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22 जनवरी, 2021|11:45|IST

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सजना है मुझे सजना के लिए

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सजना है मुझे सजना के लिए, जरा उलझी लटें संवार लू, हर अंग का रंग निखार लू... जैसे गाने के बोल ना सिर्फ उस समय नगर के प्रमुख बाजारों में गूंज रहे थे बल्कि सुहागिनों की जुबान से भी बरबस ही निकल रहे थे जिस समय महिलाओं की भारी भीड़ खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ रही थी।

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पती-पत्नी के अटूट जन्म जनमांतरों के पवित्र रिश्ते का प्रतीक करवाचौथ के प्रमुख त्यौहार पर खरीदारी के लिए मंगलवार को बाजारों में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कपड़ों और कॉस्मेटिक की दुकानों पर सुबह बाजार खुलते ही एक बार जो महिलाओं की भीड़ उमड़ने का सिलसिला शुरु हुआ उसने देर रात तक थमने का नाम नहीं लिया। अपनी पसंद की त्यौहारों पर बाजारों में उपलब्ध परंपरागत साड़ियां और कॉस्मेटिक की दुकानों पर सजी रंग-बिरंगी चूड़िया, मंहंदी और लिपिस्टिक के साथ श्रंगार का सामान खरीद रही महिलाओं का उत्साह देखते ही बना। राज टंडन गोल्डी, राकेश जैटली, अनन्त अग्रवाल, नरेश शर्मा व मौ.सलीम आदि कपड़ों और कॉस्मेटिक विक्रेताओं ने बताया कि दो दिनों से करवाचौथ के लिए जरूरी सामान खरीदने के लिए उमड़ने वाली महिलाओं की भीड़ का सिलसिला देर रात तक नहीं थम रहा। उधर, अनु शर्मा, नीलम, राधा अग्रवाल, दीपा मित्तल व अनीता शर्मा आदि बाजारों में खरीदारी के निकली सुहागिन महिलाओं ने बताया कि साल भर के इस त्यौहार में पति को रिझाने के लिए खरीदारी करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहती।

आभूषणों का ठंडा ही रहा व्यापार

हर वर्ष की तरह करवाचौथ पर सर्राफा व्यापारियों की दुकानों पर इस बार महिलाओं की ज्यादा भीड़ नहीं उमड़ी। अब इसे कोरोना का खौफ कहे या महंगाई की मार, हर वर्ष करवाचौथ पर करोड़ों का कारोबार करने वाले व्यापारी इस बार ग्राहकों की बाट जोहते ही नजर आए। संदीप तायल, कल्पेंद्र वर्मा, बिट्टू शर्मा, आशाीष शर्मा व दीपक वर्मा आदि सर्राफा व्यापारियों ने बताया कि गत वर्ष करवाचौथ पर करोड़ों का आकड़ा पार कर लेने वाला सर्राफा बाजार इस बार गत वर्ष का आधा कारोबार भी नहीं कर पाया।

त्यौहार पर उपवासी सुहागिनें ना करें कोई चूक

नगर के जाने माने पंडित हर्षवर्धन बूंटी बताते है कि इस बार करवाचौथ पर शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 5.29 बजे से 6.48 तक रहेगा। चंद्रोदय का समय रात 8.16 का माना गया है। शुभ महूर्त में करवा चौथ व्रत कथा सुनकर भगवान श्री गणेश और करवों का पूजन कर चंद्रोदय के बाद आघ्र्य समर्पित कर उपवासी महिलाएं घर में बने सामान से भोग लगाने के बाद व्रत खोल सकती हैं। दिन भर उपवासी महिलाएं संयम में रहते हुए सिलाई कढ़ााई का कार्य और कैंची का उपयोग तो बिल्कुल ना करें। ऐसी कोई चूक महिलाओं का व्रत खंडित कर सकती है।