Gangrape not found in the trial of MLA Manoj Paras relief - गैंगरेप के मुकदमें में नहीं मिली विधायक मनोज पारस को राहत DA Image

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गैंगरेप के मुकदमें में नहीं मिली विधायक मनोज पारस को राहत

दलित महिला से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी पूर्व मंत्री व सपा विधायक मनोज पारस की ओर से संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र को हाइकोर्ट द्वारा खारिज कर दिया है। इससे विधायक मनोज पारस व अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत मिलने के रास्ते बंद हो गए हैं।

इलाहाबाद हाइकोर्ट के जस्टिस राजबीर सिंह ने जनपद बिजनौर थाना नगीना के एक गांव निवासी एक दलित महिला से राशन की दुकान का कोटा दिलाने के बहाने गैंगरेप के मामले में आरोपी समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री व नगीना के सपा विधायक मनोज पारस द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत गेंगरेप के मुकदमे को खत्म करने की याचिका को खारिज कर दिया है। वहीं 13 साल से इंसाफ की आस लगाए दलित महिला को अब इंसाफ की आस जगी है। हाईकोर्ट ने मनोज पारस के वकीलों की दलीलों को पूरी तरह खारिज करके संविधान की धारा 226 के तहत की गई याचिका को बीती 23 अप्रैल को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है, कि याचिकाकर्ताओ के विरुद्ध आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है और उसका संज्ञान भी लिया जा चुका है। आरोपियों/याचिकाकर्ताओं के गैर जमानती वारंट जारी है और उनमें 82 सीआरपीसी यानी फरारी की उद्घोषणा की प्रक्रिया जारी है इस कारण संविधान के अनुच्छेद के तहत कार्रवाही को रद्द करने का मामला ही नहीं बनता है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 226 की शक्ति का उपयोग पुलिस द्वारा जांच के दौरान ही किया जा सकता है।

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  • Web Title: Gangrape not found in the trial of MLA Manoj Paras relief