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कालागढ की जमीन खाली करके कार्बेट प्रशासन को सौंपने की कवायद

कालागढ की जमीन खाली करके कार्बेट प्रशासन को सौंपने की कवायद

प्रशासन ने कालागढ़ की आवासीय भूमि कॉर्बेट प्रशासन को हस्तांतरित करने की कवायद शुरू कर दी है। इस मुद्दे को लेकर डीएम ने संयुक्त विभागीय बैठक कर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

मंगलवार को एरेक्टर हॉस्टल के सभागार में डीएम पौड़ी ने बैठक में मुख्य सड़क की उत्तर दिशा में मौजूद पीएचसी, भारतीय स्टेट बैंक, डाकघर, यूजेवीएनएल, गैस आफिस तथा उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के बिजलीघर सहित विभिन्न विभागों के कार्यालयों को सड़क की दक्षिण दिशा में स्थानांतरित करने की प्रगति समीक्षा की। डीएम सुशील कुमार ने एनजीटी के आदेशों का अनुपालन कारने का हवाला देते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों से बुधवार तक अपने कार्यालय अस्थायी तौर पर सड़क की दक्षिण दिशा में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एनजीटी के आदेशों के तहत कालागढ़ के भवनों और आवासों को ध्वस्त करके खाली जमीन वन विभाग को हस्तांतरित होनी है। उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई एक-दो दिन में शुरू की जा सकती है। बैठक में बताया कि एनजीटी द्वारा कालागढ़ स्थित आवासीय तथा अनावासीय भवनों को ध्वस्त करके खाली भूमि कार्बेट प्रशासन को सौंपने की 21 सितंबर 2018 निर्धारित की गयी थी। इसके चलते प्रशासन 21 सितंबर से पहले ध्वस्तीकरण करके 24 सितंबर को एनजीटी के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जानी है। बैठक के दौरान जबरन बेदखली करने का निर्णय लेने के बाद बीते पांच दशक से यहां निवास कर रहे एक हजार से अधिक परिवारों के ऊपर एक बार फिर बेदखली का खतरा मंडराने लगा है। बैठक में डीएम पौडी सुशील कुमार तथा एसडीएम कोटद्वार कमलेश मेहता के अलावा एसडीओ सीटीआर आरके तिवारी, विद्युत वितरण खण्ड कोटद्वार के एक्सईएन रघुराज सिंह, सिंचाई विभाग के एई मनोज लिखवार तथा किशोर कुमार बीएसएनएल जेटीटी वेद सिंह, पीएचसी प्रभारी देवेन्द्र प्रसाद, एसबीआई के शाखा प्रबंधक पीयूष आहूजा तथा डाकपाल लक्ष्मी नारायण पाल सहित यूजेवीएनएल के अधिकारी मौजूद थे। -- याची विश्वनाथ सिंह सहित कालागढ़ में निवासरत अवैध अध्यासियों को विधिक कार्रवाई के तहत बेदखल किया जाए। -सुप्रीम कोर्टक्या कहता है शासनकालागढ सम्बंधी मामले को लेकर बीती 31 अगस्त को देहरादून में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय गया था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विश्वनाथ सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य और अन्य में 3 सितंबर को पारित आदेश के अनुसार अवैध अध्यासन के प्रकरणों में नियमानुसार ही बेदखली की कार्रवाई की जानी चाहिए। अतः उत्तरी भाग में स्थित अवैध अतिक्रमण या अध्यासन संबंधी आवासों अथवा भवनों के स्वामित्व वाले सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सिंचाई विभाग, ऊर्जा विभाग अथवा वन विभाग द्वारा अवैध अध्यासी के विरूद्ध बेदखली हेतु कार्रवाई तत्काल प्रारंभ करते हुये लागू पीपी एक्ट के तहत सक्षम न्यायालय में एक सप्ताह के भीतर वाद दायर किया जाएगा तथा सम्बंधित जिलाधिकारी ऐसे वादों के शीघ्र निस्तारण हेतु शीघ्र आवश्यक अनुश्रवण करेंगे। -- कालागढ़ में निवासरत जिन अवैध अध्यासियों के खिलाफ पीपी एक्ट के तहत दाखिल मुकदमो का निर्णय 2002-2006 के दौरान हो चुका है, उनके खिलाफ दोबारा विधिक कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे अवैध अध्यासियों को 24 घंटे का अल्पकालीन नोटिस जारी करके बलपूर्वक बेदखल किया जाएगा। - सुशील कुमार, डीएम, पौडीफिर लटकी बेदखली की तलवार कालागढ़। प्रशासन द्वारा अचानक उठाए गए इस कदम के बाद यहां के नागरिकों के सिर पर एक बार फिर बेदखली की तलवार लटकती नजर आ रही है। प्रशासन द्वारा अचानक बनाई गई आवासीय भवनों को ध्वस्त करने की रणनीति के चलते बीते छह दशक से यहां निवास कर रहे सैकडों परिवार बेघर हो जाएंगे। इनमें अधिकांश परिवार ऐसे हैं जिनके पास सिर छिपाने के लिये कुछ भी नहीं है।ध्वस्तीकरण को गलत बताया, कार्रवाई रोकने की मांगकालागढ़। अनेक सामाजिक संगठनों ने यहां ध्वस्तीकरण की प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुये उत्तराखंड तथा यूपी के मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव सहित आला अधिकारियों के अलावा तमाम लोगों को पत्र प्रेषित कर यहां प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को पूरी तरह गलत करार दिया है।नागरिक कल्याण परिषद तथा कालागढ़ बचाओ संघर्ष मोरचा द्वारा संयुक्त रूप से प्रेषित पत्र में मा. न्यायालय द्वारा यहां दशकों से निवास कर रहे को पुर्नवासित करने संबंधी आदेश जारी करने का हवाला देते हुए कहा है कि यहां वर्तमान समय में एक हजार से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है सरकार द्वारा मतदाता सूची जैसे सर्व मान्य मानक को दरकिनार कर 11 सौ में से आधे परिवारों को ही पुनर्वास का पात्र माना गया था। कहा गया कि इस सब के बावजूद चिन्हित पात्रों सहित यहां निवास कर रहे सभी परिवारों को बलपूर्वक बेदखल कर सम्बंधित आवासों को ध्वस्त करने की र्ग्रवाई तत्काल अमल में लाने की योजना बनाई गयी है। पत्र में बेदखली अधिनियम का हवाला देते हुये कहा है कि अनाधिकृत निवासियों को सुनवायी का पर्याप्त अवसर दिए बगैर आवास से बेदखल नहीं किया जा सकता। प्रपत्र ख जारी किये बगैर बलपूर्वक बेदखल भी नही किया जा सकेगी। बेदखली संबंधी मामलों की सुनवायी का अधिकार परगना मजिस्टेªट (विहित प्राधिकारी) को है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुये कहा है कि अनाधिकृत निवासियों को बिना उचित नोटिस दिए अथवा कानूनी प्रक्रिया का पालन किये बगैर निष्कासित नहीं जाना चाहिए। पत्र के मुताबिक अनाधिकृत निवासियों से संबंधित मामला मा. न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है तथा न्यायालय द्वारा उत्तराखंड सरकार को अनाधिकृत निवासियों को पुर्नवासित करने संबंधी आदेश भी दिये जा चुके हैं। प्रस्तावित आवासों के ध्वस्तीकरण की कार्यावाही पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गयी है।

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  • Web Title: Drilling of the land of Kalagarh and handing it to the carbet