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14 साल का वनवास काटकर बिजनौर के सांसद बने मलूक

14 साल का वनवास काटकर बिजनौर के सांसद बने मलूक

आखिरकार चौदह सालों के बाद मलूक नागर का वनवास खत्म हुआ। लगातार तीन चुनाव हारने के बाद चौथे चुनाव में करीब 70 हजार वोटों के अंतर से जीत का परचम लहराया।

देशभर में चली मोदी की लहर के बाद भी बिजनौर सीट से बसपा प्रत्याशी मलूक नागर ने बीजेपी उम्मीदवार भारतेंद्र सिंह को पटखनी दे दी। गुरुवार को सत्रहवीं लोकसभा के लिए मतगणना हुई तो बिजनौर की सीट बसपा के खाते में चली गई। यहां से बसपा उम्मीदवार मलूक नागर ने करीब 70 हजार वोटों से बीजेपी को हरा दिया। पोस्टल बैलेट को जोड़े जाने से पहले मलूक नागर को 5 लाख 56 हजार 197 वोट मिले, जबकि भाजपा के भारतेन्द्र सिंह 4 लाख 86 हजार 35 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे। गौरतलब है कि मलूक नागर का यह चौथा चुनाव था। मलूक नागर 2004 में रालोद के टिकट पर मेरठ में चुनाव हारे, हालांकि 2004 में मेरठ से रालोद सपा गठबंधन से चुनाव के नतीजों को देखेंगे तो बहुत थोड़े अंतर से जीत रह गयी थी। 2009 में बसपा के झंडे तले मेरठ में फिर दूसरा चुनाव हारे। 2014 के बिजनौर लोकसभा चुनाव में मलूक नागर को फिर से पराजय का सामना करना पड़ा। इस चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो उस समय भी 2 लाख 30 हजार लोगों ने मलूक नागर को पसंद किया था। 2014 के चुनाव में भारतेन्द्र सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 486913 वोट हासिल कर जीत दर्ज कराई थी। वहीं सपा से लड़े शाहनवाज राना 281139 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं बसपा के टिकट पर बिजनौर सीट से मलूक नागर को 230124 वोट मिले थे। 2014 के चुनाव में मोदी लहर के चलते मलूक नागर को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। अबकी बार मलूक नागर ने चुनाव में फतह हासिल कर ली। मलूक नागर की यह जीत पिछले तीन चुनाव हारने के बाद मिली है।

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  • Web Title:Bijnor becomes MP after spending 14 years of exile