Manoj Paras bail from Nainital High Court - मनोज पारस को नैनीताल हाईकोर्ट से जमानत DA Image

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मनोज पारस को नैनीताल हाईकोर्ट से जमानत

मनोज पारस को नैनीताल हाईकोर्ट से जमानत

नैनीताल हाईकोर्ट ने नगीना विधायक मनोज पारस की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। विधायक पर 2013 में बिजनौर के जिला पंचायत उपचुनाव के दौरान ऋषिकेश के लक्ष्मणझूला स्थित एक रिजॉर्ट में ठहरे जिला पंचायत सदस्यों को जबरन उठाकर ले जाने का आरोप था। न्यायमयूर्ति मनोज तिवारी की अवकाशकालीन एकलपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई कर जमानत याचिका मंजूर की।

बिजनौर में जनवरी 2013 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव होना था। इस दौरान कुछ जिला पंचायत सदस्य ऋषिकेश के रिजॉर्ट में पहुंचे थे। बिजनौर निवासी रोहित कुमार ने लक्ष्मण झूला ऋषिकेश थाने में कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें विधायक मनोज पारस भी शामिल थे। इस चुनाव में सपा की नसरीन सैफी विजयी रही थीं। इधर इस मामले को हरीश रावत सरकार ने 2015 में वापस ले लिया था, लेकिन विपक्षी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के निर्दलीय उम्मीदवार विजयवीरी के पति छतरपाल ने इसको नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 2016 में हाईकोर्ट ने दोबारा से मामले में पुलिस कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके बाद नगीना विधायक मनोज पारस ने 14 नवंबर 2017 को पौड़ी कोर्ट में सरेंडर किया था। अदालत के आदेश पर वर्तमान में वह पौड़ी जेल में बंद हैं। मामले में सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने प्रथमदृष्ट्या आरोप साबित नहीं होने के तर्क पर विधायक की जमानत अर्जी मंजूर कर दी है।

जिपं सदस्यों के अपहरण के सभी आरोपी कोर्ट से जमानत पर

मंगलवार को नगीना विधायक मनोज पारस को नैनीताल हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। मंगलवार को ही उन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया था।

14 नवंबर को को नगीना (सुरक्षित) विस सीट से सपा विधायक मनोज पारस ने पौड़ी में सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया था। जहां से उनको जेल भेज दिया गया था। 2013 में ऋषिकेश के लक्ष्मणझूला थानाक्षेत्र स्थित एक होटल से 18 जिपं सदस्यों समेत 30 लोगों के अपहरण के इस मामले में कार्यवाही को लेकर खूब रस्साकशी हुई। इस मामले में तीन रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। तीनों रिपोर्ट को एक कर जांच की गई। उत्तराखंड की कांग्रेस की सरकार ने मुकदमे को वापस लेना तय किया। उत्तराखंड सरकार की ओर से इस बारे में पौड़ी गढ़वाल जिला जज कोर्ट में रिपोर्ट भेजी गई, जिसके आधार पर 06 जून 2016 को जिला जज पौड़ी गढ़वाल कोर्ट ने मुकदमा वापस कर दिया था। इस फैसले को छतर सिंह ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मुकदमा ट्रायल पर लाने के आदेश दिए। मामले में सुनवाई कछुवा गति से होती रही। 18 मार्च 2017 को उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत और 19 मार्च 2017 को यूपी में योगी आदित्यनाथ के बनने के बाद कार्रवाई में अचानक तेजी आई।

कोट में पेश नहीं होने पर आरोपियों के खिलाफ 20 मार्च 2017 को एनबीडब्ल्यू जारी कर दिए गए। 23 मार्च 2017 को उत्तराखंड पुलिस ने मूलचंद चौहान के नौरंगाबाद स्थित आवास पर छापा मारा। 24 मार्च को उत्तराखंड पुलिस ने चांदपुर चेयरपर्सन के पति शेरबाज पठान को चांदपुर से गिरफ्तार किया। बाद में दवाब बढ़ता देखकर मूलचंद चौहान, अमित प्रताप चौहान, राशिद हुसैन और कपिल गुर्जर ने पौड़ी कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जहां से उनको जेल भेज दिया गया था। बाद में उनको हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। बाद में पूर्व सांसद यशवीर सिंह और रफी सैफी ने कोर्ट के समक्ष सरेंडर कर जमानत पर बाहर आ चुके थे। इसके बाद दवाब बढ़ता देखकर नगीना विधायक मनोज पारस ने 14 नवंबर को पौड़ी कोर्ट में सरेंडर किया था। जहां से उनको जेल भेज दिया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मंगलवार को उनकी जमानत याचिका नैनीताल हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली।

हाईप्रोफाइल मामले में इनके खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट

इनके खिलाफ हुई थी रिपोर्ट

नाम उस समय पद

मूलचंद चौहान पर्यटन राज्यमंत्री, यूपी सरकार

मनोज पारस स्टांप एवं न्यायालय शुल्क, पंजीयन व नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री, यूपी सरकार

यशवीर सिंह सांसद, नगीना लोकसभा क्षेत्र

राशिद हुसैन जिला अध्यक्ष बिजनौर, सपा

शेरबाज पठान सपा नेता

अमित प्रताप मूलचंद चौहान के बेटे और सपा नेता वर्तमान में डीसीबी बिजनौर चेयरमैन

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