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बिजनौर जिला पंचायत अध्यक्ष: 50 साल में दोबारा किसी के सिर नहीं सजा ताज

अनुज चौधरी,बिजनौर Published By: Yuvraj
Thu, 17 Jun 2021 04:44 PM
बिजनौर जिला पंचायत अध्यक्ष: 50 साल में दोबारा किसी के सिर नहीं सजा ताज

जिला पंचायत अध्यक्ष बिजनौर का ताज ऐसा है, कि बीते 50 सालों में किसी के सिर दोबारा नहीं सजा है। नसरीन सैफी जरूर विश्वासमत हासिल कर दोबारा कुर्सी पर बैठी थी, लेकिन वह भी एक ही कार्यकाल में। इस 50 साल के अरसे की एक खास बात और भी है, कि इस दौरान करीब 15 साल जिला पंचायत की बागडोर लगातार 10 अलग-अलग डीएम के हाथों रही है।

जिला पंचायत में बोर्ड पर अंकित बीते 50 साल के कार्यकालों को देखें तो 23 मार्च 1970 से 7 मई 1970 तक जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यभार तत्कालीन जिलाधिकारी विवेक नारायण चन्ना पर था। इसके बाद 7 नवंबर 1974 तक क्रमश: जिलाधिकारी सुधीर कुमार विस्वास, दौलत राम, भानुप्रताप सिंह व अशरफ अली पर कार्यभार रहा।

8 नवंबर1974 से 7 नवंबर 1974 तक रामपाल सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। 12 अगस्त 1977 से लेकर 3 अप्रैल 92 तक करीब 15 साल तक कोई निर्वाचित अध्यक्ष नहीं था और इस दौरान 10 अलग-अलग जिलाधिकारियों पर अध्यक्ष का कार्यभार रहा। हरिपाल शास्त्री 4 अप्रैल 92 को जिला पंचायत अध्यक्ष बने जो 5 जनवरी 93 तक रहे।

6 जनवरी 93 से 3 जून 94 तक फिर से बागडोर जिलाधिकारियों के हाथों रही। इसी दौरान संविधान में 73वां संशोधन हो चुका था। इसके बाद नियमित रूप से चुनाव होने लगे। 4 जून 1994 से 19 अक्तूबर 97 तक जमील अहमद एडवोकेट अध्यक्ष रहे। फिर राकेश कुमार सिंह एडवोकेट, नामित अध्यक्ष शोभारानी, वीरेन्द्र कुमार, सुशीला पाल, कुंवरानी रुचिवीरा, गायत्री पाराशर, नसरीन सैफी, कुंवर उदयन वीरा, साकेन्द्र प्रताप सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं।

गौर करने लायक बात यह रही, कि इस 50 साल के अरसे में कोई भी दूसरे कार्यकाल में अध्यक्ष नहीं बन पाया है। नसरीन सैफी भी दोबारा विश्वासमत हासिल कर अपने ही कार्यकाल में ही अध्यक्ष बनी थी।


पांच साल का पूरा कार्यकाल सिर्फ सुशीला पाल का
बिजनौर। 50 साल के दौरान अगर 5 साल का पूरा कार्यकाल किसी ने पूरा किया तो वह सुशीला पाल रही हैं। सुशीला पाल 9 अगस्त 2000 से लेकर 8 अक्तूबर 2005 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। कारण चाहे अविश्वास प्रस्ताव के चलते कुर्सी छिनने का रहा हो या कुछ ओर, लेकिन दूसरा कोई कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया।


एक नजर वर्तमान प्रत्याशियों पर
वर्तमान में नजर डालें तो सपा ने नसरीन सैफी को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया है और चरणजीत कौर को प्रत्याशी बनाया है, वहीं भाजपा ने साकेन्द्र प्रताप पर दोबारा दांव खेला है। साकेन्द्र प्रताप उदयन वीरा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद 24 मार्च 2018 को जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए थे।  
 

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