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बोले बिजनौर : टूटी गलियां, जर्जर सड़क, बदहाली का शिकार है जंदरपुर

बोले बिजनौर : टूटी गलियां, जर्जर सड़क, बदहाली का शिकार है जंदरपुर

संक्षेप:

Bijnor News - बिजनौर के अमीपुर सुधा उर्फ जंदरपुर गांव में 4800 की आबादी और 2300 मतदाता हैं। गांव में गंदगी, टूटी सड़कें, और अपर्याप्त स्ट्रीट लाइटें हैं। ग्रामीण कच्चे मकानों में रहते हैं और कई बार शिकायत करने के...

Oct 24, 2025 08:00 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिजनौर
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बिजनौर शहर के करीब ग्राम पंचायत अमीपुर सुधा उर्फ जंदरपुर में करीब 4800 की मिश्रित आबादी निवास करती है, जबकि 2300 मतदाता अपनी गांव की सरकार चुनते हैं। शहर के करीब होने के बावजूद ग्राम पंचायत जंदरपुर विकास से काफी दूर है। यहां काफी सड़कें पूरी तरह टूटी हुई हैं। गंदगी, टूटी सड़कें, पर्याप्त स्ट्रीट लाइटें न होना और उपेक्षित बुनियादी सुविधाएं लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो चुकी है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। लोगों को शासन-प्रशासन से सिर छिपाने का आसरा देने की उम्मीद है। बिजनौर शहर से सटे अमीपुर सुधा उर्फ जंदरपुर समस्याओं से घिरा हुआ है।

