Death on the door of labor which arrived before official help - सरकारी मदद से पहले पहुंच गई मजदूर के दरवाजे पर मौत DA Image

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सरकारी मदद से पहले पहुंच गई मजदूर के दरवाजे पर मौत

सुस्त सरकारी तंत्र के चलते एक मजदूर के दर पर सरकार की आर्थिक मदद तो नहीं पहुंच पाई, लेकिन समय से पहले मौत ने उसको अपने आगोश में ले लिया। शासन चिट्ठी पत्री में लगा रहा और किसी की जान जाती रही।

प्रशासन को मिले एक पत्र के बाद अन्य ओपचारिकताएं पूर्ण करवाने की जांच रिपोर्ट मांगी गई तो इस बात का खुलासा हुआ।थाना क्षेत्र के गांव सुहागपुर निवासी लगभग 38 वर्षीय सुनील कुमार पुत्र भूदेव सिंह की आर्थिक स्थिति कुछ बेहतर नहीं थी। करीब चार साल से वह गुर्दे के रोग से पीड़ित था। बाद में पता चला कि उसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। परिजनों ने हर संभव मदद की, लेकिन गुरबत और तंगी के चलते वे उसका बड़ा इलाज नहीं करा पाए। उधार आदि लेकर सुनील का इलाज मुरादाबाद कॉसमॉस अस्पताल में चलने लगा। हालांकि, इस बीच परिवार के लोगों ने भूमि और जो कुछ था, उसे बेचकर बेटे की जान बचानी चाही। लेकिन ये सबकुछ बीमारी के आगे कम पड़ गया। ऐसे में वर्ष वर्ष 2017 में सुनील कुमार और उसके परिजनों ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सुनील के इलाज के लिए आर्थिक मदद मुहैया कराए जाने की गुहार लगाई। क्षेत्रीय लेखपाल तारा चंद ने रिपोर्ट बनाई और प्रशासन को मुहैया करा दी। दो अगस्त 2017 को ये रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसके उपरांत 12 सितंबर 2017 को इस पत्र पर शासन ने रिपोर्ट मांगी। इस पत्र के बाद 25 सितंबर को फिर से इस रिपोर्ट पर जवाब आया। तारीखों का ये सिलसिला चलता रहा, लेकिन अनुभाग अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय अनुभाग-5 द्वारा जवाब आया कि कॉसमॉस अस्पताल को अब ये पैसा नहीं दिया जाता है। ये रिपोर्ट लिखकर पत्र को वापस कर दिया गया, लेकिन सुनील ने फिर से मदद के लिए कोशिश की तो माह अगस्त 2018 को प्रशासन ने पुन: रिपोर्ट प्रेषित कर दी। इन सब कागजी कार्रवाई में इतना अधिक समय लग गया कि बीती 2 फरवरी को आर्थिक मदद की बाट जोहते-जोहते सुनील की मौत हो गई। हाल ही में उसकी रिपोर्ट से संबंधित जब ये पत्र एसडीएम धामपुर कार्यालय पहुंचा तो जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि सुनील की मौत हो चुकी है।संभवत: प्राइवेट को पैनल में शामिल नहीं किया होगा: एसडीएमएसडीएम धीरेंद्र सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से गरीबों को आर्थिक मदद दी जाती है। उन्होंने आशंका जताई कि शायद सुनील के मामले में मुरादाबाद के कॉसमॉस अस्पताल को पैनल में शामिल नहीं किया गया होगा। इस कारण ही उसे मदद नहीं मिल पाई हो।

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  • Web Title: Death on the door of labor which arrived before official help