ्रेमवर्क उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। UGC के नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना बताया गया है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों को विशेष शिकायत निवारण समितियां और हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खास तौर पर SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।
अलंकार अग्निहोत्री के आरोप को प्रशासन ने किया खारिज
दलअसल, हाल ही में यूजीसी और अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के चलते बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, उनके द्वारा लगाए गए ब्राह्मण विरोधी अभियान के आरोपों को जिला प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है। बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि ये आरोप गलत बयानी का नतीजा हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवाद को सनसनीखेज आरोपों में बदलना उचित नहीं है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं और उन्हें जांच पूरी होने तक शामली के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। वहीं, अग्निहोत्री ने ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों से इस्तीफा देकर समुदाय के साथ खड़े होने की अपील भी की है।





