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13 साल की अदालती लड़ाई के मुश्किल दौर में विधायक मनोज पारस

प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री एवं सपा के नगीना सीट से विधायक मनोज पारस आखिरकार अदालती लड़ाई के मुश्किल दौर में हैं। विशेष कोर्ट में सरेंडर करने पर उन्हें जेल भेज दिया गया।

इससे पूर्व बीती 23 अप्रैल को महिला से सामुहिक दुष्कर्म के आरोपी पूर्व मंत्री व सपा विधायक मनोज पारस की ओर से संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र को हाइकोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया था। गौरतलब है, कि विधायक मनोज पारस व अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत मिलने के रास्ते बीती 23 अप्रैल 2019 को ही बंद हो गए थे, जबकि इलाहाबाद हाइकोर्ट के जस्टिस राजबीर सिंह ने जनपद बिजनौर थाना नगीना के एक गांव निवासी एक महिला से राशन की दुकान का कोटा दिलाने के बहाने गैंगरेप के मामले में आरोपी समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री व नगीना के सपा विधायक मनोज पारस द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत गेंगरेप के मुकदमे को खत्म करने की याचिका को खारिज कर दिया था। वहीं 13 साल से इंसाफ की आस लगाए बैठी महिला को इंसाफ की आस जगी थी। हाईकोर्ट ने मनोज पारस के वकीलों की दलीलों को पूरी तरह खारिज करके संविधान की धारा 226 के तहत की गई याचिका को बीती 23 अप्रैल को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा था, कि याचिकाकर्ताओ के विरुद्ध आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है और उसका संज्ञान भी लिया जा चुका है। आरोपियों/याचिकाकर्ताओं के गैर जमानती वारंट जारी थे।यह था मामलानगीना थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, कि मनोज पारस व अन्य आरोपियों ने 13 जन 2007 को सरकारी कोटे की राशन की दुकान दिलाने के नाम पर उसे घर बुलाया था, जहां उसके साथ दुराचार किया गया था।

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  • Web Title: Manoj Paras in the difficult phase of 13 years of court battle