बिजनौर: प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र के इंतकाल पर हुई शोक सभा
कौमी इत्तेहाद ट्रस्ट ने प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया। इस सभा में साहित्यकारों और समाजसेवियों ने भाग लिया और दिवंगत शायर को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने बशीर बद्र की साहित्यिक योगदान को याद किया और उनके जाने को अदबी दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
नगीना। कौमी इत्तेहाद ट्रस्ट ने मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया। मकबूल शायर बशीर बद्र के अचानक हुए देहांत से अदबी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है। इस सिलसिले में कौमी इत्तेहाद ट्रस्ट की ओर से एक शोक सभा का आयोजन 'गुल्सितान-ए-शाहिद' में किया गया। इसमें क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों, साहित्यकारों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया और दिवंगत आत्मा को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य रूप से परवेज आदिल माही, हकीम बहार शम्सी, मास्टर अली हसन उस्मानी और अनवर महमूद मौजूद रहे। इनके अलावा जुबैर इकबाल जनजानी, मोहम्मद यासीन, मुनीर आलम, राशिद उस्मानी, फौजान अहमद, शहजाद हुसैन आदि ने भी शिरकत की।
कार्यक्रम के दौरान हकीम बहार शम्सी ने बशीर बद्र साहब के साहित्यिक योगदान को याद किया। उन्होंने बद्र साहब की अनूठी शायरी और उनके लिखने के अंदाज पर संक्षिप्त प्रकाश डाला।सभी वक्ताओं ने कहा कि बशीर बद्र का जाना उर्दू शायरी और अदब के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत शायर की मग्फिरत (शांति) के लिए दुआ मांगी गई और उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।
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