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नाव हादसा:::गंगा मैय्या ने दिया जीवनदान, करीब से देखी मौत

नाव हादसा:::गंगा मैय्या ने दिया जीवनदान, करीब से देखी मौत

गंगा मैय्या ने जीवनदान दिया है। सोचा नहीं था जान बच जाएगी। पहली बार मौत को करीब से देखा है। कई किलोमीटर तक 20 से 30 फिट पानी में जिंदगी और मौत से जूझे।

कभी पानी में देख रहे थे तो कभी आसमान की ओर। आखिरकार जिंदगी बच गई। यह कहना था नाव पलटने के बाद कई किलोमीटर तक बहकर गंगा से बाहर आए सूबे सिंह और रामवती का। गांव रघुनाथ पुर निवासी सूबे सिंह और डैबलगढ़ निवासी रामवती भी उस मौत की किश्ती में सवार थे जो गंगा की तेज पटार का सामना न कर डूब गई। कुछ लोगों को तो बचा लिया गया, लेकिन कुछ ग्रामीण काल के गाल में समा गए। सूबे सिंह और रामवती ने बताया कि पहली बार मौत को करीब से देखा है। उन्होंने बताया कि चारा लेकर लौटते समय गंगा में पानी तेज हो गया। नाव गंगा की तेज पटार का सामना न कर पाई और अनियंत्रित हो गई। काफी दूर तक नाव पानी में बहने लगी और बाद में डूब गई। सब पानी में जा गिरे। एक बार तो आंखों के सामने अंधेरा छा गया। जैसे ही आंख खुली तो घास की गठरी हाथ में थी। नापा तो नहीं लेकिन करीब 20 से 30 फिट गहरा पानी होगा। गंगा के तेज बहाव में तेजी से सभी बह रहे थे। हर कोई बचने के लिए शोर मचा रहा था। कुछ दूर के बाद आवाज बंद हो गई। काफी दूर निकलने के बाद देखा तो अकेले ही गंगा में बहे जा रहे थे। आसपास कोई मदद नहीं दिख रही थी। जीने की आस लगभग छोड़ दी थी। सूबे सिंह और रामवती ने बताया कि सांसे थम रही थी। दूर तक गंगा का पानी दिख रहा था। कभी पानी की ओर तो कभी आसमान की और भगवान से जान बचाने की मिन्नत कर रहे थे। घास को मजबूती से पकड़ रखा था। कई किलोमीटर तक बहने के बाद लोगों की नजर पड़ी और उन्होंने गंगा से बाहर निकाला। सूबे सिंह और रामवती ने बताया कि गंगा मैय्या ने जीवन दान दिया है। यह जीवन अब गंगा मैय्या का है। सोचा नहीं था जान बच जाएगी। :::::::::::::::::::कई आंखें देख रही थी गंगा की ओर, नहीं लौटे थे लाडलेगंगा की लहरों से न जाने कितने जीवन रोज पेट की खातिर जूझते हैं। छोटे बच्चे भी पशुओं के लिए घास लेने के लिए गंगा पार जाते हैं। रावली तटबंध पर करीब चार बजे जरीना, भगवती, जमीला, भूरो गंगा के पार देख रही थी। उनकी आंखों में उदासी थी। पता चला कि उनके बच्चे गंगा के पार पशुओं का चारा लेने गए है। उन्होंने बताया कि सुबह अफजाल, हिमांशु, गुड्डु, सत्यवीर, सुक्के, तारा, सलीम गंगा पार करके पशुओं का चारा लेने गए है। दूर तक गंगा में कुछ नहीं दिख रहा था। उदास बैठी महिलाओं ने बताया कि पेट की खातिर रोज बच्चे पशुओं का चारा लेने के लिए गंगा के पार जाते है। कहा था कि जल्दी आ जाना लेकिन अभी तक बच्चे नहीं आए। महिलाओं ने कहा कि नाव पलटने की सूचना से पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई थी। प्रतिदिन पशुओं का चारा लेने के लिए बच्चों को गंगा पार जाना पड़ता है।

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  • Web Title:Ganga Mayya gave life, near death