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कोरोना से लड़ने को मंगाई करोड़ों की दवाई हो गईं डंप

हिन्दुस्तान टीम,बिजनौरPublished By: Newswrap
Mon, 14 Jun 2021 10:11 PM
कोरोना से लड़ने को मंगाई करोड़ों की दवाई हो गईं डंप

कोरोना से लड़ाई को वायरस से लड़ने को मंगाई गई करोड़ों की दवाई डंप हो गयी। अचानक मरीज घट जाने से बिक्री धड़ाम हो गयी। कईं दवाओं की एक्सपायरी करीब है। उधर फेवीफ्लू समेत कुछ दवाओं का माल वापिस लेने से तो फार्मास्यूटिकल कंपनियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

कोरोना की दूसरी लहर जब पूरे पीक पर थी तो मेडिकल स्टोरों पर ग्राहकों की दिन भर भीड़ लगी रहती थी। एजिथ्रोमाइसिन, पैरासिटामोल, डाक्सीसाइक्लिन, विटामिन सी, जिंक व मल्टीविटामिन टेबलेट, आइवरमेक्टिन, फेविपिराविर समेत विभिन्न दवाइयों की ही नहीं, पल्स ऑक्सीमीटर, स्टीम वैपोराइजरर्स आदि की भी जबरदस्त मांग हो गयी थी। इनमें भी कईं फेमस ब्रांड की मांग ज्यादा थी। दवा व्यवसाय से जुड़े लोग बताते हैं, कि बिक्री के चलते फुटकर व थोक सभी तरह के दवा विक्रेताओं ने खूब स्टॉक मंगाया था। अब कोरोना के मरीजों का ग्राफ बिल्कुल नीचे आने से बिक्री भी धड़ाम हो गयी है और जिले भर के मेडिकल स्टोरों पर कुल मिलाकर करोड़ों की दवाएं डंप पड़ी हैं। एक-एक मेडिकल स्टोर पर कईं-कईं लाख का स्टॉक बताया जाता है।

अग्रवाल कम्पनी, अटलांटिस हेल्थकेयर आदि के संचालक बिक्री के कारण स्टॉक डंप होने की बात तो स्वीकार करते हैं, लेकिन एक्सपायरी या माल वापिस होने में अधिकांश कंपनियों की तरफ से कोई दिक्कत न होने की बात कह रहे हैं, हालांकि फेविपिराविर समेत कुछ दवाओं की कंपनी की माल वापिस न लेने की कंडीशन पहले ही बता देने की बात कहते हैं। जिनके पास स्टाक है, वह ज्यादा परेशान हैं। बीना मेडिकल एजेंसीज के संचालक नाहर सिंह के अनुसार कोरोना काल में औषधि निरीक्षक की प्रेरणा पर उन्होंने भी फेवीफ्लू 800 (फेविपिराविर का एक ब्रांड) का स्टॉक कोरोना मरीजों के लिए मंगाया था। उस समय कंपनी ने माल वापसी न होने का कुछ नहीं बताया था, लेकिन बाद में माल वापिस न होने का लेटर भेज दिया है। उनके अकेले के पास ही करीब पौने दो लाख रुपये की फेवीफ्लू पड़ी है। ऐसे मेडिकल स्टोर संचालकों की संख्या भी काफी है।

-यह सही है, कि कोरोना मरीजों की संख्या में कमी से बिक्री अचानक गिरने से कैमिस्टों पर स्टॉक डंप भी हुए हैं। कुछ दवाएं तो बिकती रहती हैं और वापस भी हो जाती हैं। फेवीफ्लू की कंपनी की माल वापिस न लेने की पहले से पॉलिसी है, हालांकि इस बारे में कंपनी से बात चल रही है। संभावित तीसरी लहर से निपटने को भी दवाओं की जरूरत पड़ेगी।

आशुतोष मिश्रा, जिला औषधि निरीक्षक बिजनौर

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