बिजनौर पुलिस ने नहीं दी मांगी गई जानकारी, हाई कोर्ट ने यूपी सरकार ने पर लगाया 50 हजार का जुर्माना

प्रयागराज, भाषा
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बिजनौर पुलिस से मांगी गई जानकारी उपलब्ध न कराए जाने में हुई देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार ने 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि जुर्माना दोषी अधिकारियों से वसूली जा सकती है।

Bijnor Police failed to provide requested information allahabad High Court imposed fine 50000 on UP government

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी ओर से मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में बिजनौर के पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के चलते जमानत अर्जी के निपटारे में 10 दिन से अधिक की देरी होने पर यूपी सरकार पर 50,000 रुपये का हर्जाना लगाया है। हालांकि, न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने मंगलवार को दहेज हत्या के कथित मामले में यासीन नामक व्यक्ति और उसकी पत्नी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाए गए फैसले में कहा कि राज्य सरकार जांच के बाद दोषी अधिकारियों से हर्जाने की राशि वसूल सकती है।

पुलिस अधिकारियों के कारण हुई देरी पर नाखुशी जाहिर करते हुए अदालत ने कहा, यह जमानत अर्जी तीन जुलाई 2026 को ही निस्तारित की जा सकती थी, लेकिन बार-बार रिमाइंडर भेजे जाने और मौखिक निर्देश दिए जाने के बावजूद इस अदालत को आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। पुलिस की इस उदासीनता के चलते यह अर्जी 10 दिनों से अधिक समय तक लंबित रही। अदालत ने जमानत याचिका इस आधार पर मंजूर कर ली कि यासीन की बहू की मौत से पहले दहेज की मांग पूरी नहीं होने को लेकर उसके उत्पीड़न के सिलसिले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। उसने कहा कि स्वतंत्र गवाहों ने पति-पत्नी के बीच मामूली घरेलू विवादों को लेकर अक्सर झगड़े होने के भी संकेत दिए हैं।

19 जून को एसपी भेजा गया था अलर्ट

अदालत ने कहा कि संयुक्त निदेशक (अभियोजन) कार्यालय ने इस जमानत याचिका की प्रति 17 जून को पुलिस पैरोकार को उपलब्ध कराई थी और 19 जून को पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक अलर्ट भी भेजा गया था, लेकिन पुलिस आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में नाकाम रही। तीन जुलाई को सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष को सीसीटीएनएस पोर्टल से केस डायरी का पीडीएफ प्राप्त करने का निर्देश दिया था। इसका अनुपालन करने के बजाय संबंधित पुलिस अधिकारियों ने केवल इन याचिकाकर्ताओं की 'केस हिस्ट्री' भेजी, न की वास्तविक केस डायरी।

हाईकोर्ट ने एसएचओ को भी किया था तलब

इसके बाद, अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ) को तलब किया और उनका यह स्पष्टीकरण स्वीकार किया कि वह पहले अवकाश पर थे और बाद में कांवड़ यात्रा के दौरान उनकी ड्यूटी लग गई थी। हालांकि, उप निरीक्षक हिमांशु पंवार ने केस डायरी भेजने में विफलता के लिए जानकारी के अभाव का हवाला दिया, जबकि क्षेत्राधिकारी ने खुलासा किया कि उनसे संबद्ध हेड कांस्टेबल उच्च न्यायालय के निर्देशों की जानकारी देने में पूरी तरह विफल रहा। पीठ ने इसे बहुत ही चौंकाने वाला पाया कि नोटिस की प्राप्ति से 25 दिन से अधिक का समय बीत चुका है और अलर्ट, रिमाइंडर तथा मौखिक निर्देशों के बावजूद ये जानकारियां अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। उसने कहा कि अधिकारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में जुटे हुए हैं।

Dinesh Rathour

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Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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