अयातुल्ला खामेनेई की शहादत पर शिया समाज में गम और गुस्सा

Mar 01, 2026 11:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिजनौर
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Bijnor News - ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत की खबर से मेमन सादात गांव के शिया समुदाय में शोक का माहौल है। शोक मजलिस का आयोजन कर उनके लिए दुआ की गई। मौलाना शेली अली ने उनके धार्मिक नेतृत्व पर प्रकाश डाला। गांव में काले अलम लगाए गए हैं और 40 दिन का शोक मनाया जाएगा।

अयातुल्ला खामेनेई की शहादत पर शिया समाज में गम और गुस्सा

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत की खबर के बाद जिले के शिया समाज में गहरा शोक व्याप्त है। किरतपुर क्षेत्र के शिया बाहुल्य गांव मेमन सादात में उनके शहीद होने की खबर से गम व गुस्से की लहर दौड़ गई। उनके इंतकाल पर इमामबाड़ा में शोक मजलिस का आयोजित कर उनके लिए मगफिरत की दुआ मांगी गई। रविवार को किरतपुर के गांव मेमन सादात इमामबाड़ा पर मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें मौलाना शेली अली ने खामेनेई के जीवन और उनके धार्मिक नेतृत्व पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि खामेनेई ने पूरी दुनिया में शिया समुदाय के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने अपने मुल्क और इस्लाम के लिए खुद व परिवार को कुर्बान कर दिया, लेकिन अमेरिका और इजराइल के आगे घुटने ठेकना मंजूर नहीं किया। अयातुल्ला अली खामेनेई मौला अली के खानदान से थे। मौला अली की शहादत 21 रमजान को हुई थी और अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत 11 रमजान को हुई है। मजलिस में मौजूद लोगों ने नम आंखों से उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया। मजलिस में मौलाना अकबर, मौलाना अम्मार, रियाज जैदी, इसरार जैदी, साबिर रजा, कारी जुल्फिकार, अस्करी, खुर्शीद असरी, मास्टर फैज, असद अब्बास, मनव्वर जैदी सहित काफी संख्या में महिलाए भी शामिल हुई। घरों और इमामबाड़ों पर काले अलम गांव मेमन सादात में कई घरों और इमामबाड़ों पर शोक के प्रतीक स्वरूप काले अलम लगाए गए। पूरे गांव में गमगीन माहौल देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह उनके प्रति सम्मान और दुख प्रकट करने का पारंपरिक तरीका है। रियाज जैदी ने कहा कि हमारे लिए यह बहुत बड़ा सदमा है। उन्होंने उम्मत की रहनुमाई की, आज हम उनके लिए दुआ कर रहे हैं। मगफिरत की दुआ और 40 दिन का शोक मजलिस में शहीद अयातुल्ला अली खामेनेई की मगफिरत के लिए सामूहिक दुआ की गई। सैकड़ों लोगों ने हाथ उठाकर उनकी रूह की शांति के लिए प्रार्थना की। मेमन सादात में 40 दिनों तक शोक मनाया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन मजलिस और दुआ का सिलसिला जारी रहेगा।

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