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करोड़ों का घोटाला उजागर करने वाले की जान को खतरा

1 करोड़ 73 लाख का घोटाला उजागर करने वाले की जान को खतरा है। पीड़ित ने एसपी व डीजीपी से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसने आरोपियों से अपनी जान को खतरा बताया है। राजपाल सिंह ने घोटाले की शिकायत लोकायुक्त से की थी। शिकायत के बाद जांच हुई तो 1करोड़ 73 लाख का घोटाला सामने आए।

राजपाल सिंह पुत्र गिरधारी सिंह ग्राम सिकैडा नवादा उर्फ इलायचीपुर खडगू ने एसपी व डीजीपी को प्रार्थना पत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। राजपाल सिंह पुत्र गिरधारी सिंह ग्राम सिकैडा नवादा उर्फ इलायचीपुर खडगू ने एसपी व डीजीपी को दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि सहकारिता विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त से की थी। भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों पर एफआईआर कराई गई है साथ ही निलम्बन की कार्रवाई भी होगी। जिसके चलते कर्मचारी व अधिकारी मुझसे व्यक्तिगत द्वेष रखते हैं। भ्रष्टाचार में लिप्त यह लोग और उन्हें संरक्षण देने वाले राजनैतिक लोग मुझे व मेरे परिवार को हानि पहुंचा सकते हैं। मेरी हत्या भी करा सकते हैं। प्रार्थना पत्र में राजपाल सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब मैने अमित कुमार त्यागी सहायक आयुक्त सहायक निबंधक सहकारिता बिजनौर से सम्पर्क किया तो उन्होंने मुझे अपने अधीनस्थ कर्मचारी के माध्यम से एससी,एसटी एक्ट में फंसाने व सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के सम्बंध में केस में फंसाने की धमकी दी है। राजपाल सिंह ने प्रार्थना पत्र में एसपी व डीजीपी से अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। बता दें कि सन् 2009 से लेकर 2013-14 के बीच उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड के तहत अनुसूचित जाति जन जाति के लोगों को रोजगार दिलाने के लिए लोन दिया जाना था। बिना लोन किए अनुदान की धनराशि बांट दी गई। लोकायुक्त से शिकायत के बाद तीन डीजीएम और तीन एडीसीओ द्वारा की गई जांच में करीब 1 करोड़ 73 लाख का घोटाला निकला। 18 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर कराई गई। डीसीबी की 9 शाखाओं में घोटाले की शिकायत हुई थी। जांच में चार में तो गड़बड़ी नहीं निकली बल्कि स्योहारा, बुढ़नपुर, बास्टा, चकराजमल सहित पांच शाखा में बिना लोन किए अनुदान बांटने का मामला पकड़ में आया था। ::::::::::::::: शिकायत पर इस मामले की निष्पक्ष रुप से जांच कराई गई। पांच शाखाओं में गड़बडी मिलने पर 18 के खिलाफ एफआईआर कराई गई तथा बैंक के 12 कर्मचारी सस्पेंड कर दिए गए है। जो आरोप लगाए वह बेबुनियाद है। गम्भीरता और निष्पक्षता से इस मामले की अभी और जांच कराई जा रही है। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। मैं पिछले एक साल से इस पद पर हूं और यह प्रकरण काफी पुराना है। राजपाल सिंह से मेरा कोई लेना देना नहीं है। जो शिकायत मिलती है निष्पक्ष जांच कराई जाती है। अमित कुमार त्यागी, एआर कोऑपरेटिव

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  • Web Title: Threat of the life of millions of scandals