
उस दिन बताया असिस्टेंट, अब पहचानने से ही किया इनकार
Bijnor News - जिला अस्पताल के ओपीडी में फर्जी डॉक्टर द्वारा डा. तुषार की मोहर लगाकर मरीजों को दवाइयां लिखने का मामला सामने आया है। मेडिकल कालेज प्रिंसिपल ने जांच समिति गठित की है। डा. तुषार ने फर्जी डॉक्टर को पहचानने से इनकार किया, जबकि वायरल वीडियो में उन्होंने उसे अपना असिस्टेंट बताया था।
जिला अस्पताल के ओपीडी में फर्जी डॉक्टर द्वारा डा. तुषार की मोहर लगाकर मरीजों को दवाइयां लिखने के प्रकरण में मेडिकल कालेज प्रिंसिपल की ओर से गठित टीम ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को तीन चिकित्सकों व दो फार्मेसिस्टों के बयान हुए। उस दिन दूसरे डॉक्टर से फोन पर कथित फर्जी डॉक्टर को अपना असिस्टेंट दिनेश बताने वाले डा. तुषार ने बयानों में आज उसे पहचानने से ही इनकार कर दिया। गौरतलब है कि मेडिकल कालेज से सम्बद्ध जिला अस्पताल में बीते शुक्रवार सुबह फार्मेसी स्टाफ ने कक्ष संख्या 25 टीबी एंड चेस्ट ओपीडी में एक कथित फर्जी चिकित्सक को सहायक आचार्य डा. तुषार सिंह की मोहर लगाकर गंभीर मरीजों को दवाइयां लिखते पाया था।
उस समय डा. तुषार मौजूद नहीं थे। शोर पर पहुंचे वरिष्ठ परामर्शदाता डा. राजीव रस्तोगी ने फोन कर डा. तुषार से फोन कर पूछा तो उन्होंने उसे उस समय अपना असिस्टेंट दिनेश बताया था, हालांकि बाद में मीडिया को दिए बयान में डा. तुषार इससे मुकर गए थे। डा. तुषार को इस दौरान निलम्बित किया जा चुका है। मामले में जहां डीएम जसजीत कौर ने सीएमओ व एडीएम प्रशासन को नामित करते हुए जांच सौंपी है, वहीं मेडिकल कालेज प्रिंसिपल डा. उर्मिला कार्या की ओर से अलग तीन सदस्यीय समिति जांच के लिए गठित की है। इसमें जिला अस्पताल के सीएमएस डा. बीआर त्यागी, डा. रजनीश शर्मा व डा. विजयंत को रखा गया है। जांच समिति ने बुधवार को डा. राजीव रस्तोगी, चीफ फार्मेसिस्ट राजेश रवि व आनन्द प्रकाश तथा सहायक आचार्य डा. तुषार सिंह व डा. अभिषेक चौधरी के बयान लिए। समिति सदस्यों के समक्ष डा. तुषार सिंह ने उक्त फर्जी डॉक्टर को जानने-पहचानने से ही इंकार कर दिया। इसे लेकर हर कोई हैरत में है, क्योंकि वायरल वीडियो में फोन पर डा. तुषार को डा. राजीव से वार्ता में उक्त व्यक्ति को अपना असिस्टेंट बताते हुए स्पष्ट सुना जा रहा है और काफी पूछने के बाद डा. तुषार ने उसका नाम दिनेश बताया भी था। सूत्रों का कहना है, कि पूरा खेल जिला अस्पताल आने वाले मरीजों में से निजी अस्पताल के लिए मरीज फुसलाकर ले जाने का है, ताकि मोटी रकम बनाई जा सके। ऐसे में अस्पताल स्टाफ का मानना है, कि उक्त दिनेश के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने व सख्ती से पुलिस की जांच होने पर ही असलियत सामने आ सकती है। वर्जन... समिति ने जांच शुरू कर दी है। डा. तुषार सिंह समेत आज बुधवार को पांच के बयान हुए हैं। कुछ बयान शुक्रवार को होंगे। जांच पूरी होने से पहले अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। - डा. बीआर त्यागी, सीएमएस, जिला अस्पताल, बिजनौर

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