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भूसा खरीद रही पेपर मिलों पर नकेल कसने को शासन को लिखी चिट्ठी

भूसा खरीद रही पेपर मिलों पर नकेल कसने को शासन को लिखी चिट्ठी

भूसे के दाम आसमान पर है। किसान चाहकर भी नहीं खरीद पा रहे हैं। पिछले सालों की अपेक्षा इस सीजन में भूसे के दामों में उछाल आया है। बढ़े दामों के चलते भूसे का संकट गहराने लगा है। बाजार में भूसे की कीमत 750रुपये कुंतल तक पहुंच गई है। जबकि पिछले वर्ष 450 से 500 में बिक रहा था। बढ़े दामों का कारण पेपर मिलों द्वारा खरीदा जा रहा भूसा माना जा रहा है। किसान संगठन इसके विरोध में उतर चुके हैं।

भाकियू भानू के जिलाध्यक्ष चौधरी वीर सिंह सहरावत ने एक पेपर मिल द्वारा खरीदे जा रहे भूसे को लेकर एसडीएम से नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अधिकांश चीनी मिल बंद हो गई हैं। ऐसे में अगोला खत्म होने पर काफी किसान ऐसे हैं, जिनके पास हरा चारा शुरू नहीं हुआ है और वह भूसे पर निर्भर हैं। पशुओं का पेट भरने के लिए भूसा खिला रहे हैं। जिन किसानों के पास हरा चारा शुरू हो गया है वह भी चारे में भूसा मिला रहे हैं। इन दिनों किसान भूसे का साल भर का कोटा कर लेता था ताकि बरसात के दिनों में घर बैठे पशुओं को भूसा खिलाकर पेट भरा जा सकें, लेकिन भूसे के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। 750 रुपये कुंतल तक भूसे के दाम जिले में पहुंचने से किसान मनमाफिक भूसा नहीं खरीद पा रहे हैं। पिछले साल भूसे का दाम काफी कम था, लेकिन इस बार भूसे के दाम आसमान पर पहुंचने के कारण जिले के किसान परेशान हैं। इस रेट में भूसा खरीदना किसानों की सामर्थ्य से बाहर है। एक दो प्रतिशत किसानों को छोड़कर अन्य किसान पर्याप्त भूसा नहीं खरीद पाए हैं और भूसे के दामों में गिरावट का इंतजार कर रहे हैं। भूसे के बढ़े दामों का मुख्य कारण पेपर बनाने वाली मिलों द्वारा भूसा खरीदा जाना भी माना जा रहा है। पेपर मिल भूसा खरीद रही हैं, इसके चलते भूसे का दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। जिले के किसान संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन भानू के जिलाध्यक्ष चौधरी वीर सिंह सहरावत हाल ही में ऐसी मिलों को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने एसडीएम सदर बृजेश कुमार सिंह को अवगत कराया है कि अगर ऐसी मिल बाज नहीं आई तो जिले का किसान मिलों के खिलाफ आंदोलन करने के बाध्य होंगे। वहीं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेन्द्र सिंह ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए कागज बनाने वाली मिलों द्वारा खरीदे जा रहे भूसे पर रोक लगाने के लिए शासन को चिट्ठी लिखी है। ताकि मिल किसानों का भूसा ना खरीद सकें और किसानों को सस्ते दामों पर भूसा मिल सकें। बतादें कि पिछले साल भूसे का दाम साढ़े चार सौ से पांच पांच सौ रुपये प्रति कुंतल तक था। :::::::::::::::::कागज बनाने वाली मिल किसानों का भूसा खरीद रही है। इसको लेकर भूसे के दाम 750 रुपये कुंतल तक पहुंच गया है। ऐसे हालात में किसान पशुओं के लिए भूसा नहीं खरीद पा रहे हैं। मामले को लेकर निदेशक विकास और प्रशासन पशु पालन विभाग को चिट्ठी लिखी है, ताकि शासन स्तर से भूसा खरीद रही पेपर मिलों पर रोक लगाई जा सकें। ताकि किसानों को भूसा मिल सकें। शासन को मामले से अवगत करा दिया गया है। -डॉ. भूपेन्द्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बिजनौर।

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  • Web Title: Written letter to government to crack on paper mills procuring straw