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2 जनवरी, 2021|4:37|IST

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आठ साल से गायब अपने ही मुंशी को नहीं तलाश पाई खाकी

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महिला थाने में तैनात मुंशी अवधेश को लापता हुए आज आठ साल हो गए। उसे ढूंढने में थाना पुलिस व क्राइम ब्रांच से लेकर एसटीएफ तक ने हाथ-पैर मार लिये, लेकिन नतीजा सिफर है।

2 जनवरी 2013 को महिला थाने में मुंशी के पद पर तैनात कांस्टेबिल अवधेश अपने कमरे से बिना किसी को कुछ बताए रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। शुरू में महिला थाना प्रभारी की ओर से उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। पांच दिन बाद अवधेश की मां ऊषा देवी पत्नी मुनेशपाल निवासी मूंढ़ा पांडे की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गयी थी। रिपोर्ट के अनुसार उसका पुत्र अवधेश महिला थाना बिजनौर में कांस्टेबिल के पद पर तैनात था। अवधेश मोहल्ला जाटान में मुकुटमणि खन्ना के आवास में कमरा किराए पर लेकर रहता था। कमरे पर उसका साथी सिपाही प्रमोद कुमार भी रहता था। 2 जनवरी की दोपहर 1 बजे उनकी फोन पर अवधेश से बात हुई। उसके बाद रात्रि में फोन पर बात करने की कोशिश करने पर उसका मोबाइल स्विच ऑफ आया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद थाने के विवेचक अवधेश का सुराग लगाने में नाकाम रहे। जांच क्राइम ब्रांच की इन्वेस्टीगेशन विंग के हवाले हो गई। यहां भी कईं विवेचक बदल गए। एसटीएफ के शैलेष तोमर ने भी जांच की, लेकिन आज भी लापता कांस्टेबिल अवधेश की गुत्थी अनसुलझी है। अवधेश का पिता मुनेशपाल भी पुलिसकर्मी है। उसके एक बेटे की पहले ही हादसे में मृत्यु हो चुकी है। अब यही एकमात्र सहारा था।

इन-इन पहलुओं पर हुई जांच

बिजनौर। थाना, क्राइम ब्रांच, एसटीएफ तीनों स्तर पर अवधेश के केस की जांच हुई। ‘हिन्दुस्तान ने नाम न छापने की शर्त पर अलग-अलग विवेचकों से जानकारी जुटाई तो मालूम हुआ, कि अवधेश से जुड़े हर पहलू पर जांच हुई। अवधेश के मोबाइल भी कमरे पर रखे मिले, उसकी बाइक भी वहीं थी। अवधेश की जिस लड़की से शादी होने वाली थी, उसकी व उसके परिवार की काल डिटेल निकलवाई गई। अवधेश के अपने परिजनों की कॉल डिटेल निकलवाई गई। एक ऐसी रिश्तेदार युवती की भी डिटेल निकलवाई गई, जिससे अवधेश अक्सर बात करता था। सबसे पूछताछ भी हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

साथी सिपाही ने किया था नारको टेस्ट से इंकार

बिजनौर। विवेचकों के अनुसार अवधेश के साथ उसके कमरे पर रहने वाले साथी सिपाही प्रमोद का बयान है, कि उसने 2 जनवरी को दोपहर दो बजे तक अवधेश को कमरे पर देखा था, उसके बाद उसका कुछ नहीं पता। इससे ज्यादा जानकारी प्रमोद ने किसी विवेचक को नहीं दी। किन्हीं कारणों से वह साइलेंट है। तत्कालीन एएसपी सिटी कल्पना सक्सेना के समय में सिपाही प्रमोद के पॉलीग्राफिक टेस्ट की अनुमति भी हो गयी थी, लेकिन प्रमोद ने नारको टेस्ट से इनकार कर दिया था। नियमानुसार इच्छा के विरुद्ध नारको टेस्ट नहीं कराया जा सकता।

महिला थाने के उक्त लापता सिपाही का प्रकरण पुराना मामला होने के कारण संज्ञान में नहीं है। इसमें पता किया जाएगा, कि विवेचनाओं में क्या-क्या हुआ।

डा. धर्मवीर सिंह

पुलिस अधीक्षक, बिजनौर

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