
मुफीद साबित हो रहा गुलदार के लिए गन्ना, जिले में तेजी से बढ़ कुनबा
Bijnor News - जिले में गुलदार का आतंक बढ़ता जा रहा है। गन्ने की फसल गुलदारों के लिए सुरक्षित आशियाना बन गई है। वन विभाग ने 1 जनवरी 2025 से अब तक 36 गुलदार और शावकों का रेस्क्यू किया है। हालांकि, गुलदार की संख्या में कमी नहीं आई है, जिससे ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
जिले में गुलदार आतंक का पर्याय बन गया है। जिले में गुलदार के लिए गन्ने की फसल मुफीद साबित हो रहा है। जिले में पिछले सालों में गुलदार का कुनबा तेजी से बढ़ा है। 1 जनवरी 2025 से अब तक वन विभाग के अधिकारियों ने करीब 36 गुलदार और शावक का रेस्क्यू किया है। आए दिन अलग-अलग वन रेंज में गुलदार पिंजरों में फंस रहे हैं। बावजूद इसके गुलदार का आतंक कम नहीं हो रहा है। जिले में वन क्षेत्रों से आकर गुलदार ने गन्ने की फसल को अपना आशियाना बना लिया है। 12 से 14 फिट ऊंचे गन्ने के खेत गुलदारों को पर्याप्त भोजना के साथ संरक्षण भी दे रहे हैं।
गन्ने के खेतों में गुलदार अपना कुनबा भी बढ़ा रहा है। जिले में करीब 2 लाख 55 हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल है। जिधर देखों गन्ने का समु्रंद है। गुलदार शिकार करने के बाद गन्ने के खेत में चला जाता है। पिछले सालों में जिले में गुलदार का कुनबा बढ़ा है। जिले में करीब 440 से अधिक गुलदार गन्ने के खेतों में घूम रहे हैं। 1 जनवरी 2025 से आज तक वन विभाग के अधिकारियों ने 36 गुलदार और शावकों का सफल रेस्क्यू किया है। नर गुलदार हो या मादा गुलदार आए दिन वन विभाग के अधिकारियों द्वारा गांवों में लगाए गए पिंजरों में फंस रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी पिंजरों में पकडे़ गए गुलदारों को दूसरे जिलों के चिड़ियाघरों में अवमुक्त कर रहे हैं। जिले में गुलदार का आतंक कब कम होगा यह कहना मुश्किल है? बतादें कि जिले में वन विभाग के अधिकारी अब तक करीब 100 से अधिक गुलदारों को रेस्क्यू कर चिड़ियाघर भेज चुके हैं। वहीं पिछले तीन वर्षो में करीब 60 से अधिक गुलदारों की मौत हो चुकी है। सड़क दुर्घटना, बीमारी और प्राकृतिक मौत हुई है। इतना सबकुछ होने के बावजूद भी जिले में गुलदार की संख्या में गिरावट नहीं हो रही है। ------------- 1 जनवरी 2025 से आज तक करीब 36 गुलदार व शावकों को रेस्क्यू कर किया गया अवमुक्त तारीख रेंज गांव वन्य जीव 6 जनवरी चांदपुर कराल गुलदार शावक 10 जनवरी चांदपुर हैजरपुर दो गुलदार शावक 14 जनवरी बिजनौर मुबारकपुर तालन दो गुलदार शावक 30 जनवरी बिजनौर औरंगाबाद उर्फ गीदडपुरा गुलदार शावक 17 मार्च चांदपुर लतीफपुर चुखेड़ी दो गुलदार शावक 18 मार्च चांदपुर खैरपुर नर गुलदार 26 मार्च नगीना अब्दीपुर हरवंश मादा गुलदार 2 अप्रैल बिजनौर गोपालपुर शावक 21 अप्रैल नगीना खिजरपुर नर गुलदार 21 अप्रैल धामपुर मुड़ाखेड़ी नर गुलदार 10 मई नगीना मलकपुर डेयरी शावक 10 मई बिजनौर इनामपुरा गुलदार 11 मई चाांदपुर पोटा नर गुलदार 15 मई नजीबाबाद जीवनपुर गुलदार शावक 29 मई नगीना भाहजादपुर नर गुलदार 7 जून नगीना भाहजादपुर नर गुलदार 17 जुलाई नगीना रायपुर सादात नर गुलदार 22 जुलाई चांदपुर पिलाना गुलदार 27 जुलाई धामपुर केशोपुर गुलदार 29 जुलाई बिजनौर मौजमपुर सुजान गुलदार 29 जुलाई धामपुर केशोपुर नर गुलदार 24 अगस्त नगीना तुख्मापुर हरवंश मादा गुलदार 15 सितम्बर नजीबाबाद महावतपुर बिल्लोच गुलदार 4 अक्टूबर नगीना बेगमपुर चायमल गुलदार 13 अक्टूबर नगीना नाबका गुलदार 26 अक्टूबर नगीना मुरलीवाला गुलदार 28 अक्टूबर बिजनौर मौजमपुर सुजान गुलदार 13 नवम्बर नजीबाबाद मौचीपुरा गुलदार 1 दिसम्बर नजीबाबाद धनसिनी मादा गुलदार 6 दिसम्बर चांदपुर बाखराबाद खटाई गुलदार 6 दिसम्बर नगीना बगाला शावक 8 दिसम्बर चांदपुर बाखराबाद खटाई नर गुलदार 9 दिसम्बर नगीना बघाला गुलदार नोट: यह आंकड़ा डीएफओ बिजनौर के मुताबिक है। ------------------ वर्जन.. गुलदार को गन्ने की फसल में छिपने का ठिकाना मिल रहा है। 1 जनवरी 2025 से अब तक करीब 36 गुलदार और शावकों का रेस्क्यू किया गया है। गुलदार लगातार पिंजरे लगाकर पकडे़ जा रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर ग्राम पंचायतों में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जा रहे हैं। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि ग्रामीणों को गुलदार की समस्या से निजात दिलाई जाए। ग्रामीण भी वन विभाग की एडवाइजरी का पालन करें। - जय सिंह कुशवाहा, डीएफओ बिजनौर।

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