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मुख्य सड़क पर बना नाला सफाई न होने से गंदगी से अटा है। सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं। ग्राम पंचायत की ज्यादातर सड़कें टूटी और क्षतिग्रस्त हैं। सड़कों पर नालियों का गंदा पानी फैला रहता है। गांव में कई सफाईकर्मी होने के बावजूद कई दिनों में सफाई करने आते हैं। जिससे संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। नालियों पर चैनल न होने के चलते गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। गांव में वर्षों से फॉगिंग नहीं हुई है। पर्याप्त मात्रा में स्ट्रीट लाइटें नहीं है। गांव के अंतिम छोर पर स्ट्रीट लाइट न होने से शाम ढले की अंधेरा फैल जाता है। गांव में लगे कई इंडिया मार्का हैंडपंप खराब पड़े हैं। कच्चे मकान में रहने को मजबूर ग्रामीण आजादी के इतने वर्षों बाद भी अमीपुर सुधा में 100 से अधिक परिवार आज भी कच्चे मकानों में पॉलीथिन डालकर रहने को मजबूर हैं। रूखसाना, साजना, रेशमा व नसीमा का कहना है कि ग्राम प्रधान से काफी बार कहा जा चुका है। इसके साथ ही कई बार आनलाइन फार्म भरे हैं, इसके बावजूद उनको मकान बनाने के लिए सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है। बरसात के दिनों में उनके लिए मुश्किल खड़ी हो जाती है। पर्याप्त स्ट्रीट लाइटें, मुश्किल में ग्रामीण अनवरी, जुबैदा, शाहिदा का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर से पर्याप्त संख्या में स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई हैं। शाम ढलते ही गांव के मोहल्ले अंधेरा छा जाता है। गांव के छोर पर रईसुद्दीन व इसराईल के मकान तक कोई भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगी हैं। जिससे जंगली जानवरों को खतरा भी बना रहता है। इससे एक ओर तो असामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ रहा है, ग्रामीणों का कहना है कि सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें न होने से अंधेरे में कोई भी घटना हो सकती है। खोदकर डाल दी गांव की सड़कें, नहीं की मरम्मत गांव की गलियों और सड़कों को खोदकर डाल दिया है। जलनिगम ने हर-घर जल, हर घर नल योजना के तहत पाइप लाइन डालने के लिए सड़कों को खोदा था। पाइप लाइन डालने के बाद भी सड़कों की मरम्मत नहीं की गई है। करीब आठ माह से सड़क टूटी पड़ी है। उनकी कोई सुध लेने वाला है। खाली जगहों पर डाला जा रहा कूड़ा गांव में कई जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। बबलू, रमजान अली, मौ. अख्तर का कहना है कि गांव में कई सफाईकर्मी तैनात है। इसके बावजूद सफाई नहीं होती है। नालियां जाम हैं और गंदा पानी और कूड़ा जमा है। हल्की हवा के साथ बदबू चारों ओर फैल जाती है। लोगों का कहना है कि इस गंदगी की वजह से मच्छर और मक्खियां पनप रहे हैं और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कूड़ा उठाने वाले न रोज न आने से ग्रामीण खाली प्लाटों में कूड़ा डाल देते है। जो सड़कों पर फैल रहा है। दर्द बयां किया काफी लोगों के कच्चे मकान हैं। सरकार आवास दिलाए। आवास मिलेंगे तो जीवन आसान हो जाएगा। - अनवरी मच्छरों की संख्या अधिक है। फॉगिंग नहीं होती है। नियमित रूप से फॉगिंग होनी चाहिए। इससे मच्छरों की संख्या में निजात मिलेगी। - जुबेदा सफाई व्यवस्था खराब है। गांव में साफ सफाई पर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। रोज साफ सफाई होनी चाहिए। - रेशमा स्ट्रीट लाइट पर्याप्त मात्रा में नहीं है। अधिक से अधिक स्ट्रीट लगनी चाहिए ताकि गांव में रात में रोशनी हो सके। - नसीमा रोज कूड़ा नहीं उठता है। नियमित रूप से सड़कों के किनारे पड़ा कूड़ा उठना चाहिए। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा दूर होगा। - शाहिदा मच्छर अधिक हैं और बीमारी का खतरा रहता है। गांव में फॉगिंग हर सप्ताह होनी चाहिए। इससे बीमारी का खतरा कम होगा। - साकिब नालियों में कूड़ा अटा हुआ है। नालियों की सफाई नियमित रूप से होनी चाहिए। अधिकारी लगातार निरीक्षण करें। - बबलू जलनिगम ने सड़क तोड़ दी हैं और मरम्मत नहीं हुई है। टूटी सड़क की मरम्मत होनी चाहिए। मरम्मत होने से गांव के लोगों को राहत मिलेगी। - मेहताब कूड़ा रोज नहीं उठता है। खाली स्थानों पर कूड़ा डाल दिया जाता है। रोज के रोज कूड़ा उठने की व्यवस्था होनी चाहिए। - रमजान अली लोगों के आयुष्मान कार्ड बनने चाहिए। इससे गांव के लोगों की मदद होगी। अभियान चलाकर आयुष्मान कार्ड बनवाए जाए। - मोहम्मद अख्तर सफाई कर्मचारी रोज आए और रोज कूड़ा उठना चाहिए। सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा दूर होगा। - साजना सौन्दर्यकरण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अधिकारी निरीक्षण कर लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाए। पात्रों को योजना का लाभ मिलना चाहिए। - अनीसा नाले नालियों की तली झाड़ सफाई होनी चाहिए। इससे गंदा पानी नालों में नहीं रुकेगा और गांव में सफाई रहेगी। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। - रुखसाना गांव के लोगों को मनरेगा में अधिक से अधिक काम मिलना चाहिए। मनरेगा में काम मिलेगा तो गुजर बसर अच्छे से हो जाएंगी। इस पर अधिकारी ध्यान दें। - खुर्शीद अहमद सुझाव 1. गांव के लोगों को पक्के मकान मिलने चाहिए। 2. गांव में नियमित रूप से फॉगिंग होनी चाहिए। 3. गांव में रोज के रोज सफाई हो और कूड़ा उठना चाहिए। 4. पर्याप्त मात्रा में स्ट्रीट लाइट लगनी चाहिए। 5. जल निगम द्वारा टूटी सड़कों की मरम्मत होनी चाहिए। 6. गांव में पानी के लिए अधिक से अधिक इंडिया मार्का हैंडपंप शिकायत 1. लोग कच्चे मकान में रह रहे हैं। 2. मच्छरों की बढ़ी संख्या पर नकेल कसने को फॉंिगंग नियमित रूप से नहीं होती है। 3. रोशनी की व्यवस्था के लिए पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं है। 4. गंदगी से नाले अटे हुए हैं। 5. रोज कूड़ा नहीं उठता है। 6. जल निगम द्वारा सड़क तोड़ कर डाल दी गई है।