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23 सितम्बर, 2020|2:10|IST

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नजीबाबाद: अपनी आत्मा में रमण करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

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दशलक्षण पर्व कार्यक्रम में दसवें दिन उत्तम ब्रहमचर्य धर्म पर का पालन करने का आह्वान किया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने अनन्तनाथ तीर्थंकर की विशेष पूजन किया।

श्रद्धालुओं ने महावीर का पालना भी झुलाया।मंगलवार को श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में धर्मचर्चा करते हुए जिनेश्वरदास जैन, दीपक जैन व अजय जैन ने कहा कि अपनी वासनाओं पर नियंत्रण करना, परस्त्रियों पर निगाह न रखना ब्रहमचर्य धर्म है। जब यह धर्म आत्मा का धर्म बनता है तो मनुष्य सांसारिक भोग विलास व वासनाओं से दूर हो जाता है। ब्रहमचर्य का मतलब है कि अपनी आत्मा में रमण करना और जब अपनी आत्मा में व्यक्ति रमण करने लगता है तो यह उत्तम ब्रहमचर्य धर्म कहलाता है। इस मौके पर जैन श्रद्धालुओं ने प्रात: श्री जी का अभिषेक व पूजन किया गया। आादिनाथ भगवान की वेदी पर अक्षत जैन ने ,चन्द्रप्रभु भगवान की वेदी पर जिनेशवर दास जैन, नमन जैन, अनुभव जैन, नवकार जैन, पुनीत जैन, दीपक जैन व महावीर की वेदी व माडला पर अजय जैन ने पूजा की। सरजायती जैन मंदिर में जितेन्द्र जैन ने अभिषेक व पूजन किया। महिलाओं मे सुषमा जैन, समला जैन,सुशीला जैन, अलका जैन, छवि जैन,रैना जैन,अरनव जैन,यश जैन, ज्ञान चंद जैन,पूनम जैन,रूकमणि जैन, समीक्षा जैन,आशा जैन आदि ने भी पूजन किया। अनन्तचतुर्दशी पर्व पर जैन श्रद्धालुओं ने व्रत रखे और तीर्थंकर भगवान अनन्त नाथ की विशेष पूजा की ।

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  • Web Title:Najibabad the best celibacy religion