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छठ महापर्व: अस्ताचलगामी सूर्य को अध्र्य देकर संतान की रक्षा का मांगा वरदान

छठ महापर्व: अस्ताचलगामी सूर्य को अध्र्य देकर संतान की रक्षा का मांगा वरदान

संक्षेप:

Bijnor News - बिजनौर में छठ महापर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। व्रती महिलाओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पूजा की। यह पर्व संतान की लंबी उम्र और रक्षा के लिए है। चार दिवसीय महापर्व का समापन मंगलवार को उगते सूर्य को...

Oct 28, 2025 12:00 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिजनौर
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बिजनौर। ‘केलवा के पात पे उगलेन सूरुजमल और छठी मैया के दिहल ललनवा...’ जैसे मधुर लोकगीतों की गूंज के साथ सोमवार को बिजनौर में छठ महापर्व के मुख्य अनुष्ठान में छठी मैया को श्रद्धा से मनाया गया। संतान की लंबी आयु और रक्षा के लिए प्रार्थना करते हुए व्रती महिलाओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य देकर उपासना की। मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा। यह पावन पर्व बिजनौर शुगर मिल की कुटिया कॉलोनी में मनाया गया। छठ पूजा स्थल पर कुटिया कॉलोनी, आवास विकास, नलकूप कॉलोनी तथा आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के परिवारों की महिलाएं एकत्र हुईं।

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किरन देवी श्रीवास्तव, रेनू, बबीता, प्रतिमा पांडेय, सुनीता वर्मा, उर्मिला, सोना, सुमन व पावनी आदि ने छठ पूजा के मंगलगीत गाए और छठ माता की आराधना की। छठ माता को फल, चावल, नारियल, गन्ना, चने, गुड़, नए वस्त्र, धूप और अगरबत्ती समेत विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की। कार्तिक माह की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय त्योहार शुद्धता और कठिन अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। इसकी मुख्य पूजा षष्ठी (छठ) के दिन होती है। छठी मैया की महिमा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठ देवी को सूर्यदेव की बहन माना जाता है। मान्यता है कि जो व्रती छठ माता की पूजा करता है माता उनकी संतानों की रक्षा करती हैं। यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी मनाया जाता है और नि:संतान सुहागिनों की गोद भरने वाला भी माना जाता है। इस दौरान व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। छठ पूजा से एक दिन पहले गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ‘खरना’ खाने के बाद व्रती छठ पूजने के बाद ही कुछ अन्न-जल ग्रहण करती हैं। मंगलवार को सप्तमी के दिन उगते सूर्य को अंतिम अर्घ्य देने के बाद व्रत का विधिवत समापन होगा।